माँ की बुर गरम हो गई मेरा मोटा लंड देख कर

(Maa Ki Bur Garam Ho Gai Mera Mota Lund Dekh Kar)

हमारे परिवार के सभी सदस्य एक विवाह में शरीक होने अपने गांव गये थे, हम तीन भाई-बहन और मां-बाबूजी। मैंने 12वीं की बोर्ड की परीक्षा दी थी और परिणाम का इंतज़ार कर रहा था। Maa Ki Bur Garam Ho Gai Mera Mota Lund Dekh Kar.

मैं तीनो भाई बहन में सबसे बडा हूं। उस समय 20 साल में था और अन्य लडकों की तरह मुझे भी चूची और चूत की तलाश थी लेकिन उस समय तक एक भी औरत या लडकी का मज़ा नहीं लिया था। बस माल को देखकर तरसता रहता था और लंड हिलाकर पानी निकाल कर संतुष्ट हो जाता था। दोस्तों के साथ हमेशा चूची और चूत की बातें होती थी। मुझसे छोटी बहन, माला है और उससे छोटा एक भाई।

मां का नाम संध्या है और उस समय वो 39-40 साल की भरपूर जवान औरत थी। बाबूजी 42 साल के मजबूत कद-काठी के मर्द थे जो किसी भी औरत की जवानी की प्यास को बुझा सकते थे। बाबूजी की तरह मैं भी लम्बा और तगड़ा था लेकिन पता नहीं क्यों मुझे लड़कियों से बात करने में बहुत शरम आती थी, यहाँ तक कि मैं अपनी 18 साल की मस्त जवान बहन के साथ भी ठीक से बात नहीं करता था।          “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

गांव में शादी में बहुत से लोग आये थे। चचेरी बहन की शादी थी, खूब धूमधाम से विवाह सम्पन्न हुआ। विवाह के बाद धीरे-धीरे सभी मेहमान चले गये। मेहमानों के जाने के बाद सिर्फ घरवाले ही रह गये थे। पांच भाईयों में से सिर्फ मेरे बाबूजी गांव के बाहर काम करते थे, बाकी चारों भाई गांव में ही खेती-बाड़ी देखते थे। गांव की आधी से ज्यादा जमीन हमारी थी।

बाबूजी की छुट्टी खत्म होने को थी, हम लोग भी एक दिन बाद जाने वाले थे। हम वहाँ 17-18 दिन रहे। बहुत लड़कियों को चोदने का मन किया, बहुत औरतों की चूची मसलना चाहा लेकिन मैं कोरा का कोरा ही रहा। मेरा कमरे में एक चौकी थी और उस पर एक बिछौना भी था। मैं तुरंत आंगन वापस आया। संध्या अभी भी बाहर ही बैठी थी और सुरेश को घूर रही थी। मैं उसके बगल में बैठ गया और कहा कि वो दस मिनट के बाद उस नौकर वाले कमरे में आ जाये। वहाँ से उठ कर मैं राजू के पास आया और उसकी पीठ थप-थपा कर मेरे साथ आने को कहा। वो बिना कुछ बोले मेरे साथ आ गया। मैंने देखा कि मां के चेहरे पर मुस्कान आ गई है।                   “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

सुरेश को लेकर मैं उस कमरे में आया और दरवाज़ा खुला रहने दिया। मैं आकर बिछौने पर लेट गया और सुरेश से कहा कि मेर पैर दर्द कर रहा है, दबा दे.. यह कहते हुये मैंने अपना पजामा बाहर निकाल दिया। नीचे मैंने जांघिया पहना था। राजू पांव दबाने लगा और मैं उससे उसके घर की बातें करने लगा। वैसे तो सुरेश के घरवाले हमारे घर में सालों से काम करते हैं फिर भी मैं कभी उसके घर नहीं गया था। सुरेश की दादी को भी मैंने अपने घर में काम करते देखा था और अभी उसकी माँ और भैया काम करते हैं। गोपल ने बताया कि उसकी एक बहन है और उसकी शादी की बात चल रही है। वो बोला कि उसकी भाभी बहुत अच्छी है और उसे बहुत प्यार करती है।

अचानक मैंने उससे पूछा कि उसने अपनी भाभी को चोदा है कि नही। राजू शरमा गया और जब मैंने दोबारा पूछा तो जैसा मैंने सोचा था, उसने कहा कि उसने अब तक किसी को चोदा नहीं है।
मैंने फिर पूछा कि चोदने का मन करता है या नहीं?

तो उसने शरमाते हुये कहा कि जब वो कभी अपनी माँ को अपने बाप से चुदवाते देखता है तो उसका भी मन चोदने को करता है। राजू ने कहा कि रात में वो अपनी माँ के साथ एक ही कमरे में सोता है । लेकिन पिछले एक साल से माँ की चुदाई देख कर उसका भी लन्ड टाईट हो जाता है।                                                                “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

“फिर तुम अपनी माँ को क्यों नहीं चोदते हो…” मैंने पूछा, लेकिन सुरेश के जबाब देने के पहले संध्या कमरे में आ गई और उसने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया। राजू उठकर जाने लगा तो मैंने उसे रोक लिया। सुरेश ने एक बार संध्या के तरफ देखा और फिर मेरा पैर दबाने लगा।

“क्या हुआ मां?”

“अरे बेटा, मेरा पैर भी बहुत दर्द कर रहा है, थोड़ा दबा दे !” संध्या बोलते बोलते मेरे बगल में लेट गई। मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा, डर से या माँ को चोदने के खयाल से , मालूम नहीं। मैं उठ कर बैठ गया और माँ को बिछौने के बीचोंबीच लेटने को कहा।

मैं एक पैर दबाने लगा । राजू चुपचाप खड़ा था।

“अरे राजू, तुम क्यों खड़े हो, दूसरा पांव तुम दबाओ !” मैंने राजू से कहा लेकिन वो खड़ा ही रहा।
मेरे दो-तीन बार कहने के बाद सुरेश दूसरे पांव को दबाने लगा। मैंने माँ को आंख मारी और वो मुस्कुरा दी।
“मां, कहां दर्द कर रहा है?”

“अरे पूछ मत बेटा, पूरा पाव और छाती दर्द कर रहा है, खूब जोर से पैर और छाती को दबाओ।”

मां ने खुल कर बुर और चूची दबाने का निमंत्रण दे दिया था। मैं पावं से लेकर कमर तक एक पर को मसल मसल कर मजा ले रहा था जब कि सुरेश सिर्फ घुटनों तक ही दबा रहा था। मैंने सुरेश का एक हाथ पकड़ा और माँ की जांघों के ऊपर सहलाया और कहा कि तुम भी नीचे से ऊपर तक दबाओ। वो हिचका लेकिन मुझे देख देख कर वो भी संध्या लम्बी लम्बी टांगों को नीचे से ऊपर तक मसलने लगा।         “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

2-3 मिनट तक इस तरह से मजा लेने के बाद मैंने कहा,”मां साड़ी उतार दो…तो और अच्छा लगेगा…”
“हां, बेटा, उतार दो…”

“सुरेश, साड़ी खोल दो।” मैंने सुरेश से कहा।

उसने हमारी ओर देखा लेकिन साड़ी खोलने के लिये हाथ आगे नहीं बढ़ाया।

“सुरेश, शरमाते क्यों हो, तुमने तो कई बार अपनी माँ को नंगी चुदवाते देखा है…यहां तो सिर्फ साड़ी उतारनी है, चल खोल दे।” और मैंने सुरेश का हाथ पकड़ कर साड़ी की गांठ पर रखा। उसने शरमाते हुये गांठ खोली और मैंने साड़ी माँ के बदन से अलग कर दी। काले रंग के ब्लाऊज़ और साया में गजब की माल लग रही थी।

“मालकिन, आप बहुत सुन्दर हैं…” अचानक सुरेश ने कहा और प्यार से जांघों को सहलाया।
“तू भी बहुत प्यारा है..” संध्या ने जबाब दिया और हौले से साया को अपनी घुटनों से ऊपर खींच लिया। माँ के सुडौल पैर और पिंडली किसी भी मर्द को गर्म करने के लिये खाफी थे। हम दोनों पैर दबा रहे थे लेकिन हमारी नजर संध्या की मस्त, गोल-गोल, मांसल चूचियों पर थी। लग रहा था जैसे कि चूचियां ब्लाऊज़ को फाड़ कर बाहर निकल जायेंगी। मेरा मन कर रहा था कि फटाफट माँ को नंगा कर बूर मे लन्ड पेल दूं। मेरा लंड भी चोदने के लिये तैयार हो चुका था। और इस बार घुटनों के ऊपर हाथ बढा कर मैंने हाथ साया के अन्दर घुसेड़ दिया और अन्दरुनी जांघों को सहलाते हुये जिन्दगी में पहली बार बुर को मसला। एक नहीं, दो नहीं, कई बार बुर मसला लेकिन माँ ने एक बार भी मना नहीं किया। माँ साया पहने थी और बुर दिखाई नहीं पर रही थी। साया ऊपर नाभि तक बंधा हुआ था। मैं बुर को देखना चाहता था। एक दो बार बुर को फिर से मसला और हाथ बाहर निकाल लिया।                                    “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

“मां, साया बहुत कसा बंधा हुआ है, थोड़ा ढीला कर लो.. ”

मैंने देखा कि सुरेश अब आराम से संध्या की जांघों को मसल रहा था। मैंने गोपल से कहा कि वो साया का नाड़ा खोल दे। तीन चार बार बोलने के बाद भी उसने नाड़ा नहीं खोला तो मैंने ही नाड़ा खींच दिया और साया ऊपर से ढीला हो गया। मैं पांव दबाना छोड़कर माँ की कमर के पास आकर बैठ गया और साया को नीचे की तरफ ठेला। पहले तो उसका चिकना पेट दिखाई दिया और फिर नाभि। कुछ पल तो मैंने नाभि को सहलाया और साया को और नीचे की ओर ठेला।

अब उसकी कमर और बुर के ऊपर का चिकना चिकना भाग दिखाई पड़ने लगा। अगर एक इंच और नीचे करता तो बुर दिखने लगती।

“आह बेटा, छाती बहुत दर्द कर रहा है..” संध्या ने धीरे से कहा । साया को वैसा ही छोड़कर मैंने अपने दोनों हाथ माँ की मस्त और गुदाज चूचियों पर रखे और दबाया। सुरेश के दोनों हाथ अब सिर्फ जांघो के ऊपरी हिस्से पर चल रहा था और वो आंखे फाड़ कर देख रहा था कि एक बेटा कैसे माँ की चूचियां मसल रहा है।                                                 “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

लन्ड चूत के लिये तरसता ही रह गया। लेकिन कहते हैं कि ‘देर है लेकिन अन्धेर नहीं है’

उस दिन भी ऐसा ही हुआ। उस समय दिन के 11 बजे थे। औरतें घर के काम में व्यस्त थीं, कम उम्र के बच्चे इधर-उधर दौड़ रहे थे और आंगन में कुछ नौकर सफाई कर रहे थे। मेरे बाबूजी अपने भाईयों के साथ खेत पर गये थे। मैं चौकी पर बैठ कर आराम कर रहा था। तभी माँ मेरे पास आई और बगल में बैठ गई। मेरी माँ संध्या ने मेरा हाथ पकड़ कर एक लड़के की तरफ इशारा करके पूछा,”वो कौन है?” वो लड़का आंखें नीची करके अनाज को बोरे में डाल रहा था। उसने सिर्फ हाफ-पैंट पहन रखा था।

“हां, मैं जानता हूँ, वो सुरेश है.. सुरेश का भाई !” मैंने माँ को जवाब दिया।

सुरेश हमारा पुराना नौकर था और हमारे यहा पिछले 8-9 सालों से काम कर रहा था। माँ उसको जानती थी।
मैंने पूछा,”क्यों, क्या काम है उस लड़के से?”

मां ने इधर उधर देखा और बगल के कमरे में चली गई। एक दो मिनट के बाद उसने मुझे इशारे से अन्दर बुलाया। मैं अन्दर गया और संध्या ने झट से मेरा हाथ पकड़ कर कहा,”बेटा, मेरा एक काम कर दे…”                                         “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”
“कौन सा काम माँ !”

फिर उसने जो कहा वो सुनकर मैं हक्का बक्का रह गया।

“बेटा, मुझे सुरेश से चुदवाना है, उसे बोल कि मुझे चोदे…!”

मैं संध्या को देखता रह गया। उसने कितनी आसानी से बेटे के उम्र के लड़के से चुदवाने की बात कह दी…..
“क्या कह रही हो…..ऐसा कैसे हो सकता है….” मैंने कहा।

“मैं कुछ नहीं जानती, मैं तीन दिन से अपने को रोक रही हूँ, उसको देखते ही मेरी बुर गरम हो जाती है, मेरा मन करता है की नंगी होकर सबके सामने उसे अपने अन्दर ले लूँ !” माँ ने मेरे सामने अपनी चूची को मसलते हुए कहा,”कुछ भी करो, बेटा सुरेश का लन्ड मुझे अभी चूत के अन्दर चाहिए !”

संध्या की बातें सुनकर मेरा माथा चकराने लगा था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मां, बेटे के सामने इतनी आसानी से लण्ड और बुर की बात करेगी। मुझे यह जानकर अचम्भा हुआ कि मैं 18 साल का होकर भी किसी को अब तक चोद नहीं पाया हूँ तो वो सुरेश अपने से 20-22 साल बडी, तीन बच्चे की माँ को कैसे चोदेगा। मुझे लगा कि सुरेश का लन्ड अब तक चुदाई के लिये तैयार नहीं हुआ होगा।

“मां, वो सुरेश तो अभी छोटा है.. वो तुम्हें नहीं चोद पायेगा….” मैंने माँ की चूची पर हाथ फेरते हुए कहा,”चल तुझे बहुत मन कर रहा है तो मैं तुम्हें चोद दूंगा ..!”                                                                     “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

मैं चूची मसल रहा था, माँ ने मेरा हाथ अलग नहीं किया। यह पहला मौका था कि मेरे हाथ किसी चूची को दबा रहा था और वो भी एक मस्त गुदाज़ औरत की, जो लोगों की नजर में बहुत सुन्दर और मालदार थी।
“बेटा, तू भी चोद लेना, लेकिन पहले सुरेश से मुझे चुदवा दे…अब देर मत कर ….बदले में तू जो बोलेगा वो सब करुंगी… तू किसी और लड़की या औरत को चोदना चाहता है तो मैं उसका भी इंतज़ाम कर दूंगी, लेकिन तू अभी अपनी माँ को सुरेश से चुदवा दे.. मेरी बुर एकदम गीली हो गई है।”

संध्या ने सामने से चुदाई की पेशकश की है तो कुछ ना कुछ तो करना ही पड़ेगा। मैंने जोर जोर से 3-4 बार दोनों मस्त मांसल चूचियों को दबाया और कहा,” तू थोड़ा इन्तज़ार कर….मैं कुछ करता हूँ !” यह कहकर मैंने माँ को अपनी बांहों में लेकर उसके गालों को चूसा और बाहर निकल कर आ गया। दिन का समय था, सब लोग जाग रहे थे, किसी सुनसान जगह का मिलना आसान नहीं था। मैं वहाँ से निकल कर ‘कैटल-फार्म’ में आ गया जो आंगन से थोड़ी ही दूर पर सड़क के उस पार था। वहाँ उस समय जानवरों के अलावा और कोई नहीं था। वहाँ एक कमरा भी था नौकरों के रहने के लिये। उस कमरे में भी कोई नहीं था। मैंने सोचा क्यों ना आज माँ की चुदाई इसी कमरे में की जाये।        “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

“मां, ब्लाउज खोल दो तो और अच्छा लगेगा।” मैंने दबाते हुए कहा।

“खोल दे ” उसने जबाब दिया और मैंने झटपट ब्लाउज के सारे बटन खोल डाले और ब्लाउज को चूची से अलग कर दिया।

मां की गोल-गोल, उठी हुई और मांसल चूची देख कर माथा झनझना गया। मुझे याद नहीं था कि मैंने आखरी बार कब माँ की नंगी चूची देखी थी। मैं जम कर चूची दबाने लगा।

“कितना टाईट है, लगता है जैसे किसी ने फ़ुटबाल में कस कर हवा भर दी है।” मैंने घुन्डी को कस कर मसला और राजू से कहा,” क्यों सुरेश कैसा लग रहा है?” मैं जोर जोर से चूची को दबाता रहा।

अचानक मैंने देखा कि सुरेश का एक हाथ माँ की दोनों जांघों के बीच साया के ऊपर घूम रहा है। एक हाथ से चूची दबाते हुए मैंने सुरेश का वो हाथ पकड़ा और उसे माँ की नाभि के ऊपर रख कर दबाया।

“देख, चिकना है कि नहीं?” मैं उसके हाथ को दोनों जांघों के बीच बुर की तरफ धकेलने लगा। दूसरे हाथ से मैं लगातार चूचियों का मजा ले रहा था। मुझे याद आया कि बचपन में इन चूचियों से ही दूध पीता था। मैं माँ के ऊपर झुका और घुन्डी को चूसने लगा।            “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

तभी माँ ने फुसफुसाकर कान में कहा,”बेटा, तू थोड़ी देर के लिये बाहर जा और देख कोई इधर ना आये..”
मैं दूध पीते पीते सुरेश के हाथ के ऊपर अपना हाथ रख कर साया के अन्दर ठेला और सुरेश का हाथ माँ के बुर पर आ गया। मैंने सुरेश के हाथों को दबाया और सुरेश बुर को मसलने लगा । कुछ देर तक हम दोनों ने एक साथ बुर को मसला और फिर मैं खड़ा हो गया। राजू का हाथ अभी भी माँ की बुर पर था लेकिन साया के नीचे। बुर दिख नहीं रही थी।

यह कहानी आप autofichi.ru में पढ़ रहें हैं।

मैंने अपना पजामा पहना और सुरेश से कहा,”जब तक मैं वापस नहीं आता, तू इसी तरह मालकिन को दबाते रहना। दोनों चूचियों को भी खूब दबाना।”

मैं दरवाजा खोल कर बाहर आ गया और पल्ला खींच दिया। आस पास कोई भी नहीं था। मैं इधर उधर देखने लगा और अन्दर का नजारा देखने का जगह ढूंढने लगा। जैसा हर घर में होता है, दरवाजे के बगल में एक खिड़की थी। उसके दोनों पल्ले बन्द थे। मैंने हलके से धक्का दिया और पल्ला खुल गया। बिस्तर साफ साफ दिख रहा था।

संध्या ने सुरेश से कुछ कहा तो वो शरमा कर गर्दन हिलाने लगा।संध्या ने फिर कुछ कहा और सुरेश सीधा बगल में खड़ा हो गया। संध्या ने उसके लन्ड पर पैंट के ऊपर से सहलाया और राजू झुक कर साया के ऊपर से बुर को मसलने लगा। एक दो मिनट तक लंड के ऊपर हाथ फेरने के बाद संध्या ने पैंट के बटन खोल डाले और सुरेश नंगा हो गया। संध्या ने झट से उसका टनटनाया हुआ लंड पकड लिया और उसे दबाने लगी।

मां को मालूम था कि मैं जरुर देख रहा हूँ, उसने खिड़की के तरफ देखा। मुझसे नजर मिलते ही वो मुस्कुरा दी और लंड को दोनों हाथों से हिलाने लगी। सुरेश का लंड देख कर वो खुश थी। उधर सुरेश ने भी बुर के ऊपर से साया को हटा दिया था और मैंने भी पहली बार एक बुर देखी वो भी अपनी माँ की, जिसे मेरी आंखों के सामने एक लड़का मसल रहा था।                                       “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

संध्या ने कुछ कहा तो सुरेश ने साया को बाहर निकाल दिया। वो पूरी नंगी थी। उसकी गठी हुई और लम्बी टांगें और जांघ बहुत मस्त लग रही थी। बुर पर बहुत छोटे छोटे बाल थे, शायद 6-7 दिन पहले झांट साफ किया था। संध्या लंड की टोपी खोलने की कोशिश कर रही थी। उसने सुरेश से फिर कुछ पूछा और सुरेश ने ना में गर्दन हिलाई। शायद पूछा हो कि पहले किसी को चोदा है या नहीं। संध्या ने सुरेश को अपनी ओर खींचा और खूब जोर जोर से चूमने लगी और चूमते-चूमते उसे अपने ऊपर ले लिया।

अब मुझे संध्या की बुर नहीं दिख रहा था। संध्या ने हाथ नीचे की ओर बढ़ाया और अपने हाथ से लंड को बुर के छेद पर रखा। संध्या ने सुरेश से कुछ कहा और वो दोनों चूची पकड़ कर धीरे धीरे धक्का लगा कर चुदाई करने लगा।

सुरेश अपने से 20 साल बड़ी गांव की सबसे मस्त और सुन्दर माल की चुदाई कर रहा था। मैं अपने लंड की हालत को भूल गया और उन दोनों की चुदाई देखने लगा। सुरेश जोर जोर से धक्का मार रहा था और संध्या भी चूतड़ उछाल उछाल अपने बेटे की उम्र के लड़के से चुदाई का मजा ले रही थी। यूँ तो सुरेश के लिये चुदाई का पहला मौका था लेकिन वो पिछले साल से हर रात अपनी माँ को नंगी देखता था, बाप से चुदवाते।
मैं देखता रहा और सुरेश जम कर मेरी माँ को चोदता रहा और करीब 15 मिनट के बाद वो माँ के ऊपर ढीला हो गया। मैं 2-3 मिनट तक बाहर खड़ा रहा और फिर दरवाजा खोल कर अन्दर आ गया। मुझे देखते ही सुरेश हड़बड़ा कर नीचे उतरा और अपने हाथ से लंड को ढक लिया। लेकिन संध्या ने उसका हाथ अलग किया और मेरे सामने सुरेश के लंड को सहलाने लगी।                “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

मां बिल्कुल नंगी थी। उसने दोनों टांगों को फैला रख्खा था और मुझे बुर का फांक साफ साफ दिख रहा था। लंड को सहलाते हुये संध्या बोली,”बेटा, सुरेश में बहुत दम है…मेरा सारा दर्द खत्म हो गया।” फिर उसने सुरेश से पूछा,”क्यों, कैसा लगा..?”

मैं उसकी कमर के पास बैठ कर बुर को सहलाने लगा। बुर सुरेश के रस से पूरी तरह से गीली हो गई थी।

“बेटा, साया से साफ कर दे।”

मैं साया लेकर बुर के अन्दर बाहर साफ करने लगा और उसने सुरेश से कहा कि वो सुरेश को बहुत पसन्द करती है और उसने चुदाई भी बहुत अच्छी की। उसने सुरेश को धमकाया कि अगर वो किसी से भी इसके बारे में बात करेगा तो वो बड़े मालिक (मेरे बड़े काका) से बोल देगी और अगर चुप रहेगा तो हमेशा सुरेश का लंड बुर में लेती रहेगी। सुरेश ने कसम खाई कि वो किसी से कभी संध्या मालकिन के बारे में कुछ नहीं कहेगा। संध्या ने उसे चूमा और कपड़े पहन कर बाहर जाने को कहा।

राजू बहुत खुश हुआ जब माँ ने उससे कहा कि वो जल्दी फिर उससे चुदवायेगी। मैंने सुरेश से कहा कि वो आंगन जाकर अपना काम करे। सुरेश के जाते ही मैंने दरवाजा अन्दर से बन्द किया और फटाफट नंगा हो गया। मेरा लन्ड चोदने के लिये बेकरार था। माँ ने मुझे नजदीक बुलाया और मेरा लन्ड पकड़ कर सहलाने लगी।

“हाय बेटा, तेरा लौड़ा तो बाप से भी लम्बा और मोटा है…, लेकिन अपनी माँ को मत चोद। तू घर की जिस किसी भी लड़की को चोदना चहता है, मैं चुदवा दूंगी.. लेकिन मादरचोद मत बन।”
मैंने अपना लंड अलग किया और माँ के ऊपर लेट गया। लंड को बुर के छेद से सटाया और जम कर धक्का मारा…                 “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

“आह्ह्ह्ह्ह……”

मैं माँ के कन्धों को पकड़ कर चोदने लगा।

“साली, अगर मुझे मालूम होता कि तू इतनी चुदासी है तो मैं तुझे 4-5 साल पहले ही चोद डालता, बेकार का हत्तू मार कर लौड़े को तकलीफ नहीं देता।” कहते हुये मैंने जम कर धक्का मारा.. “आअह्ह्ह्ह्ह्ह….मजा आआआअ ग…याआअ..”

मां ने कमर उठा कर नीचे से धक्का मारा और मेरा माथा पकड़ कर बोली,”बेटा, वो तो सुरेश से चुदवाने के लालच में आज तेरे सामने नंगी हो गई, वरना कभी मुझे हाथ लगाता तो एक थप्पड़ लगा देती।

मैंने धक्का मारते मारते माँ को चूमा और चूची को मसला।

“साली, सच बोल, सुरेश के साथ चुदाई में मजा आया क्या?” मेरा लौड़ा अब आराम से अपनी जन्मभूमि में अन्दर-बाहर हो रहा था।

“सच बोलूं बेटा, पहले तो मैं भी घबरा रही थी कि मैं मुन्ना के उम्र के लड़के के सामने रन्डी जैसी नंगी हो गई हूँ लेकिन अगर वो नहीं चोद पाया तो !” माँ ने सुरेश को याद कर चूतड़ उछाले और कहा,” सुरेश ने खूब जम कर चोदा, लगा ही नहीं कि वो पहली बार चुदाई कर रहा है.. मैं तो खुश हो गई और अब फिर उससे चुदवाउंगी।”

“और मैं कैसा चोद रहा हूँ मेरी जान ?” मैंने उसके गालों को चूसते हुये पूछा।

“बेटा, तेरा लौड़ा भी मस्त है और तेरे में सुरेश से ज्यादा दम भी है….मजा आ रहा है….”
और उसके बाद हम जम कर चुदाई करते रहे और आखिर में मेरे लंड ने माँ के बुर में पानी छोड़ दिया। हम दोनों हांफ रहे थे। कुछ देर के बाद जब ठण्डे हो गये तो हमने अपने कपड़े पहने और बिस्तर ठीक किया।
“बाप रे, सब पूछेंगे कि मैं इतनी देर कहा थी, तो क्या बोलूंगी…” माँ अब दो दो लंड खाने के बाद डर रही थी।
मैंने उसे बांहों में जकड़ कर कहा, “रानी, तुम डरो मत। मैं साथ हूँ ना… किसी को कभी पता नहीं चलेगा तुमने बेटे और नौकर से चुदवाया है।” मैंने माँ के गालों को चूमा और उससे खुशामद किया कि वो दो-ढाई घंटे के बाद फिर इस कमरे में आ जाये जिसमें से कि मैं उसे दुबारा चोद सकूँ।                                                                           “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”

“एक बार में मन नहीं भरा क्या..?” उसने पूछा..

“नहीं साली, तुमको रात दिन चोदता रहूँगा फिर भी मन नहीं भरेगा… जरुर आना..”

“आउंगी..लेकिन एक शर्त पर…!” माँ ने मेरा हाथ अपनी चूची पर रखा।

“क्या शर्त?” मैंने चूची जोर से मसला…

“सुरेश भी रहेगा ….” माँ फिर सुरेश का लौड़ा चाहती थी।

“साली, तू सुरेश की कुतिया बन गई है… ठीक है, इस बार मैं अपनी गोदी में लिटा कर सुरेश से चुदवाउंगा।
“तो ठीक है, मैं आउंगी….”

आंगन के रास्ते में मैंने उससे पूछा कि वो पहले कितने लौड़े खा चुकी है.. तो उसने कहा कि बाद में बतायेगी।
आंगन में पहुंचते ही बड़ी काकी ने पूछा- माँ को लेकर कहां गया था। सब खाने के लिये इंतजार कर रहे हैं।
मैंने जबाब दिया कि मैं माँ को गाछी (फार्म हाउस) दिखाने ले गया था। फिर किसी ने कुछ नहीं पूछा।                 “Maa Ki Bur Garam Ho Gai”



"hinde sexy storey""devar bhabhi ki sexy story""xxx hindi history""hindhi sex"mastkahaniya"hot sex story com""hindi sexy story new""sexi hindi story""tai ki chudai""kamukta stories""indian sex storoes""devar bhabhi hindi sex story"indiansexkahani"hot desi kahani""indian sex stries""hindi sexi istori""hindi hot sex""sec stories""erotic stories hindi""khet me chudai""sex story mom""balatkar sexy story""hindi chudai ki kahani with photo""hindi sexi storied""hindi sexy khanya""www hindi chudai story""hindi sexy storiea""deepika padukone sex stories""hundi sexy story""hot sex story in hindi""mastram ki sexy story"hotsexstory"hot sex bhabhi""gaand chudai ki kahani""hindi sexy story in hindi language""mother and son sex stories""mother son hindi sex story""hot hindi sex story""xxx hindi sex stories""bahu ki chudai""boobs sucking stories""desi chudai ki kahani""mosi ki chudai""hot bhabi sex story""hindi sax storis""sex story mom""sali sex""bhabhi ki jawani story""hot sex stories""new real sex story in hindi""sexy stories""sexy hindi kahaniya""www com kamukta""sex kahani photo ke sath""hot saxy story""hindi sexy kahaniya""chudai sex""hot sex stories in hindi"kumkta"hindi gay sex stories""gaand chudai ki kahani""sex stories.com""hindhi sax story""sex ki gandi kahani""xossip story""hot hindi sex""hot sexy stories""kamuta story""hindi new sex story""new sex stories in hindi""maa beta sex story com""bhai bahan ki sexy story""office sex story""hindi secy story""hot hindi sexy stores""sex story wife"www.kamukta.comhotsexstory"hotest sex story""hot maal""randi chudai""hindi sexstory""sexy stoties""hindi sex story new""सेक्स कहानी""chudai stori""इन्सेस्ट स्टोरीज"