मेघा की तड़प-4

(Megha Ki Tadap-4)

रात को दस बजे प्रकाश अदिति को लेकर घर आ गये थे। अदिति बहुत थकी हुई सी थी। आते ही वो पहले तो बैठक में बैठ गई और फिर मेघा के साथ ही दीवान पर आकर लेट गई।

“मेघा वो वॉशिंग मशीन में पानी भर कर पावडर मिला देना, कपड़े बहुत सारे हैं।”

“अरे दीदी, अभी भिगा देती हूँ, वो भूल गई थी।”

“ऐसे कपड़े तुरन्त धो दिया कर, वर्ना दाग रह जाते हैं।”

“जी, कैसे दाग…?”

“अब बन मत, ये कपड़े दिन भर की कहानी कह कह रहे हैं, मजा आया ना?”

“मेघा यह सुन कर घबरा सी गई, फिर अपने आप को संयम में रख कर बोली- दीदी, मैंने और जीजू ने तो कुछ भी नहीं किया।

कह कर झेंप सी गई।

अदिति मेघा के उत्तर पर हंस पड़ी, उसे चिकोटी काटते हुये बोली- मुझे पता है, कपड़े देख जरा, उस पर कुछ करने से जो निकलता है ना, वो लगा है, खून भी है।

अब मेघा को काटो तो खून नहीं…

“दीदी, प्लीज नाराज नहीं होना, जीजू ने शरारत की थी तो मैं क्या करती?”

“ओये होये, मेरी मेघा तो बड़ी जलेबी सी सीधी है, इधर आ, मैं कुछ बताऊँ !”

“दीदी, प्लीज, सॉरी। मुझे डांटना मत, जीजू को भी कुछ मत कहना।”

“अरे छोड़ ना, आज पता है … मेरे साथी टीचर, विशाल ने मुझे आज खूब चोदा … मेरी गाण्ड भी खूब बजाई।”

“क्या दीदी… आप भी…? दीदी मजा आया ?” उसने हैरानी से कहा।

“अरे खूब मजा आया …रविवार को हमारे तीन फ़ीमेल टीचर और तीन मेल टीचर और हमारे प्रिसिंपल शाम को एक पार्टी दे रहे है। तू भी चलना, मजा आयेगा।”

“तो क्या दीदी, वहाँ पर वो भी सब होगा?”

“वो क्या चुदाई वगैरह … इसीलिये तो कह रही हूँ। हमारे एक टीचर के पास पार्टनर नहीं है, तो तू बन जाना उसकी पार्टनर।”

मेघा के मन में गुदगुदी सी उठने लगी, वो शरमा गई। यह कहानी आप autofichi.ru पर पढ़ रहे हैं।

“और देख अपने जीजू को मत बताना … ये जो पति होते हैं ना, वो चाहे किसी को भी चोद दें पर उसकी बीवी को किसी से भी चुदते नहीं देख सकते हैं। तू भी इसे ध्यान में रखना…”

मेघा ने भोलेपन से अपना सर हिला कर हामी भर दी।

प्रकाश को रविवार को दिल्ली जाना था। दो दिन का टूर था। अदिति ने इसको देखते हुये ही रविवार का दिन चुना था।

मेघा और अदिति पांच बजे प्रकाश को रेलवे स्टेशन छोड़ आये थे और अब वो टूसीटर ले कर विशाल के घर पहुँच गये। विशाल का फ़्लैट चौथी टॉप मंजिल पर था। उसके सामने वाला फ़्लैट खाली था। विशाल मेघा को देख कर संशय में पड़ गया कि अदिति मेघा को साथ क्यों ले आई है।

जब विशाल ने अदिति से पूछा तो अदिति ने विशाल को आँख मारते हुये कहा- मेरी छोटी बहन है, मैंने इसे बताया है कि आज तुम भी हमारी पार्टी एन्जॉय करना !

विशाल खुश हो गया वरना उसे किसी एक टीचर को किसी के साथ शेयर करना पड़ता। छः बजे तक सभी लोग आ गये थे। सभी का परिचय करवाया गया।

विशाल ने बताया- यह दीपक है, यह राहुल है और ये हमारे प्रिन्सीपल शेखर साहब। ये हमारे लिये नई है मेघा, अदिति मेम की बहन है। और मेघा, यह निशा जी हैं और यह कविता जी।

सभी ने मेघा से हाथ मिलाया, पर शेखर ने उसका हाथ एक विशेष अन्दाज से दबाया। मेघा ने शरमा कर उनका स्वागत किया। व्हिस्की की बोतल बाहर निकल आई। सोडा भी खुल गया। आठ पैग बनाये गये। धीरे धीरे माहौल बनता गया। मेघा ने जानकर शराब बहुत कम पी। वो अधिकतर अपनी शराब पास में पड़े गमले में उड़ेलती रही। दो तीन पैग के बाद धीरे जोड़े बनने लगे। अदिति के पास विशाल आ कर बैठ गया। दीपक निशा के पास चला आया। कविता राहुल से चिपक गई। मेघा के हिस्से में शेखर प्रिन्सीपल आये। मेघा ने सभी को देखा फिर अदिति को देखा। अदिति ने उसे शेखर के पास जाने का इशारा किया। मेघा शरमाती हुई धीरे से एक अदा के साथ उठी और शेखर से सट कर बैठ गई।

“ये शेखर साहब के लिये मेघा फ़्रेशर हैं … हिप हिप हुर्रे …”

शेखर ने मेघा को देखा और सभी के सामने उसकी छाती को सहला दिया। मेघा ने अपने दोनों हाथों से अपना मुख शरमा कर छुपा लिया।

“अभी शादी नहीं हुई है ना, इसलिये शर्माती है।” निशा में फ़िकरा कसा। फिर निशा ने बेशर्मी के साथ दीपक का लण्ड दबा दिया।

शेखर ने अपनी राय दी- मेघा इस महफ़िल के लिये नई नई है, इसे पहले पुरानी बनाओ।

“क्या मतलब…?” सभी ने एक ही साथ पूछा।

सभी मर्द एक साथ पहले मेघा को चोदेंगे, आप सब क्या कहते हैं?”

“कहना क्या है, ताजा माल किसे पसन्द नहीं।” सभी ने इस बात का स्वागत किया।

“मेघा जी, चिन्ता मत करो, कोई जबरदस्ती नहीं है, चाहे एक से चुदाओ, चाहे दो से, तीन से या चारों से… यह आप पर छोड़ते हैं।”

“जी तीन जने बहुत रहेंगे।” मेघा ने कहा फिर जोर से शरमा गई।

शेखर मेघा व अदिति को लेकर अन्दर के कमरे में चले गये, जहां नीचे मोटे मोटे गद्दे लगे थे। कविता और निशा भी शेखर के साथ चली आई। मेघा को सभी ने नंगी करके बेड रूम के बिस्तर पर लेटा दिया। सभी मर्द नंगे हो गये थे।

सबसे पहले दीपक ने अपना लण्ड मेघा के मुख में प्रवेश करा दिया। राहुल का लण्ड मेघा ने अपने हाथ से पकड़ लिया और विशाल झुक कर मेघा की सफ़ाचट चूत चाटने लगा।

“मेघा जी, जरा भी तकलीफ़ हो तो प्लीज कह देना … हम लोग जानवर नहीं है, बस थोड़ा सा आनन्द पाने के लिये ये खेल खेल रहे हैं। हम आपको भी आनन्द देना चाहते हैं।”

यह सुन कर मेघा का डर जाता रहा और उसे आनन्द आने लगा। अभी तक तो उसे लग रहा था कि यह सब करना ही पड़ेगा चाहे जबरदस्ती ही क्यों ना करना पड़े। वो बेफ़िक्री से अपनी आँखें मदहोशी में बन्द करके मजे लेने लगी।

तभी विशाल ने चूत चाटना बन्द करके उसे बैठा दिया।

“मेघा मेरे ऊपर आ कर मुझे चोदो आराम से ! ठीक है ना?”

मेघा ने विशाल को नीचे लेटा लिया और उसके ऊपर चढ़ गई। विशाल ने अपना लण्ड धीरे उसकी चूत पर रख दिया।

“यह मोटा बहुत है, जरा धीरे घुसाना।”

“अरे राहुल का लण्ड तो देखो, मेरे से भी मोटा है, फिर उसका क्या करोगी…?”

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“धत्त, ऐसे मत कहो विशाल..!”

विशाल का लण्ड उसकी चूत में धीरे से चला गया। जब आधा लण्ड घुस गया तो विशाल ने मेघा को खींच कर अपने ऊपर लेटा लिया। तभी राहुल पीछे से मेघा के ऊपर आ गया। उसने मेघा की गाण्ड को चीरा और कोमल गाण्ड के फ़ूल पर अपना सुपाड़ा रख दिया।

“उफ़्फ़, क्या कर रहे हो राहुल?”

“दोनों तरफ़ से नहीं चुदवाओगी क्या…?”

मेघा का मन खिल उठा। जाने कब से वो सोच रही थी कि दो दो लण्ड चुदेगी, एक चूत में और एक गाण्ड में खाने से कितना मजा आयेगा। अचानक ही वो समय आ गया। उसने खुशी से कहा- राहुल, प्लीज घुसा दो, दो दो लण्ड, उफ़्फ़ कितना मजा आयेगा, चोद दो रे चोद दो।

राहुल का लण्ड वास्तव में बहुत ही मोटा था। उसने जब लण्ड गाण्ड में घुसेड़ा तो वो कराह उठी।

“लगी तो नहीं मेघा जी?”

“उफ़्फ़, ओह्… अरे नहीं मजा आ रहा है … मार दो गाण्ड !”

दोनों तरफ़ से लण्ड अन्दर प्रवेश करने लगे। सामने से दीपक का लण्ड उसके मुख के आगे लहरा रहा था। दीपक बार बार मुठ्ठ मार कर उसके मुख पर मार रहा था। अब मेघा ने अपना मुख खोला और और दीपक का लण्ड मुख में ले लिया। मेघा के दोनों उरोज राहुल के कब्जे में थे। ऐसी चुदाई से मेघा बहुत ही खिल उठी थी। उसकी चूत और गाण्ड धीरे धीरे धक्कों से चुद रही थी। दो डण्डे अन्दर बाहर होते हुये उसे स्पष्ट महसूस हो रहे थे। दोनों लण्ड ही मोटे मोटे और लम्बे थे।

यकायक विशाल और राहुल दोनों ही जोश में भरने लगे और चोदने की स्पीड बढ़ गई।

“आह्ह… मर गई मां … दीदी … आह्ह … चोद दिया मुझे तो…। उफ़्फ़्फ़ जरा मस्ती से … जोर से राम रे …!”

दोनों ही तेज रफ़्तार से चोदने लगे, उन्हें मस्ती चढ़ गई थी। शॉट पर शॉट मेघा को स्वर्ग में सैर करा रहे थे। तभी राहुल का वीर्य जोर से छूट गया। गाण्ड कसी जो थी… दीपक लपक कर राहुल के स्थान पर आ गया। राहुल के वीर्य से चिकनी गाण्ड में दीपक को लण्ड घुसाने में कोई परेशानी नहीं हुई। सट से भीतर समाता चला गया। मेघा मस्ती से चीख उठी।

तभी विशाल भी झड़ने को होने लगा। दीपक भी पूरे जोश में लण्ड चलाने लगा। तभी विशाल ने अपना वीर्य उसकी चूत में ही उगल दिया। मेघा तड़प उठी वो भी झड़ने को थी। तभी दीपक ने भी अपना वीर्य त्याग दिया।

तभी मेघा चीख उठी… अरे कोई चोदो रे मुझे … जोर से चोदो ना सभी झड़ गये क्या …?

तभी शेखर की आवाज आई … मेघा जी, मैं अभी बाकी हूँ …!

शेखर ने मेघा को अपनी बाहों में दबाया और कहा- मेघा जी, लो मैं आ गया, आपका शेखर !

तभी मेघा चीख उठी, उसे लगा कि उसकी चूत फ़ट जायेगी, उफ़्फ़ इतना मोटा लण्ड… यह लण्ड है या लोहे का डण्डा…? अरे दीदी, कोई रोको तो … बस करो मैं मर जाऊँगी !

“अरे मेरी बहन, लौड़ा इसे कहते हैं, खा के तो देख…!”

उसकी चूत में जैसे जलता हुआ अंगारा सा घुस पड़ा।

“बहुत टाईट है साली चूत तो…!”

“बस … बस … अब नहीं…”

तभी दूसरा शॉट लगा। उसकी आँखें जैसे बाहर को निकल आई। फिर शॉट पर शॉट … मेघा में अब चुदते चुदते सहने की शक्ति आ गई थी। वो अब आनन्द में खोने लगी थी। उसकी कसी चूत शेखर को मार ही गई। उसने एक हुंकार सी भरी और अपना लण्ड मेघा की चूत में जोर से दबा दिया और लिपट कर अपना वीर्य छोड़ने लगा। तभी मेघा ने भी सिहर कर एक चीख मारी और झड़ने लगी। शेखर झड़ कर सुस्त हो गये थे। मेघा भी इतने लण्ड खाकर लस्त सी पड़ गई थी। वो शेखर को अपना शुक्रिया कह रही थी।

“शेखर साहब, आपने तो मजा दे दिया, क्या लण्ड है, शुक्रिया।”

“मेघा जी, मुझे भी आप जैसी आज तक नहीं मिली … आप तो मेरे लायक हैं।”

सभी फिर से अपने अपने पार्टनर को चोदने में लगे थे। सभी मगन थे। रात के बारह बज रहे थे। सभी डिनर के लिये जमा हो गये थे।

डिनर आदि से निपट कर शेखर साहब ने घोषणा की- जुलाई माह से मेघा जी मेरे स्कूल में पढ़ाई के साथ साथ आप सभी के साथ टीचर का काम करेंगी। आशा है मेघा जी मेरे प्रस्ताव को स्वीकार करेंगी।

अदिति ने सुना तो वो खुशी से उछल पड़ी। उसने मेघा को गले से लगा लिया। मेघा ने बड़े ही प्रफ़ुल्लित मन से शेखर साहब को शुक्रिया कहा और घुटनों के बल बैठ कर शेखर साहब का लण्ड बार बार चूस कर उनका आभार व्यक्त किया।

सभी ने तालियाँ बजा कर मेघा को बधाई दी। मेघा को पता था यहाँ तो लण्डों की कोई कमी नहीं है … बस मजा ही मजा है। प्रकाश के आने तक अदिति और मेघा ने उन लण्डों से खूब चुदाई का आनन्द लिया।

अगले सत्र जुलाई से अब मेघा कॉलेज में दाखिला ले चुकी थी और स्कूल में टीचर बन गई थी। अदिति को मेघा से काफ़ी मदद थी। वो साथ साथ आती जाती थी। जीजू को शक होने पर मेघा उससे चुदा लेती थी और उसे मना लेती थी। अदिति और मेघा अब घर में जीजू से चुदती और बाहर तो फिर कहने क्या … लण्डों की बहार थी।



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