मेघा की तड़प-3

(Megha Ki Tadap-3)

अदिति अपनी सफ़ल हुई योजना से खुश थी। जो वो मेघा को दिखाना चाहती थी वो दिखा चुकी थी। बस अब मेघा की तड़प ही उसे प्रकाश से चुदवायेगी।

सवेरे मेघा की नींद अदिति की आवाज से खुली- मेघा, मैं जा रही हूँ, प्रकाश को नाश्ता करवा देना। मुझे देर हो रही है।

तभी अदिति की स्कूल बस आ गई। वो रोज की तरह एक अध्यापक की बगल में बैठ बैठ गई। दूसरी अध्यापिकाओं ने अपनी रहस्यमयी मुस्कान बिखेर दी, अदिति अपनी आँखें तरेरती हुई सामने देखने लगी। उस अध्यापक ने भी अदिति की जांघ में हमेशा की तरह चुटकी भरी। अदिति के चेहरे पर भी मुस्कान फ़ैल गई।

मेघा को पता चल गया था कि अदिति बस में जा चुकी है। वो फिर से सुस्ता कर बिस्तर में अपनी आँखें बन्द करके लेट गई। तभी उसे किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। वो समझ गई कि जीजू होंगे, और अब अकेली पाकर उसे कुछ तो करेंगे ही। बस वो अपनी आँखें बन्द किये हुये कुछ गड़गड़ी होने का इन्तजार करने लगी।

तभी उसने महसूस किया कि जीजू उसके पास बिस्तर पर बैठ चुके हैं। मेघा ने अलसाये अन्दाज में अपनी आँखें खोली और एक सेक्सी अंगड़ाई लेते हुये बोली- जीजू … ओह … गुड मॉर्निंग…

पर जीजू ने उत्तर में उसकी दोनों बाहें दबा ली और उस पर झुक पड़े- बहुत सेक्सी लग रही हो !

“ओह्हो… क्या कर रहे जीजू … छोड़ो ना…!”

उन्होंने उसकी बाहें छोड़ दी और छोटे छोटे मम्मों पर हाथ रख दिये- कितने मस्त कबूतर हैं।

और हौले हौले से सहलाने लगे।

मेघा के शरीर में बिजलियाँ सी तड़कने लगी। मेघा मन ही ही खुश हो गई … तो जीजू का कार्यक्रम शुरू हो ही गया।

“अरे, क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा ना !”

“अदिति तो स्कूल गई, कोई नहीं है…”

“हाय … शरम तो आती है ना …?”

और मेघा पलट गई। जीजू उसके पीछे लेट गये। अब जीजू कमर में हाथ लपेट कर अपने से कस कर सटा लिया। मेघा का तन तरावट से भर गया। प्रकाश का मस्त लण्ड सख्त होकर उसकी गाण्ड की दरार में ऐसे चुभ रहा था, मानो घुस ही जायेगा। वो शरम से दोहरी हो गई। उसने अपनी टांगें और ऊपर समेट ली। प्रकाश ने मौका देखा और चूतड़ को चौड़ा कर लण्ड को और अन्दर घुसेड़ दिया।

“हाय राम … इनका लण्ड तो पायजामे के ऊपर से ही मानो छेद में घुस जायेगा !” मेघा मन ही मन सोचने लगी।

प्रकाश अपने लण्ड को मेघा की गाण्ड के छेद के ऊपर आगे पीछे रगड़ने लगे। मेघा तो मारे गुदगुदाहट के मस्ती में झूम उठी।

“मेघा, कैसा लग रहा है …? कुछ मस्ती चढ़ी या नहीँ?”

“हाय… मैं मर जाऊँगी … जीजू अब छोड़ो ना…”

“बस थोड़ा सा और लण्ड का रगड़ा मार लू … अच्छा, अब सीधी हो जा … तेरी चूत को रगड़ देता हूँ।”

“क्या कह रहे हो जीजू … ऐसे तो … हाय मम्मी … मुझे बहुत शरम आ रही है !”

मेघा सीधी हो गई। जीजू लपक कर उसके ऊपर चढ़ गये। अपने लण्ड को लुंगी में से निकाल कर पायजामे के ऊपर से ही लण्ड को मेरी चूत पर दबा दिया। मेघा को चूत पर मीठी सी चुभन हुई। फिर जीजू उस पर लेट गये और अपने लण्ड को उसकी चूत पर हौले हौले रगड़ने लगे। मेघा के मन में जैसे वासना का मीठा मीठा दर्द होने लगा। चूत मीठी सी कसक से फ़ूलने लगी। चूत का द्वार खुलने लगा था। वो हौले हौले मस्ताने अन्दाज से चोदने की स्टाईल में लण्ड घिस रहे थे। मेघा को लग रहा था कि उसे जीजू जोर से चोद डाले। अचानक जीजू की रफ़्तार तेज होने लगी। मेघा भी अपनी चूत जीजू के लण्ड पर दबा कर जल्दी जल्दी रगड़ने लगी। तभी उसे तेज मस्ती सी आई और वो झड़ने लगी। इसी तेजी के आलम में जीजू ने अपना लण्ड ऊपर उठाया और हाथ से दबा दबा कर अपना वीर्य मेघा पर उछल दिया। वीर्य मेघा के कपड़ों पर और उसके चेहरे पर आ गिरा। मेघा पिचकारियों के रूप में उसके लण्ड को झड़ते हुये देख रही थी। यह कहानी आप autofichi.ru पर पढ़ रहे हैं।

मेघा ने जल्दी से बिस्तर छोड़ा और नीचे आ गई, दौड़ कर वो बाथरूम में घुस गई। उसने इधर उधर देखा फिर जीभ से अपने चेहरे पर लगे वीर्य को चाट लिया। काफ़ी सारा वीर्य था। अपनी अंगुली की सहायता से वो इधर उधर से सारा वीर्य लेकर उसे चाटने लगी। फिर सर झटक कर बड़बड़ाई- कोई खास नहीं है … हुंह।

मेघा ने अपने कपड़े उतार कर वॉशिंग मशीन में डाल दिये और साफ़ सुथरी हो कर तौलिया लपेट कर बाहर आ गई। बाहर जीजू खड़े हुये थे वैसे ही नंग धड़ंग … लौड़ा नीचे झूलता हुआ।

जीजू मस्कराये और अपने हाथ से लण्ड का आकार बना चूत में घुसेड़ने का इशारा करने लगे। मेघा बहुत ही शरमा गई।

“मैं नाश्ता लगाती हूँ, जल्दी आ जाईये जीजू।”

प्रकाश स्नान करके, नाश्ते की मेज़ पर बस यूँ ही लुंगी में बैठ गये। मेघा भी तो मात्र तौलिया में लिपटी हुई नाश्ता कर रही थी। उसे तो बस लग रहा था कि जीजू अब बस उसे चोद ही डाले। मन ही मन वो चुदने के लिये एकदम तैयार थी। प्रकाश बार बार अपने लण्ड को मसल रहा था, उसे लुंगी में से निकाल कर बाहर कर दिया था। मेघा अपनी शरमाती तिरछी नजरों से बार बार जीजू के मसलते हुये लण्ड को निहार रही थी। जीजू का मुस्टण्डा तना हुआ लण्ड उसे बहुत भा रहा था। मेघा ने कभी चुदाया नहीं था सो वो बस इतनी ही कल्पना कर पा रही थी कि लण्ड उसकी चूत में समा गया है, पर उसे वो चुदने वाली उत्तेजना नहीं महसूस हो पा रही थी।

दोनों ने जैसे तैसे नाश्ता किया और बर्तन एक तरफ़ सिंक में रख दिये।

जीजू ने तो वहीं रसोई में ही खड़े खड़े अपनी लुंगी उतार दी और मुस्करा कर मेघा को देखा। मेघा ने जी भर कर जीजू के कठोर सलोने लण्ड को निहारा।

“कैसा है मेघा रानी?”

“दिल को मसल कर दिया है तुम्हारे सलोने लण्ड ने !”

“खाओगी तो मस्त हो जाओगी…!”

प्रकाश मेघा की तरफ़ बढा। मेघा से रहा नहीं गया, वो जीजू की बाहों में झूलने को तड़प उठी। उसका तौलिया नीचे फ़र्श पर खुल कर गिर पड़ा। दुबली पतली सांवली सी मेघा और उसका जवानी से लदा बदन दमक उठा। उसके शरीर की लुनाई जीजू को मदहोश कर रही थी। मेघा जीजू की बाहों में समा गई। चुम्मा चाटी का दौर आरम्भ हो गया। जीजू का लण्ड साली की चूत से टकरा कर दस्तक देने लगा था। दोनों ही सरकते हुये दीदी के कमरे में बिस्तर के निकट आ गये और बिस्तर से टकरा कर जीजू सीधे बिस्तर पर गिर पड़े।

मेघा बिस्तर के पास खड़ी होकर उसके बलिष्ठ शरीर को निहारती रही। उसका तना हुआ सीधा खड़ा हुआ लण्ड मेघा में मन में सांप की तरह लोट लगा रहा था।

मेघा धीरे से झुकी और जीजू के लण्ड को थाम लिया। ओह्ह्ह … इतना मांसल, मुलायम और कठोर, उसने लण्ड का अधखुला सुपाड़े की चमड़ी ऊपर खींच कर उसे पूरा खोल दिया। गुलाबी सुर्ख सुपाड़ा, एक छोटी सी दरार, जिसमे से बूंद बूंद करके रिसता हुआ उसका वीर्य ! उसका मन डोल उठा।

“जीजू … मन करता है लण्ड को कच कच करके खा जाऊँ।”

“सच? जानू … तो जल्दी से खा जाओ !”

मेघा ने अपना बड़ा सा मुख खोला और सुपाड़े को किसी कुल्फ़ी की तरह से चूस लिया। फिर लण्ड का डण्डा थाम कर पुच पुच करके उसे जोर से चूसने लगी। उसे अजीब सा अहसास हो रहा था। चूत की खुजली बढ़ने लगी थी। पहली बार मेघा ने किसी का लण्ड चूसा था। इसके पहले उसने दीदी को ऐसा करते देखा था। उसने लण्ड के नीचे झूलती हुई गोलियाँ देखी तो उसने उसे भी अपने मुख में लेकर चूसने लगी।

“अरे इसे धीरे चूसना, जोर मत लगाना … आण्ड दुखने लगेंगे !”

पर मेघा ने उसके लण्ड को जोर जोर मुठ्ठ मारना और आण्ड पीना जारी रखा। मेघा फिर बिस्तर पर उसके समीप ही लेट गई। प्रकाश ने उसे अपनी बाहों में समेटते हुये अपने शरीर को उसके ऊपर चढ़ा लिया। मेघा नीचे दब गई थी। वासना के नशे में प्रकाश के शरीर का बोझ उसे फ़ूलों जैसा हल्का लग रहा था। दोनों के लब से लब मिल गये। चूत पर लण्ड का दबाव बढ़ने लगा। मेघा ने अपनी टांगें चौड़ी करके फ़ैला दी। प्रकाश ने मेघा की कड़क चूचियों को जोर से मसल दिया। मेघा के सीने में जोर की चुभन हुई। वो चीख सी पड़ी, पर तभी प्रकाश के लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत में अन्दर सरक गया।

“जीजू, यह मोटा सा क्या घुस गया है?”

“यही तो तुम्हारे जीजू का लण्ड है ! कैसा लगा?”

“बहुत मोटा है … देखो धीरे से करना !”

कुछ और जोर लगाने से मेघा कराह सी उठी। जीजू समझ गया कि नया नया माल है। एक चौथाई घुसे हुये लण्ड को ही उसने धीरे धीरे अन्दर-बाहर करना आरम्भ कर दिया। मेघा आनन्द से निहाल हो उठी। पर जीजू धीरे धीरे जोर लगा कर लण्ड भीतर घुसेड़ता भी चला गया। जिसे मेघा ने मस्ती में जरा भी महसूस नहीं किया। बस उसे तो लग़ रहा था कि लण्ड पूरा ही घुसेड़ दे। प्रकाश मेघा को जरा जरा सा लण्ड घुसाते हुये चोदता रहा।

उसकी कमर तो बस उछल उछल कर लण्ड लेती रही।

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“जीजू, प्लीज, जरा एक बार जोर से चोद दो !”

“देखो फिर चिल्लाना नहीं … झिल्ली टूट जायेगी।”

“टूटने दो ना, सुना है मीठा मीठा दर्द होता है, मारो ना, प्लीज बस एक बार !”

जीजू ने अपना लण्ड आधा बाहर निकाला और कस कर शॉट मारा।

“जीजू और जोर से, ऐसे नहीं … दर्द तो हुआ ही नहीं, अरे मारो ना जोर से !”

जीजू ने अब अपने शॉट को तेज कर दिया। वो जम कर चोदने लगा। मेघा खुशी के मारे हाय हाय करती रही और मेघा को पता ही ना चला कि कब उसका पूरा लण्ड जड़ तक बैठ गया है, वो चिल्ला चिल्ला कर बोलती रही- और जोर से जीजू … चोद डालो ना … झिल्ली फ़ाड़ दो ना !

तभी मेघा झड़ने लगी, जीजू भी शॉट मार मार कर थक गया था। वो भी कुछ देर में झड़ गया। सारा वीर्य चूत में ही निकाल दिया था उसने।

मेघा हांफ़ते हुये बोली- यार मेरी झिल्ली तो फ़टी ही नहीं?

“पहले ही आप चुदी हुई हो मेघा जी।”

“सच में नहीं, यह तो पहली बार ही चुदाई हुई है।”

प्रकाश पास में पड़ा एक कपड़े से अपने लण्ड को साफ़ करने लगा।

“अरे यह क्या, मेरा लण्ड तो खून से भरा हुआ है !”

मेघा भी उछल कर बैठ गई। बैठते ही उसकी चूत से वीर्य मिश्रित रक्त बाहर निकलने लगा।

“हाय राम, यह झिल्ली कब फ़ट गई … मस्ती में पता ही नहीं चला।”

खून निकलने के बाद मेघा को अब दर्द महसूस होने लगा। पर वो तो अच्छी तरह से चुद चुकी थी। जीजू तो अभी भी तरावट में थे। नई नई जो मिली थी चोदने के लिये। उसका लण्ड तो फिर से चोदने के लिये तैयार था।

“जीजू अब बस, अब नहीं, अब कल चोदना।”

“अरे क्या बात कर रही हो, नई नई चूत तो पेल दी, अब गाण्ड का भी तो बाजा बजाने दो।”

मेघा नहीं नहीं करती रही, पर प्रकाश ने उसे दबा लिया। मेघा की गाण्ड कभी चुदी नहीं थी इसलिये प्रकाश ने तेल का सहारा लिया। मेघा को उल्टी लेटा कर उसकी गाण्ड में तेल भर दिया और अपना लण्ड जोर से घुसेड़ दिया। मेघा चीख उठी।

“जीजू, बहुत लग रही है, देखो फ़ट जायेगी !”

“बस चुपचाप पड़ी रहो, गाण्ड फ़ाड़ी नहीं तो फिर क्या मारी?”

“अरे नहीं … मां … दीदी … अरे कोई तो बचाओ !”

फिर मेघा रो पड़ी- जीजू, बस करो ना, बहुत दुख रहा है … देखो मेरी गाण्ड फ़ट गई है

“ऊहुं, नहीं फ़टी है, सलामत है, बस चुप हो जाओ। कुछ देर में सब कुछ ठीक हो जायेगा।”

और सच में थोड़ी देर बाद गाण्ड मराते मराते उसका दर्द कम होने लगा। अब मेघा शान्ति से गाण्ड चुदवा रही थी, उसके पास कोई चारा भी तो नहीं था। जब मेघा की गाण्ड चुद चुकी तो प्रकाश के लण्ड में भी दर्द होने लगा। कसी गाण्ड मारने की उसे भी तो सजा मिलनी ही थी। मेघा को पस्त हुई अपनी टांगें चौड़ी करके लेटी रही।

प्लीज मेघा, मुझे माफ़ कर दो, बस मन तड़प गया था तुम्हारी सी प्यारी सी गाण्ड देख कर।

“हाय राम, मेरी हालत तो देखो, अब घर का काम कौन करेगा, दीदी तो दो बजे आ जायेंगी।”

पर कुछ ही देर बाद दीदी का फ़ोन आ गया। उसे किसी सहेली की जन्म दिन की पार्टी में डिनर के लिये जाना था। उसने बताया कि रात को दस बजे उसे सहेली के घर लेने आ जाना। वो स्कूल से सीधे ही सहेली के यहाँ जा रही है।

मेघा ने जीजू को ये बता दिया। पर साथ में डर भी गई कि कहीं जीजू फिर से चोदने ना लगे। पर ऐसा नहीं हुआ, जीजू के लण्ड में दर्द था सो वो भी शान्त ही रहे।

कहानी जारी रहेगी।



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