लोहड़ी की रात मेरी पहली सुहागरात

(Lohdi ki raat mere pehli suhagrat)

नमस्कार दोस्तो, मैं अनूप ठाकुर autofichi.ru.xzy का नियमित पाठक हूँ। ऐसा शायद ही कोई दिन बीतता होगा जिस दिन मैं autofichi.ru.xzy पर दो चार कहानियां नहीं पढ़ता।
2009 से लेकर आजतक मैंने कभी भी autofichi.ru की कोई रचना नहीं छोड़ी होगी। कुछ कहानियां काल्पनिक लगती हैं और कुछ सच्ची भी लगती हैं। लेकिन पूरा सार यह निकलता है कि हर एक कहानी ऐसी होती है कि सेक्स की आग भड़का ही देती है।

मैं भी आज आप सबके सामने अपनी ऐसी ही कई आपबीती में से एक लेकर आया हूँ। उम्मीद है आपको मेरी ये सच्ची कहानी अच्छी लगेगी। इस कहानी के सभी पात्र एवं घटनाएं सच्ची हैं। बस गोपनीयता बनाए रखने के लिए लड़की का नाम और सटीक पता बदल दिया गया है।
और हाँ इस कहानी में कोई अतिरिक्त मसाला इस्तेमाल नहीं किया गया है, जो सच है बस वो ही लिखा है और आप लोगों के सामने पेश किया है।

तो अब मैं सीधे अपनी कहानी पे आता हूँ। मैं चंडीगढ़ में रहता हूँ और पढ़ाई मैंने सेक्टर 22 से की है.
बात आज से 10 साल पहले की है जब मैं 12वीं में पढ़ता था। मेरे घर के पास ही में 2 घर छोड़ के मेरे से एक साल छोटी मेरी जूनियर रहती थी जिसका नाम नैना था। पहले मेरी उसमें कोई रूचि नहीं थी, मेरा ध्यान सिर्फ फुटबॉल खेलने में रहता था. मैं अपने स्कूल के सबसे अच्छे खिलाड़ियों में आता था इसलिए मुझे सिर्फ अपने खेलने से और पढ़ाई से ही काम होता था।

लेकिन वो कहते हैं ना कि किस्मत के आगे किसी का बस नहीं चलता।

घर पर हम सब क्रिकेट या फिर पिट्ठू खेलते थे। नैना हमारे पड़ोस में काफी टाइम से रहती थी लेकिन आजतक कभी उसकी तरफ ऐसा ध्यान नहीं गया था। लेकिन 12वीं के बाद से ही मेरी उसकी तरफ रूचि बढ़ गयी।
हमारे पड़ोस में एक भाभी के लड़का हुआ, कुछ महीने बाद वो थोड़ा बड़ा हुआ तो मैं उसके साथ खेल रहा था। तभी नैना मेरे पास आई और उसने मुझसे उस बच्चे को माँगा। मैंने भी दे दिया.
उसने जैसे ही उसको गोद में उठाया, उसने उस पर चुम्बनों की झड़ी लगा दी।

और मेरे मुंह से एकदम से निकल गया कि काश मेरी भी ऐसी किस्मत होती और तुम मुझे भी ऐसे ही किस करती।
उसने कुछ नहीं कहा, बस हंस दी।
फिर मैं वहाँ से चला गया।

फिर बहुत दिनों तक बस मैं सोचता रहा कि क्या किया जाए।
और एक दिन मैंने मौका देखकर उसको प्रोपोज़ मार दिया कि वो मुझे पसंद है और मैं उससे प्यार करता हूँ।
उसने कुछ नहीं कहा.
फिर मैंने कहा- अगर तुमको ना करनी है तो कोई कारण भी बता देना ना करने का, अभी तुम एक दो दिन का समय ले लो।
उसने कहा- ठीक है, मैं तुमको सोच के दो दिन बाद जवाब दूंगी।

वो दो दिन किस तरह गुज़रे, मैं ही जानता हूँ।
फिर दूसरे दिन की शाम को उसने कहा- कल मैं ट्यूशन से बंक मारूंगी सुबह, तुम भी मार लेना।
मैंने कहा- ठीक है!
उसकी ट्यूशन सुबह 6 बजे होती थी और मेरी पांच बजे।

मैंने घर पे बोल दिया कि कल मेरी ट्यूशन का टाइम छह बजे का है।

फिर मैं और वो सुबह घर से दूर सड़क पर मिले और साथ में घूमें अभी कुछ दूर ही गए कि बारिश लग गई। फिर हम दोनों जल्दी से सेक्टर 17 बस स्टैंड पहुंचे और वहाँ हमने आराम से बैठकर कुछ देर तक बातें करी.

फिर मैं उसको लेकर थोड़ा साइड में आ गया और उससे पूछा- क्या सोचा तुमने?
तो उसने बिना कुछ कहे मेरे गाल पर एक किस दे दिया और कहा- आई लव यू टू।
यह सुनकर मेरी ख़ुशी का ठिकाना न रहा और मैंने वहीं उसके होंठों पे किस कर दिया। उसने भी मेरा भरपूर साथ दिया और हमने एक दूसरे को दो तीन मिनट तक स्मूच किया। फिर हम ऐसे ही घर से बोल कर निकल जाते कि ट्यूशन जा रहे हैं पर घूमते रहते, एक दूसरे को चूमते और यहाँ वहाँ हाथ लगाते।

फिर मुझे मेरे घर वालों ने मोबाइल ले दिया। कहने को तो वो पापा का मोबाइल था लेकिन उसको मैं ही चलाता था। फिर वो भी रात को अपने पापा का मोबाइल ले लेती और हम दोनों रात को दस से लेकर सुबह पांच छह बजे तक ढेर सारी बातें करते।

ऐसे ही किसी तरह बातें सेक्स की ओर चल पड़ी। मैं सच कहूँ तो मैंने आजतक कभी मुठ नहीं मारी थी लेकिन ब्लू फिल्म्स देख देख के ये ज़रूर सीख लिया था कि लड़की को कैसे गर्म करते हैं और कैसे चोदते हैं।
बस फिर हमारी सेक्सी बातें हमें पागल करने लगी और एक दिन हमने अकेले मिलने का प्लान करा।

वो लोहड़ी का दिन था 13 जनवरी… मैं अपने स्कूल के दोस्तों के साथ लोहड़ी मांगने गया हुआ था। आने में थोड़ी देर हो गई जिस वजह से नैना मुझसे नाराज़ हो गई। सब लोग घर के पास वाले पार्क में लोहड़ी मना रहे थे। पार्क के बाहर मैं नैना को मनाने की कोशिश कर रहा था पर वो मान ही नहीं रही थी।

मैंने कहा- सॉरी जानू, प्लीज माफ़ कर दो! देखो ना आज घर पर कोई नहीं है तो मजे करने का पूरा मौका है।
वो बोली- इसीलिए तो मैं नाराज़ हूँ कि तुम इतनी लेट आए।

मैं उसकी यह बात सुन कर खुश हो गया और उसको पार्क के बाहर खड़े एक टैम्पो ट्रैक्स के ट्राले में ले जाकर खूब स्मूच किया। फिर धीरे धीरे वो भी साथ देने लगी। मैंने उसके टॉप के ऊपर से ही उसके चूचे दबाने शुरू कर दिए, उसकी साँसें तेज़ होने लगी और जब मैंने उसकी गर्दन और चूचों पर किस करना शुरू किया तो वो आहें भरने लगी।

तभी हमें गाड़ी के बाहर कुछ खड़के की आवाज़ आई और हम डर गए। मैंने उसको अंदर ही रहने को कहा और खुद बाहर आकर देखा कि क्या हुआ.
लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
फिर उसने कहा कि यहां सेफ नहीं है, चलो मेरे घर चलते हैं।
मैंने भी हाँ कर दी क्यूंकि उसके हमारे सभी कॉलोनी वाले तो पार्क में लोहड़ी मना रहे थे। और फिर उसका घर मेरे घर से सिर्फ दो घर दूर था जिसका पिछले दरवाज़ा किसी के आने पे मुझे आसानी से मेरे घर तक जाने में मदद कर देता।

मैं और नैना उसके घर गए और उसने अंदर से कुण्डी लगा कर पर्दा बंद कर दिया। फिर मैं उस पर टूट पड़ा और उसके चूचे फिर से दबाने लगा उसकी आहें भी तेज़ हो गई। उसके मुंह से आह… आह… उह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह… यस… ओह… प्लीज जानू… जैसी आवाज़ें निकलने लगी।

फिर मैंने उसके टॉप को उतारा और जो मैंने देखा मुझे उस पर विश्वास नहीं हुआ।
उसने ब्रा पहन रखी थी और उसके अंदर उसके गोर चूचे बिल्कुल छोटे खरबूजे के साइज के थे।
मैंने कहा- वाह नैना, तुमने तो एक फुटबॉल प्लेयर के लिए फुटबॉल सज़ा रखें हैं, वो भी दो दो?
यह सुनकर वह हंस पड़ी और बोली- हाँ तो आओ और खेलो इनसे!

मैंने उसके चूचों को उसकी ब्रा के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया वो तड़पने लगी, उसके मुंह से आह… उह्ह… उफ़… कम ऑन… आह ममम… यस… प्लीज… ज़ोर से दबाओ… और दबाओ… चूस लो इन्हें… आह अनु उउउ… जैसी आवाज़ें आने लगी जो मुझे और पागल बना रही थी।

फिर मैंने उसकी ब्रा को हटा दिया और मेरे सामने उसके बड़े बड़े चूचे उछलने लगे। मैंने उसको बेड पर लिटा दिया और उसके चूचे देखने लगा। जैसे जैसे उसकी साँसें तेज़ हो रही थी, वैसे ही उसके चूचों के ऊपर नीचे होने की स्पीड भी बढ़ रही थी।

मैंने फिर से उसके चूचों को दबाना और चूसना शुरू कर दिया, वो तड़पने लगी।

मैंने एक हाथ उसकी जीन्स के अंदर डाल दिया और जैसे ही मैंने हाथ अंदर डाला मेरा हाथ पूरा का पूरा गीला हो गया।
मैं समझ गया कि नैना झड़ गई है।

मैंने उसको गांड ऊपर करने को कहा तो उसने अपनी गांड उठा ली और मैंने उसकी जीन्स के साथ ही उसकी पैंटी भी निकाल दी, अब वो मेरे सामने बिल्कुल नंगी थी।
उसने कहा- प्लीज मेरे से दूर मत जाओ, मेरे सीने से लगे रहो, मुझे मज़ा आ रहा है।
मैंने कहा- अभी देखो और कितना मज़ा आएगा।

फिर मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए और उसके सामने बिल्कुल नंगा हो गया। मुझे नंगा देख कर उसने अपनी आँखें बंद कर ली।
मैंने उसको कहा- यार आँखें खोलो!
तो उसने कहा- नहीं… मुझे शर्म आती है।
मैंने कहा- ऐसा कैसा शर्माना मुझसे?

फिर मैंने उसकी टाँगें खोली और उसकी चूत पर किस किया तो उसकी सिसकारी निकल गई ‘सीसीसी सीसीसीसी… आह… उफ्फ्फ… ओह येह… आह यस…’ ऐसी आवाज़ों से कमरा गूँज उठा। मैंने उसकी चूत के अंदर जीभ डाली और नैना कसमसाने लग गई, वो बोल उठी- आह… इतना मज़ा तो सेक्स चैट में भी कभी नहीं आया।
मैंने उससे कहा- अभी तो तुम देखती जाओ कि कितना मज़ा आता है।

फिर मैंने जीभ को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया और वो तड़पने लगी, कहने लगी- मुझे कुछ हो रहा है अनु, प्लीज कुछ करो… नहीं तो मैं मर जाऊँगी प्लीज।
मैंने उसे कहा- पहले आँखें खोलो!
और उतनी देर में उसकी चूत से पानी का फव्वारा छूट पड़ा और उसने कस के मेरे सर को अपनी चूत पे दबा लिया और आँखें भी खोल दी।

वो बड़ी खुश लग रही थी, उसने कहा- मैंने तो सुना था कि शुरू में बहुत दर्द होता है फिर मज़ा आता है लेकिन मुझे तो बस मज़ा ही मज़ा आया।
तब मैंने उसको समझाया कि अभी तो बस शुरुआत है, अभी असली मज़ा तो आना बाकी है।
उसने कहा- अच्छा? तो दो न मुझे असली मज़ा!
मैंने उससे कहा- वो तो मैं दूंगा… पर तभी जब तुम ये शर्म छोड़ दोगी।
उसने कहा- ठीक है.

और फिर मैंने उसको अपना लौड़ा पकड़ा दिया जिसको देख के उसने कहा- क्या करूं इसका?
मैंने उसको कहा- इसको मुंह में लो!
उसने मना कर दिया।
मैंने उसको कहा- अगर नहीं लोगी मुंह में तो मज़ा कैसे आएगा?

यह कहानी आप autofichi.ru में पढ़ रहें हैं।

यह सुनकर उसने मेरा लौड़ा मुंह में ले लिया और अपने होंठों से उसे चूसने लगी। मैं तो जैसे जन्नत की सैर कर रहा था. थोड़ी देर की चुसाई के बाद ही मेरा माल निकल गया जो मैंने उसके मुंह में छोड़ दिया और लौड़ा तब तक बाहर नहीं निकालने दिया जब तक वो उसको पी न गई।

फिर उसने कहा- ये क्या था?
मैंने कहा- ये मेरा माल था, इसको पीने से लड़कियां गोरी होने लगती हैं।
वो कहने लगी- अच्छा, फिर तो मैं और ज्यादा गोरी हो जाऊँगी।

फिर मैंने उसको अपने लौड़े की मुठ मारने को कहा और उसने वैसे ही किया। मेरा लौड़ा जब खड़ा हो गया तब मैंने उसको लिटा दिया और उसकी गांड के नीचे एक तकिया रखा, फिर मैंने उसकी चूत के छेद पे अपना लौड़ा रखा और वहाँ छेद पर अपना लौड़ा रगड़ने लगा।
नैना सेक्स के मजे की उम्मीद में अंधी हो गई थी और ‘आह… उफ़… यस… कम ऑन… कुछ करो ना जानू… उफ्फ्फ… मर गई… करो कुछ नहीं तो मैं पागल हो जाऊँगी’ जैसी बातें करने लगी।

मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रखे, उसको स्मूच किया और अपना लौड़ा एक बार में ही उसकी चूत की गहराई में डाल दिया। मेरे अचानक किए इस वार से वो तड़प उठी और उसकी चीख उसके मुंह में ही दबी रह गई। उसकी आँखें उसका दर्द ब्यान कर रही थी जो आंसुओं से भरी हुई थी।

मैं धीरे धीरे धक्के देता रहा और कुछ ही मिनट में नैना का दर्द भी गायब हो गया और वो नीचे से अपनी गांड उठाने लगी। मैंने भी सिग्नल मिलते ही धक्कों की रफ़्तार तेज़ कर दी और उसकी चूत चोदने लगा।
उसके मुंह से आह… आह… यस… फ़क मी… यस… और… और… जानू… और… और करो… रुको मत… बस … आअज अंदर ही रखो अपने इसको… ओह्ह… आह्हः… ईश… अहह… हाँ… और करो… और… और… और… और… जैसी आवाज़ें आने लगी।

मैंने उसकी चूत से लंड बाहर निकाल दिया क्यूंकि मैं उसको तड़पाना चाहता था।
वो कहने लगी- क्या हुआ?
मैंने कहा- कुछ नहीं, तुमको दर्द हो रहा है तो मैंने निकाल दिया बाहर।

उसने मेरे लौड़ा पकड़ा और अपनी चूत में डालने लगी लेकिन मैंने नहीं डालने दिया।
वो कहने लगी- प्लीज डालो ना… मज़ा आ रहा है प्लीज!
मैंने उसको कहा- एक शर्त पर कि तुम भी देखोगी कैसे मेरा लंड तुम्हारी चूत की धुनाई कर रहा है।
उसने कहा- ठीक है, पर कैसे?

मैं बेड पर लेट गया और उसको कहा- मेरे ऊपर बैठो!
वो मेरी तरफ मुंह कर के बैठ गई फिर मैंने उसको कहा- अब मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत में लो और फिर धीरे धीरे नीचे बैठ जाओ।

उसने वैसे ही किया और लंड उसकी चूत में समा गया, वो बोली- अब क्या करूं?
मैंने कहा- अब ऐसे ही बैठे बैठे लंड को अंदर रख कर ही घूम जाओ और मेरे मुंह की तरफ अपनी पीठ कर दो!
उसने वैसा ही किया।

जैसे ही वो घूमी, लंड भी उसकी चूत में घूम गया और वो सेक्स के इस एहसास से पागल सी हो गई और कहने लगी- फिर से घूमूँ? बड़ा मज़ा आया अंदर लंड घूमने में।
मैंने कहा- नहीं, अब हाथ पीछे को रख कर ऊपर नीचे उछलो और सामने लगे बड़े शीशे में खुद की चुदाई देखो।

वो उछलने लगी और शीशे में अपनी चुदाई देख कर बहुत खुश हुई।
फिर उसने कहा- मेरे चूचे कैसे उछल रहे हैं, इनका कुछ करो ना बहुत तंग करते हैं ये सेक्स चैट के समय।
मैंने उसके चूचे पकड़े और उनको मसल दिया, उसके मुंह से आह निकल गई।

फिर जब वो थक गई तो मैंने उसको घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी चूत चोदी। इस आसन में भी उसको बहुत मज़ा आया फिर मैंने उसको अपनी गोद में बिठा कर भी चोदा। गोद वाला आसन उसका मनपसंद आसन बन गया जो आज भी उसका पसंदीदा है।
बहुत देर तीन चार आसनों में उसकी चुदाई करने के बाद जब मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने वो उसके चूचों के ऊपर डाल दिया।

इस पर उसने कहा- अब क्या मेरे चूचे भी गोरे हो जायेंगे?
मैंने कहा- हाँ!
और हंस दिया।

उसके बाद हमने बहुत देर तक एक दूसरे को चूमा और फिर से मिल कर चुदाई करने का वादा किया।

जैसे ही हमने कपड़े पहने, तभी उसके घर के दरवाज़े पर दस्तक हुई, हम डर गए।
मैं फटाफट पिछले दरवाज़े से भाग के पिछले गेट से कूद कर अपने घर में घुस गया।

फिर मैंने रात को उसको पूछा कि कौन था.
तो उसने बताया- ऋदम दीदी थी, वो मुझको बुलाने आई थी कि ‘आ जा डांस शुरू हो गया है।’

लेकिन वो तो मुझे बाद में पता लगा कि उस दिन ऋदम ने हमें टैम्पो ट्रैक्स में भी स्मूच करते देख लिया था और उसने हमारी चुदाई की भी आवाज़ें सुन ली थी।
मैंने ऋदम वाली समस्या को कैसे शांत किया, यह मैं आपको अपनी अगली कहानी में बताऊंगा।

प्लीज मुझे मेल करके मेरी इस कहानी के बारे में ज़रूर बताएं कि आपको यह सेक्सी कहानी कैसी लगी।
और हाँ, प्लीज कोई भी मुझसे ऋदम या नैना का पता या नंबर मांगने की कोशिश ना करे क्यूंकि मैं किसी भी लड़की, भाभी, या आंटी की कोई भी डिटेल किसी को नहीं दे सकता।



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