मेरे घर की औरतों की चुदाई

(Mere ghar ki aurato ki chudai)

दोस्तों मेरा नाम मनोज है और मेरी उम्र 30 साल है.. मेरा अपना एक बहुत बड़ा कारोबार है. मेरे घर में, मेरी माँ उनका नाम रेणुका और उनकी उम्र 55 साल है और पापा का स्वर्गवास हो गया है. बड़ी बहन बबीता (बब्बू) है उसकी उम्र 33 साल की है और उसकी शादी हो चुकी है. में अब आपको अपनी कहानी शुरू से सुना रहा हूँ. हमारे घर में एक वॉचमेन है जिसका नाम बहादुर सिहं है और वो पंजाब का रहने वाला है और पापा ने उसको रहने के लिए एक मकान दे रखा था और वो अपने परिवार के साथ रहता था. उसके परिवार में उसकी वाईफ और एक लड़का है.. उसकी उम्र मेरे बराबर है और उसका नाम गौरव है. बहुत सालो से बहादुर सिहं हमारे पास कम कर रहा है तो इसलिए उसे हम परिवार का एक हिस्सा ही मानते है. फिर में अपनी पढ़ाई खत्म करके कारोबार देखने लगा और बबीता की शादी हो चुकी थी और वो अपने ससुराल में रहती थी.

फिर जब में 27 साल का हुआ तो उस समय पापा की मौत हो गई और पूरा कारोबार का भार मेरे अकेले के ऊपर आ गया.. बहादुर सिहं का लड़का गौरव मुझसे 3 साल बड़ा है और वो भी वॉचमेन, माली और घर के कई छोटे मोटे काम करता था.. क्योंकि वो ज्यादा पड़ा लिखा नहीं था. पापा की म्रत्यु के एक साल बाद माँ मुझे शादी के लिए बोलने लगी और कहने लगी कि अब तू शादी कर ले. मेरा लंड 3.5 इंच का है जिसकी वजह से में शादी करने में कोई ना कोई बहाना मार कर माँ को टालता रहा और पापा के जाने के बाद माँ शादी के लिए बहुत ज़ोर डालने लगी.. लेकिन में कैसे उसे समझाता कि में किसी लड़की को संतुष्ट नहीं कर सकता था. फिर बहुत सी लड़कियों के बड़े बड़े घर से रिश्ते आए.. लेकिन में सभी को कोई ना कोई बहाना करके मना करता रहा. वैसे तो में देखने में बहुत सुंदर हूँ और हर लड़की मुझे देखकर पसंद कर लेती थी.. लेकिन में अपने बहुत छोटे लंड की वजह से किसी लड़की को हाँ नहीं कहता. फिर मैंने ब्लू फिल्म में लोगों के बड़े बड़े लंड देखकर मुझे अपने आप के ऊपर बहुत गुस्सा आता था.

गौरव भी हट्टा कट्टा था.. लेकिन उसका रंग काला होने की वजह से उसकी शादी भी नहीं हो रही थी. जब गौरव 31 साल का हुआ तो उसे एक काली कलूटी लड़की ने हाँ कर दी और उसकी शादी हो गई.. लेकिन सुहागरात के दिन रात को जब गौरव अपने बेडरूम में सुहागरात मनाने के लिए गया तो.. थोड़ी ही देर बाद उसकी वाईफ ने उसे बोला कि में पेशाब करके अभी आती हूँ और फिर वो कमरे से बाहर निकल गई और वापस नहीं आई और गौरव भी बहुत उदास रहने लगा. फिर बहादुर सिहं ने पंजाब से एक बहुत ग़रीब घर की लड़की देखी और गौरव की दोबारा से शादी कर दी. तो सुहागरात की रात को गौरव रूम में गया और में अपने रूम में बैठा बैठा सोच रहा था कि में क्या करूं माँ को कैसे समझाऊँ? फिर रात को 4 बजे बहादुर सिहं का फोन आया कि मालिक बहू बेहोश हो गई है और अगर आप गाड़ी दे तो हम उसे हॉस्पिटल ले जाते. तभी मैंने सोचा कि आज पहली रात को ही उसे क्या हो गया? और मैंने गाड़ी की चाबी गौरव को दे दी और बोला कि तुम आराम आराम से गाड़ी ले जाओ. फिर गौरव उसकी माँ, पापा और नई नवेली दुल्हन को लेकर निकल गये. गौरव ने गाड़ी बहुत तेज चलाई थी जिसकी वजह से गाड़ी का आक्सिडेंट हो गया और बहादुर सिहं, उसकी वाईफ और उसकी बहू की मौके पर ही मौत हो गई और गौरव को हॉस्पिटल में भर्ती करवा दिया. फिर एक महीने के बाद गौरव को छुट्टी मिल गई और वो घर आ गया और मेरी ही तरह गौरव भी बहुत उदास रहने लगा.. मुझे तो शादी नहीं करनी थी इसलिए उदास था और गौरव शादी के चक्कर में दो शादी के बाद भी फिर से अकेला था. फिर मैंने एक दो बार अपने ड्राईवर और दूसरे लोंगो को बात करते सुना कि गौरव का लंड बहुत बड़ा है और इसलिए उसकी पहली बीवी उसे देखकर बहाना बनाकर घर से भाग गई और दूसरी एक ही झटके में बेहोश हो गई थी और फिर होश में नहीं आई और बाद में तो दुर्घटना में मर गई. तो यह सुनकर तो मुझे अपने लंड की याद आ गई और मुझे अपने आप पर बहुत शरम महसूस हुई कि यदि में शादी कर लेता हूँ तो मेरे बारे में भी लोगों को पता लग जाएगा.

फिर माँ बार बार मुझे शादी के लिये बोल रही थी और जब मेरी कोई बात नहीं चली तो मैंने माँ को बोला कि ठीक है में शादी कर लेता हूँ.. लेकिन में बहुत ही ग़रीब लड़की से शादी करूँगा. मैंने सोचा कि ग़रीब लड़की किसी को कुछ बताए बिना जब मुझसे संतुष्ट नहीं होगी तो घर से भाग जाएगी और उससे कोई ना कोई लड़का शादी कर ही लेगा और में कुछ पैसे से उसकी मदद कर दूँगा और माँ कुछ बोल नहीं पाएगी. फिर शादी के लिए हाँ सुनकर माँ बहुत खुश हो गई और लडकियाँ देखने लगी. माँ ने एक लड़की देखी जिसका नाम मालती था और वो बहुत ग़रीब थी.. लेकिन थी बहुत सुंदर और उसकी उम्र 19 साल थी और में उस समय 29 साल का था. माँ ने बोला कि किसी को उम्र का पता नहीं लगेगा और ग़रीबी की वजह से लड़की और उसके माँ, बाप सब राज़ी थे. तो मैंने सोचा कि 19 साल तो बहुत छोटी उम्र है शायद में उसे संतुष्ट कर सकूँ? और फिर मेरी बड़ी धूमधाम से शादी हो गई और में सुहागरात को कमरे में गया तो मालती बेड पर बैठी थी. मैंने उसका घूँघट उठाया तो उसने आँखे बंद कर ली और बहुत देर बातें करने के बाद मैंने उसके कपड़े उतारने शुरू किए तो वो शरमा गई.

फिर मालती को पूरा नंगा करने के बाद मालती ने मेरे कपड़े उतारे और उस रात में कुछ नहीं कर पाया और मालती खामोश होकर साईड में होकर सो गई. फिर सुबह जब उठा तो में मालती से मुहं छुपाकर घूम रहा था और इतने में मेरी बहन बबीता आई और कहने लगी कि क्यों भाभी रात कैसी कटी? फिर मालती ने मेरी तरफ़ देखा और नज़रे झुकाकर रूम की तरफ़ चली गई और मालती के पीछे में भी आ गया. तभी मालती बोलने लगी कि आपने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी आप अगर ऐसे थे तो आपने शादी ही क्यों की? फिर मैंने मालती को सब कुछ बता दिया तो मालती बोलने लगी कि आपने अपनी माँ को सच बता देना था. मैंने मालती को बोला कि में तुम्हारी पूरी मदद करूँगा और तुम घर से भाग जायो और किसी और से शादी कर लो. तो मालती बोली कि हम ग़रीब ज़रूर है.. लेकिन इज़्ज़तदार है.. अगर मैंने ऐसा किया तो मेरे माँ, बाप खुदखुशी कर लेंगे और अब सारी जिन्दगी ऐसे ही कटेगी. फिर इस तरह से 15 दिन बीत गये और बबीता वापस अपने ससुराल चली गई और नवरात्रे का समय आ गया था तो माँ एक सप्ताह का टूर बनाकर माता के दर्शन को चली गई.

फिर मैंने मालती को बोला कि मालती तुम मेरे लिए परेशान मत रहो तुम किसी लड़के से संबध बना लो बस किसी को पता ना चले और घर की बदनामी ना हो. तो मालती बोली कि लोगों को सब पता चल जाता है और ठीक है आप ही कोई ढूंड दो. फिर में बहुत दिनों तक सोचता रहा और फिर एक दिन मुझे गौरव का ख्याल आया.. उसे भी ज़रूरत है और मेरा काम भी हो जाएगा और मालती लोंगों की नजर में मेरी वाईफ रहेगी और गौरव उसे संतुष्ट करता रहेगा. तो मैंने गौरव को बुलाकर डरते डरते सारी बात बता दी और फिर उसने बोला कि ठीक है वैसे भी मैंने शादी ना करने की कसम खा ली है. उस समय घर पर में, मालती हम दोनों ही थे और रात का प्रोग्राम फिक्स हो गया. फिर मुझे ध्यान आया कि मेरा ड्राईवर और उसके साथी उस दिन गौरव के लंड के बारे में बोल रहे थे कि उसका लंड बहुत बड़ा है और मालती अभी 19 साल की है.. अगर उनकी बातें सच थी तो कहीं मालती भी बेहोश ना हो जाए? फिर मैंने गौरव और मालती को अपने बेडरूम में भेज दिया और में खुद गेस्ट रूम में चला गया. हमारा घर बहुत बड़ा है उसमे कई कमरे है और शहर से साईड में है. मुझे नींद नहीं आ रही थी कि अगर में शादी नहीं करता तो ठीक था. रात को 11 बजे के करीब मालती के चीखने चिल्लाने की आवाज़ आई मालती बहुत ज़ोर से चिल्लाई और में उठकर उनके रूम की तरफ़ भागा और में दरवाजे पर नॉक ही करने वाला था कि मैंने सोचा कि गौरव भी आख़िर एक इंसान है और 32 साल का आदमी है और वो हर बात समझता है. एक खिड़की खुली थी तो में उस खिड़की से देखने लगा.

में तो देखकर हैरान रह गया गौरव का लंड तो गधे के बराबर था.. लगभग 10” इंच लंबा और बहुत मोटा. मालती डरी हुई कोने में बैठी थी. फिर मुझे याद आया कि मेरा ड्राईवर और उसके साथी ठीक बोल रहे थे. मालती बिल्कुल नंगी बैठी थी और गौरव अपना लंड लटकाए मालती को मना रहा था और गौरव बोल रहा था कि मालती में बहुत धीरे धीरे दूँगा.. अब एक बार तो दर्द होगा उसमे में क्या कर सकता हूँ? फिर मालती बोलने लगी कि में ऐसे ही ठीक हूँ और मुझे सेक्स नहीं करना. गौरव मालती के बूब्स चूसने लगा और उसके पूरे शरीर पर किस कर रहा था और उसने मालती की चूत के छोटे से छेद पर बहुत सारा तेल लगाया. मालती अब मदहोशी में अपनी आँखे बंद कर रही थी और में खिड़की के बाहर से देख रहा था और सोच रहा था कि आज मालती की हालत खराब हो जाएगी.. लेकिन मालती भी गावं की रफ और टफ लड़की थी. फिर गौरव ने जैसे ही लंड उसकी चूत पर रखा तो मालती रोने लगी.. वो लंड को चूत के ऊपर घुमाने लगा.. शायद मालती को गुदगुदी हो रही थी.. फिर ऐसा करते करते गौरव ने लंड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू किया और मालती को अब मज़ा आ रहा था.

फिर गौरव ने एक झटका मारा और आधा लंड मालती की चूत को फाड़ता हुआ अंदर चला गया और मालती ज़ोर ज़ोर से चिल्लाने लगी.. बचाओ मेरी चूत फाड़ दी, कोई है? मनोज कहाँ हो तुम? मुझे आकर बचाओ, मुझे सेक्स नहीं करना है. गौरव ने दोनों हाथों से मालती को पकड़ा हुआ था कि कहीं मालती हिली तो लंड बाहर आ जाएगा.. गौरव बोल रहा था कि बस मालती एक झटका और.. लेकिन मेरे सिवाए मालती की चीख सुनने वाला कोई नहीं था. फिर मालती ज़ोर ज़ोर से चिल्लाती रही और दूसरे झटके में गौरव ने पूरा लंडा अंदर डाल दिया और मालती को पसीना छुट रहा था. फिर जैसे ही गौरव ने लंड बाहर निकाला तो मालती की चूत से खून बाहर आने लगा और मालती बेहोश हो गई. तो में दरवाजे पर आकर नॉक करने लगा तो उससे पहले गौरव ने दरवाजा खोला और मैंने उसे बोला कि मालती बड़े ज़ोर से चिल्लाई तो में देखने आ गया. फिर गौरव बोला कि हाँ उसकी सील टूटी तब चिल्लाई थी और सभी लड़कियाँ ऐसे ही चिल्लाती है. तो मैंने उसे बोला कि में मालती के मुँह पर पानी के छींटे मारता हूँ. तभी गौरव बोला कि नहीं अभी नहीं.. में एक बार उसे बेहोशी में चोद लेता हूँ फिर मारना और गौरव ने अपना लंड मालती की चूत में डाल दिया और ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा और धक्के पे धक्के देने लगा. मालती बेहोशी में भी ऐसी लग रही थी जैसे दर्द से चिल्लाने की कोशिश कर रही हो. फिर गौरव ने अपना पूरा वीर्य मालती के पेट पर गिरा दिया और मुझे बोला कि अब इसके मुँह पर पानी के छींटे मारो और बहुत देर बाद मालती होश में आई. फिर होश में आते ही मुझसे लिपट गई और बोलने लगी कि मनोज में तो इतने बड़े लंड से मर जाऊंगी. तभी गौरव बोला कि मालती जो होना था हो गया. अब तुम्हे भी चुदाई का मजा आएगा. उस रात को में भी उनके साथ ही सो गया और दूसरे दिन मालती उठ नहीं पाई.. तो मैंने और गौरव ने उसे उठाकर बाथरूम में स्नान करवाया और मालती सारा दिन नंगी पड़ी रही और फिर दो रातें बीत जाने के बाद मालती कुछ ठीक हुई.. फिर अगली रात को गौरव ने मालती को फिर से चोदा तो इस बार मालती भी गौरव का साथ देने लगी. फिर चुदाई का सिलसिला चालू हो गया.. गौरव को एक चूत और मालती को लंड मिल गया था. फिर एक दिन माँ अपना टूर ख़त्म करके वापस आ गई.. और मालती की हालत देखकर बोली कि क्यों मालती बहुत मज़े हो रहे है? तो मालती बोली कि हाँ माँ जी.

फिर एक दिन माँ ने मालती और गौरव को रंगे हाथों पकड़ लिया और माँ ने मुझे भी बुलाया और बोला कि यह लड़का हमारे घर की इज्जत से खेल रहा था और माँ बोली कि अगर पुलिस को बुलाते है तो हमारे घर की बदनामी होगी. फिर माँ बोली कि गौरव तुम चुपचाप घर से निकल जाओ और कभी भी इस घर में मत आना. तो मैंने बोलना शुरू किया और मैंने माँ को सब कुछ सच सच बता दिया. तो माँ ने गौरव को बोला कि ठीक है बेटा.. लेकिन किसी को इस बात का पता ना लगे. शादी को 6 महीने हो गये थे और मालती एक सप्ताह के लिए अपने माँ, बाप के घर गई हुई थी. एक दिन शाम को में 4 बजे के करीब घर पर आया तो दरवाजा बंद था और मैंने गौरव को देखा तो कोई भी नज़र नहीं आया.. मैंने माँ को फोन मिलाया तो स्विच ऑफ़ आया. फिर मैंने सोचा कि माँ तो शायद बज़ार चली गई होगी.. लेकिन गौरव को तो दिखाना चाहिए.. कहीं कोई चोर आ गया तो.

तो मैंने अपनी चाबी से दरवाजा खोला और अंदर आ गया.. इतने में माँ के रूम से आवाज़ आई उई माँ मर गई कोई है? बचाओ मुझे. तो में माँ के रूम की तरफ़ भागा.. माँ के रूम का दरवाजा खुला था और जैसे ही मैंने अंदर देखा तो में तो हैरान रह गया.. गौरव माँ को चोद रहा है और माँ ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही है.. फट गई अरे मार डाला तूने मुझे.. बहू कैसे ले पाती होगी तेरा इतना बड़ा लंड जो में ही नहीं ले पा रही हूँ.. तेरा तो बहादुर से भी बहुत बड़ा है. तो गौरव बोला कि क्या माँ जी तो अपने मेरे पापा से भी चुदवाया है? तो माँ बोली कि हाँ बहुत बार. में तो सुनकर बहुत परेशान हो गया. गौरव ने अपनी स्पीड बड़ा दी और फिर थोड़ी देर बाद माँ भी गौरव का साथ देने लगी और फिर दोनों एक एक करके झड़ गये और में दरवाजे से सब कुछ देख रहा था. फिर जैसे ही माँ पलटी तो माँ ने मुझे देख लिया और बोली कि मनोज तुम कब आए? मैंने बोला कि जब से तुम चिल्ला रही थी. तो माँ बोली कि मुझे माफ़ करना बेटे.. लेकिन क्या करूँ बहुत दिन हो गये थे सेक्स किए हुए और जब मैंने गौरव और बहू को देखा तो गौरव का लंड देखकर में पागल हो गई थी. फिर मैंने बोला कि माँ दिन के टाईम ही तुम लोग चुदाई कर रहे हो किसी को पता चल गया तो? माँ बोली कि अरे किसे पता चलेगा घर साईड में है और इस साईड कोई भी आता जाता नहीं है. फिर माँ और गौरव एक ही रूम में सोने लगे थे और एक सप्ताह के बाद मालती भी आ गई और हमने मालती को सब बता दिया. फिर मालती और माँ गौरव के साथ सोने लगी वो दोनों एक साथ सोती थी और में दूसरे रूम में. फिर ऐसे ही मेरी शादी को एक साल हो गया और में उस टाईम 30 साल का हो गया था. इसी दौरान बबीता के पति यानी मेरे जीजा जी का दिल का दौरा पड़ने से स्वर्गवास हो गया. बबीता के घर वाले उसे पसंद नहीं करते थे और सिर्फ़ जीजा जी ही बबीता का पूरा ध्यान रखते थे. जीजा जी और बबीता ने लव मेरिज की थी.. बबीता अभी 34 साल की थी और बबीता की शादी 18 साल की उम्र में हो गई थी. बबीता की एक लड़की है.. जिसका नाम शालू है और जीजा की म्रत्यु के बाद बबीता अपनी लड़की शालू के साथ हमारे घर पर रहने आ गई और फिर कुछ दिन तो सब कुछ नॉर्मल चलता रहा.. लेकिन मालती और माँ को बहुत प्राब्लम हो गई क्योंकि बबीता दिन में घर पर होती थी और रात को माँ के साथ सोती थी. मालती को तो में गौरव को अपने रूम में बुलाकर रात को चुदवा देता था.. लेकिन माँ का हाल बहुत बुरा था.

फिर एक दिन बबीता और शालू मंदिर गये हुए थे और वो शाम का टाईम था गौरव ने आकर माँ को चोदा और फिर हम लोग बातें करने लगे कि अब बबीता और शालू यहीं रहेगी तो गौरव मालती और माँ को कैसे चोद पाएगा? तो मालती बोली कि माँ जी हम लोग ऐसा करते है कि बबीता को भी अपने साथ मिला लेते है क्योंकि उसे भी तो ज़रूरत है. तो माँ बोली कि हाँ यह ठीक है.. लेकिन शालू का क्या करें? तो यह फाईनल हुआ कि गौरव माँ, मालती और बबीता को जब शालू स्कूल जाया करेगी तब सारा दिन चोदा करेगा. बबीता को समझाने का काम माँ को दिया गया और माँ ने बबीता को अपने प्लान में शामिल कर लिया.. उस दिन शनिवार था और सोमवार का प्रोग्राम तय हुआ.. क्योंकि उस दिन शालू का स्कूल था. रविवार शाम को मालती बबीता को बोल रही थी कि ननद जी आज के दिन मज़े कर लो कल तुम्हारी बहुत बुरी हालत होने वाली है. तो माँ बोली कि बबीता कोई बात नहीं है और में भी इतने में भी आ गया. तो माँ बोली कि मनोज तुम कल घर पर रहना.. बबीता बोली कि माँ यह क्या बोल रही हो? माँ बोली कि इसे सब पता है.. मालती और में इसके सामने ही चुदवा लेते हैं.

फिर सोमवार का दिन भी आ गया और सुबह 9 बजे शालू स्कूल चली गई और मेरे बेडरूम में सभी आ गये.. माँ मालती, बबीता, गौरव और में. तो मालती बबीता को नंगा करने लगी और में माँ को नंगा करने लगा.. गौरव ने अपनी पेंट और शर्ट उतार दी और वो अब अंडरवियर में था. फिर मैंने माँ को पूरा नंगा कर दिया और बबीता ने मालती को और मालती ने बबीता को.. मेरे अलावा सभी लोग नंगे हो गये थे. तो बबीता बोली कि मनोज तुम भी नंगे हो जाओ.. लेकिन में मना करने लगा. माँ बोली कि यहाँ सब को पता है अब कैसी शर्म? लेकिन मैंने मना कर दिया और इतने में माँ बबीता और मालती ने मिलकर मुझे ज़बरदस्ती पकड़ लिया और नंगा कर दिया और में अपने दोनों हाथों से लंड को ढक रहा था. बबीता को गौरव ने अपनी और खींच लिया और माँ मेरे छोटे से लंड से खेलने लगी और जैसे ही बबीता ने गौरव का अंडरवियर उतारा तो बबीता बोल उठी.. बाप रे इतना बड़ा लंड.. में तो मर जाऊंगी. माँ बोली कि तू एक बार लेकर तो देख तुझे कितना मज़ा आता है.. अरे मालती ने तो 19 साल की उम्र में ही ले लिया.. तू तो 34 साल की है और इतनी बार चुदवा चुकी है. फिर गौरव ने बबीता के बूब्स से खेलना शुरू किया और माँ ने गौरव का लंड मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और मालती मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी तो में एकदम से उसके मुँह में झड़ गया. तो मालती बोली कि क्या बाहर नहीं निकाल सकते थे? मेरा पूरा मुँह खराब कर दिया. फिर माँ बोली कि मनोज आज रात में तेरे साथ सोऊंगी और तू आज पूरी रात मुझे चोदना. तो में बोला कि ठीक है. उधर गौरव ने जैसे ही बबीता की चूत में लंड सेट किया और एक जोर का धक्का मारा तो बबीता रोने लगी.. उईईई माँ मार डाला.. मेरी चूत फट गई.. माँ बचाओ मुझे.. गौरव बाहर निकाल अपना गधे जैसा लंड. बबीता के बूब्स को मालती चूसने लगी और उसे गरम करने लगी.. जिससे कि उसका थोड़ा दर्द कम हो और फिर थोड़ी देर बाद बबीता भी गौरव का साथ देने लगी और गौरव थोड़ा रुककर फिर से चुदाई करने लगा. उसने बबीता की चुदाई खत्म करके मेरी माँ और मालती की भी चुदाई शुरू कर दी.. उसने सभी की चूत को चोद चोदकर लाल कर दिया और फिर एक एक करके वो सभी थककर बेड पर लेट गए कोई गौरव का लंड चूसता तो कोई उसके मुहं में बूब्स देकर उसको गरम करता और गौरव भी किसी की चूत में उगंली डालता तो किसी की गांड में और इस तरह वो सभी ग्रुप सेक्स करके बहुत खुश रहने लगे.

दोस्तों हमारे घर का माहोल ऐसा बन गया है कि में तो अपना कारोबार देख रहा हूँ और गौरव खुले सांड की तरह घर में रहता है और उसका जब दिल करे किसी ना किसी को चोद देता है. दिन की गर्मी में तो मालती माँ बबीता और गौरव नंगे घूमते है और जब दिल करे, जहाँ दिल करे चुदाई शुरू कर देते है ..



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