लंड की करतूत-3

(Lund Ki Kartoot-3)

मेरी पिछली कहानियाँ
लण्ड की करतूत-1
और
लंड की करतूत-2
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दूसरे दिन सुबह सात बजे रेखा मेरे साथ सैर को जाने के लिए तैयार हो कर आई, आते ही वह बोली- जाने से पहले मुझे नहाना है।

मैं बहुत खुश हुआ, मैंने कहा- मुझे भी नहाना है, चलो दोनों एक साथ ही नहायेंगे !

हम दोनों बाथरूम में गए और एक दूसरे के कपड़े उतारने के बाद शावर के नीचे खड़े हो गए और एक दूसरे को चूमने लगे। उसके बाद मैंने रेखा को और उसने मुझे साबुन लगाया, हम दोनों के हाथ एक दूसरे के शरीर पर फिसलते गए।

मैंने रेखा को लिटाकर उसकी चूत को साबुन लगाकर साफ किया और रेखा ने मेरे लंड की सफाई की। फिर मैं पागलों की तरह रेखा की चूत चाटता और चूमता रहा।
मेरा लंड खड़ा होकर उछलने लगा, रेखा ने लंड को पकड़ कर चूसना चालू किया। हमारे ऊपर शावर का पानी लगातार पड़ रहा था। हम दोनों स्वर्ग का आनन्द महसूस कर रहे थे।
रेखा ने कहा- अब नहीं रहा जाता, लंड को जल्दी अन्दर डालो।

चूँकि हमें समंदर के किनारे जाना था, मैंने अधिक समय न गंवाते हुए लंड को एक झटके में चूत के अन्दर धकेल दिया। रेखा के मुँह से आहें निकलने लगी, उसने भी चूतड़ हिला कर साथ देना चालू किया। थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ झर गए।

नहाना समाप्त कर हम दोनों तैयार होने लगे. दोनों ने अपने नहाने के कपड़े, तौलिया वगैरा बैग में रख लिए। मैंने अपना स्विमिंग कॉस्ट्यूम लिया और रेखा से कहा- तेरे लिए मैं टू-पीस स्विमिंग सूट रख लेता हूँ। वह बोली- मुझे स्विमिंग सूट पहनने में शर्म आयेगी, मैंने पहले ऐसे कपड़े नहीं पहने।

मैंने कहा- शर्म की कोई बात नहीं, समंदर में साड़ी या सलवार पहन कर जाने से तुझे बहुत दिक्कत होगी, दूसरी बात जहाँ हम जा रहे हैं वहाँ कोई और नहीं होगा।

मैंने उसके लिए टू-पीस रख लिया। इसके अलावा हमने अपने साथ दरी, पानी, चाय और खाने पीने की चीजें रख ली।

सब सामान कार में रखने के बाद हम दोनों बीच की ओर चल दिए। करीब एक घंटे की ड्राइव के दौरान मैं रेखा से उसके चुदाई के अनुभवों के बारे में पूछता रहा।उसने बताया कि उसकी पहली चुदाई गाँव में खेत पर एक लड़के ने की तब वह भी 18 साल की थी।

उसने बताया 19 साल की उम्र में उसकी पहली शादी हुई और 21 साल की उम्र में दूसरी। इसके अलावा फिलहाल उसके एक और आदमी से सम्बन्ध हैं। ये सब अपने आप में कहानियाँ हैं जोकि मैं बाद में लिखूँगा। उसने बताया कि उसे बचपन से लंड देखने में बहुत मजा आता है। गाँव में वह घोड़ों, गधों और दूसरे जानवरों के देखा करती थी और सोचती थी ये लम्बे गुब्बारे जैसे बाहर कैसे निकल जाते हैं और किस लिए होते हैं?

इस तरह बातें करते करते हम बीच पर पहुँच गए। मैंने कार काजू के पेड़ों की छाया में पार्क की और थोड़ी दूर पर केसुरिना के झुरमुट में हमने दरी बिछा दी। चूँकि वह एक वर्किंग डे था इसलिए हमारे आस-पास कोई नहीं था, दूर झुरमुट में सिर्फ वहाँ एक और युगल था।

मैंने अपने सब कपड़े उतार दिए और रेखा से कहा- तुम भी सब कपड़े उतार दो।

वह शर्माने लगी तब मैंने उसकी सलवार कुर्ती उतार दी, फिर उसकी ब्रा और पेंटी भी उतार दी।

रेखा के बोबे और चूत धूप में बहुत सुन्दर लग रहे थे।

मैंने रेखा को सिर से पैर तक चूमना चालू किया, उसके दोनों बोबों की हल्के-हल्के मालिश शुरू की। धीरे धीरे उसकी सुन्दर चूत को सहलाने लगा।
इतने में वह बोली- भूख लगी है, नाश्ता कर लेते हैं !
मैंने कहा- ठीक है !

रेखा ने नाश्ते के लिए ब्रेड पर जैम और मक्खन लगाया और चाय के कप भर दिए।
हम ब्रेड स्लाइस और चाय के कप अदल बदल कर खाते पीते रहे।

मैंने रेखा से कहा- तुम अब लेट जाओ !

फिर मैंने उसकी की चूत पर मक्खन और जैम मिला कर चुपड़ दिया, वह बोली- ये क्या कर रहे हैं?
मैंने कहा- देखती जाओ।

फिर मैंने बटर और जाम अपने लौड़े पर चुपड़ा जो अब तक फुदकने लगा था, रेखा की चूत पर लगे हुए जैम को मैंने चाटना शुरू किया, रेखा की चूत के रस के साथ मक्खन और जैम का स्वाद दुगुना हो गया।

मैं मदहोश होकर उसकी चूत चाटता रहा, रेखा आनंद के मारे किलकारियाँ मार रही थी, उसने उठ कर मेरे लंड के ऊपर लगा माल चाटना शुरू किया। फिर हम दोनों 69 की दशा में एक दूसरे को चाटने लगे, मैंने अपने लंड पर और जैम लगा कर रेखा की चूत में डाल दिया।

रेखा चीखने लगी- हाय राम ! ऐसा मजा तो पहले कभी नहीं आया, चोदो ! चोदो ! यह कहानी आप autofichi.ru पर पढ़ रहे हैं।

मैंने अपना लंड बाहर निकाल कर रेखा की चूत के दाने को फिर चूसना चालू किया तो वह एकदम से झर गई। अब रेखा ने मुझे लेटने को कहा, उसने फिर लंड पर जैम लगाकर चाटना शुरू किया, दूसरी तरफ से मैं उसकी चूत चाट रहा था। अब रेखा ने चुदवाने के लिए मेरे ऊपर बैठ कर मेरे लंड को अपनी चूत में डाल लिया, फिर वह मेरे ऊपर झुक गई और मुझे चूमने लगी। अब हम एक दूसरे को चूम रहे थे और रेखा मेरे लंड पर कूदें लगा कर चुदाई कर रही थी। थोड़ी देर में हम दोनों फिर झर गए। इस तरह हमारा डेढ़ घंटा कैसे बीता, पता नहीं चला।

थोड़ी देर आराम करने के बाद मैंने रेखा से कहा- चलो अब समंदर में नहाते हैं !

स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहनकर हम दोनों समंदर में गए। लहरों के थपेड़ों में हम दोनों एक दूसरे को आलिंगन करते चूमते-नहाते रहे। एक जगह पत्थरों की ओट में हम दोनों स्विमिंग कॉस्ट्यूम उतार कर लेट गए हमारे ऊपर लहरें आती तो हम एक दूसरे से लिपट जाते।

मैंने रेखा से कहा- चलो। हम अब यहाँ पर लहरों में चुदाई करते हैं।

थोड़ी देर चूत और लंड से खेलते-खेलते रेखा फिर मेरे लंड के ऊपर बैठ कर चुदाई करने लगी। बीच-बीच में लहरे आकार हमें धक्का दे जाती थीं। पानी में हमने आधा घंटे चुदाई की और फिर झर गए।

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बाहर आकर हम दोनों ने एक दूसरे को तौलिए से पोंछा और फिर खाना खाने नंगे ही बैठ गए। खाने के बाद हम आराम करने लेट गए। करीब एक घंटे बाद हम एक दूसरे को चूमते हुए उठे।

रेखा आज जो हुआ उस को सोच कर बहुत अचंभित और खुश थी, उसने कहा- जीवन का यह सबसे सुखद दिन है।

जैम लगाकर चटाने की बात पर उसे बहुत हंसी आ रही थी, उसने कहा- मैंने पहले कभी ऐसा न तो सोचा, न किया।

मैंने कहा- मेरे लिए भी इतने लम्बे जीवन का सबसे सुखद अनुभव है।

मैंने उससे कहा- लौटने के पूर्व मैं एक और नई चीज करना चाहता हूँ जो तुमने पहले नहीं की होगी।

उसने पूछा- वह क्या है?

मैंने कहा- तुम्हारी चूत समंदर के पानी से खारी हो गई है, पहले मैं इसे साफ पानी से धो देता हूँ, फिर देखना।

मैंने चूत धोकर रुमाल से पोंछ दी. फिर बैग से एक केला निकला उसे छील कर रेखा से कहा- अब तुम अपने दोनों पैर फैलाओ मैं केला तुम्हारी चूत में डालूँगा।

वह बोली- किसलिए?
मैंने कहा- देखो !

और केला उसकी चूत में डाल कर लंड जैसे आगे पीछे करने लगा।

रेखा बोली- यह तो लंड जैसा ही लग रहा है।

फिर मैंने केला बाहर निकाल कर रेखा को दिखाकर एक टुकड़ा खाया।
रेखा आश्चर्य से चीख उठी- ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- मैं इसे चूत के रस के साथ खा रहा हूँ, तुम भी खाकर देखो, कोई नुकसान नहीं होगा।

पहले तो उसने मना किया पर समझाने पर मान गई, उसने भी एक टुकड़ा खाया और बोली- ऊपर से थोड़ा नमकीन है, शायद समंदर का पानी होगा।

मैंने कहा- नहीं पगली ! यह नमकीन स्वाद चूत से निकलने वाली चिकनाई का है। जब दिमाग में सेक्स के विचार आते हैं तब यह पानी निकलता है। देख, मेरे लंड से भी पानी के रंग का चिकना रस निकल रहा है, इसे चख कर देख यह भी नमकीन लगेगा।
उसने मेरे लंड से निकलता हुआ चिकना रस चाट कर देखा और कहा- सच, यह पानी चिकना और थोड़ा नमकीन है।

मैंने बाकी केला फिर चूत में डाला और कुछ धक्के लगाये फिर उसे निकाल कर हम दोनों ने केला खा लिया।
अब तक चार बज चुके थे हम दोनों ने आखिरी बार लंड और चूत का खेल खेला और अपने घर लौट आए।

दोस्तो, यह मेरी इस कड़ी की आखिरी कहानी है। अपनी पसंद-नापसंद जरूर लिखें।



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