जवान लड़की की चूत चुदाई की शुरुआत-2

(Jawan Ladki Ki Chut Chudai Ki Shuruat- Part 2)

मेरी सेक्स कहानी के पहले भाग में अब तक आपने पढ़ा था कि मैं मेरे कॉलेज की सीनियर लड़की मालती के घर में थी, वो मेरी चूत में डालने के लिए एक डिल्डो ले आई थी.
अब आगे …

मैंने घबराते हुए कहा- दीदी, इसको मत डालना वरना मेरी चूत फट जाएगी और सब यही समझेंगे कि इस लड़की की चुदाई हो चुकी है.
मालती बोली- डरती क्यों हो मीता … चुदाई तो होनी ही है … आज नहीं तो कल … फिर चूत को इस मज़े से क्यों वंचित करती हो. एक बार तो फटेगी ही, असली लंड से ना सही, नकली लंड से ही सही. मगर तुम अब सोचना और बोलना बंद करो और मज़े के लिए तैयार हो जाओ.

उसने बिना मुझसे कुछ और सुने उस डिल्डो (जिस पर उसने पहले से ही कोई क्रीम लगा रखी थी) मेरी चूत के मुँह पर रख दिया और बोली- ले मीता तू आज से लड़की नहीं रहेगी … अब तू औरत बनने जा रही है.

यह कहते हुए उसने मेरे मुँह पर अपना मुँह रख कर जोर से दबाया और अपने हाथों से उस डिल्डो को मेरी चूत में घुसा दिया. जिससे चूत में से खून आना शुरू हो गया और मेरे चीखें निकलने लगीं. मेरी चीखें इतनी तेज थीं कि अगर कोई भी खिड़की या दरवाजा जरा सा भी खुला हुआ होता तो बाहर से लोग अन्दर आ गए होते कि पता नहीं इस घर में क्या हुआ है. मगर मालती पर तो पूरा जोश चढ़ा हुआ था. उसने जब तक पूरा डिल्डो मेरी चूत में ना घुसेड़ दिया, तब तक चैन नहीं लिया. जब तक उसको मेरी चूत में पूरी तरह से फँसा ना दिया, वो नकली लंड को मेरी चूत में पेलती रही. फिर बोली- यह तब तक अन्दर ही रहेगा, जब तक तुम ये नहीं बोलोगी कि हां मज़ा आ रहा है … इसको अन्दर रहने से तुझे मजा आ रहा है. तब तक इसे मैं अन्दर ही पेले रहूंगी.

कुछ देर बाद मेरी चूत से खून निकलना बंद हो गया था और चूत की दीवारों ने डिल्डो को कसके जकड़ लिया था. मुझे ऐसे लग रहा था कि चूत को कुछ आज मस्त सा मिल गया है.
जब 5 मिनट तक मेरी चूत में डिल्डो अन्दर ही रहा तो मैंने कहा- आह दीदी अब इसको हिलाओ ना … मेरी चूत अन्दर से उछल रही है … मगर हिल नहीं पा रही है.

यह सुन कर मालती ने कहा- अब मतलब तुझे लौड़े का मज़ा मिलना शुरू हो गया है. अब मैं इसको निकाल कर दूसरा लंड अपनी चूत के साथ बाँधती हूँ जिसे स्ट्रॅप ऑन कहा जाता है. फिर मैं तुम्हें एक लड़के की तरह से चोदूँगी.

अब मुझे कुछ सुनाई नहीं पड़ रहा था सिवाए इसके कि इस डिल्डो को अन्दर बाहर किया जाए. क्योंकि जो डिल्डो आपकी मीता की चूत में पूरा फँसा हुआ था, वो काफ़ी मोटा था और इसलिए जब मालती ने उसको निकाला तो चूत का मुँह पूरी तरह से खुल चुका था. ऐसे लगता था कि जैसे मेरी चूत में किसी ने पूरा हाथ डाल दिया हो. मेरी बेचारी कुँवारी चूत को पूरी तरह से हलाल कर दिया गया था.

जब उसने डिल्डो को निकाला तो चूत से खून से मिली हुई पानी की बूंदें टपक रही थीं. खैर चूत को भगवान ने बनाया है इस तरह का है कि जैसे ही लौड़ा बाहर निकले तो थोड़ी देर बाद यह अपनी असली सूरत में आ जाए.

जब तक मालती दूसरा डिल्डो निकाल कर उसकी बेल्ट पूरी तरह से बाँधती, मेरी चूत फिर से अपनी पुरानी शक्ल में आने लगी. जिसे देख कर मालती ने कुछ भी करने से पहले उस पर अपना मुँह मारना शुरू कर दिया. अब आपकी मीता को लंड का खून लग चुका था क्योंकि 5 मिनट तक नकली मोटा लंड मेरी चूत में भी रह कर गया था, इसलिए चूत की खुजली बहुत बढ़ गई थी.

जैसे ही मालती का मुँह मेरी चूत पर पड़ा, तो मैंने उसके सर को बहुत जोर से दबा दिया और मैं तो अब मानो असके सर को चूत से हटाना ही नहीं चाहती थी.

मगर मालती भी पूरी खेली खाई हुई थी उसने अपना मुँह उठा कर जो डिल्डो उस ने अपनी कमर पर बँधा था, उसको मेरी चूत में डाल दिया. चूत अब अपना रास्ता पूरा खोल चुकी थी, इसलिए अब मुझको इस डिल्डो को अन्दर करवाने में कोई तकलीफ़ नहीं हुई क्योंकि यह पहले वाले से कुछ कम मोटा था.

जैसे ही मालती मेरी चूत में डिल्डो डाल कर अन्दर बाहर करने लगी, तो मैं भी नीचे से गांड को उछाल उछाल कर उसे अपने अन्दर करवाने में लग गई. साथ ही मैं बोल रही थी- आह … जरा जोर जोर से करो मालती रानी … मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है … आह … और जोर से और जोर से.

अब मालती मेरी चूत को पूरी तरह से धक्के मार मार कर चोद रही थी. जैसे ही पूरा डिल्डो मेरी चूत में तो अन्दर जाता था तो उसका जिस्म मेरे जिस्म से लगता था. जिससे ठप ठप की आवाज आती थी. क्योंकि डिल्डो तो कोई रस निकालने वाला था नहीं, उससे तो चाहे पूरी रात धक्के लगवाओ, उसे क्या फर्क पड़ने वाला था. इसलिए मालती आज मुझको छोड़ना ही नहीं चाहती थी … वो चाहती थी कि मैं हर रोज लंड के लिए तैयार रहूँ.

मगर दोस्तो, आपकी मीता का बुरा हाल हो चुका था. मैं कई बार ढीली हो चुकी थी और हर बार मैं जब पानी छोड़ती थी तो मेरे हाथ पैर ढीले हो जाते थे. मगर मालती तो उस को उसी हालत में भी मेरी चूत पर धक्के पर धक्का मारती रही.
आखिर मैंने कहा- मालती अब बस कर दो … मेरी हालत नहीं है कि मैं और सहन कर सकूँ.
तब कहीं जा कर मालती ने मुझे छोड़ा. जब छोड़ा तो मेरी चूत का मुँह काफ़ी देर तक पूरा खुला ही रहा.

अब मुझमें इतनी भी हिम्मत नहीं बची थी कि मैं उठ कर बाथरूम में जाकर अपनी चूत को साफ़ करके अपने कपड़े पहन सकूं. मैं पूरी तरह से निढाल हो चुकी थी. कोई एक घंटे बाद मैं हिली और बोली- मालती तुमने क्या कर दिया आज. अब मुझे सहारा दो यार … मैं उठ नहीं पा रही हूँ.

मालती बोली- अगर नकली से यह हाल हुआ है तो असली से क्या होगा रानी.
मैंने कहा- असली इतनी देर नहीं लगाता … जितना तुमने मेरी चूत का बाजा बजाया है.

काफ़ी देर बाद मैं किसी तरह से उठी और अपने कपड़े पहनने लगी. मगर फिर भी मैं पूरी तरह से नहीं चल पा रही थी. मैंने घर पर फोन मिलाया- मम्मी, मैं कुछ देर बाद घर पर आऊंगी क्योंकि मैं अपनी एक सहेली के साथ मॉल जा रही हूँ … उसको अपनी बहन के लिए कोई गिफ्ट खरीदना है.
इस तरह से मैंने अपने आप को पूरी तरह से संभालने के लिए घर से कुछ टाइम भी माँग लिया ताकि कोई कुछ ना कहे.

कॉलेज खत्म होने के टाइम मैंने उससे कहा- अब निकलो … वरना मेरे घर पर भी कोई आ सकता है और हमें देख कर समझ जाएगा कि हमने आज कॉलेज से बंक किया है.

इस तरह से मालती और मैं घर से बाहर निकले और एक होटल में जाकर कॉफी पीने के लिए बैठ गए. क्योंकि मैं अभी भी ठीक तरह से नहीं चल पा रही थी जिसका कारण था कि मालती ने पूरे 5 मिनट तक एक मोटा सा डिल्डो मेरी चूत में फँसा कर रखा था. अगर वो कोई असली लंड भी होता तो भी इतनी मुश्किल नहीं होती क्योंकि लंड जल्दी से अन्दर बाहर होता है, जिससे वो एक जगह टिक कर नहीं बैठता. मगर डिल्डो तो पूरे 5 मिनट तक अन्दर घुसा रहा, जिससे उसने मेरी चूत की सारी नसों को पूरी तरह से दबा कर रखा था. उन्हें जरा भी साँस लेने नहीं दिया. इस वजह से मेरी चूत अन्दर से सूज गई थी.

मालती ने मुझसे कहा- अगर घर पर जाने के बाद भी कुछ महसूस हो, तो बोल देना कि मॉल में सीढ़ियों से गिरने लगी थी कि पैर में चोट लगी मगर अच्छा हुआ कि मैं बच गई. इसकी वजह से चलने में थोड़ी तकलीफ़ हो रही है.
मुझे मालती की बात जंच गई.

अब मालती ने मेरी चूत को नकली लंड से ही सही, लेकिन मीठा दर्द दे दिया था … जिससे उसको अब लंड की सख्त जरूरत होने लगी. मगर अब भी मैं पूरी असली मिट्टी की बनी थी और मैंने कसम खाई हुई थी कि किसी लड़के से नहीं चुदूँगी.

यह कहानी आप autofichi.ru में पढ़ रहें हैं।

मालती ने अब मुझसे फोन पर अश्लील बातें करनी शुरू कर दीं और बहुत से चुदाई वाली क्लिप भेजने लगी. एक फेस बुक अकाउंट भी बना लिया गया, जिस पर हम दोनों के अलावा और कोई फ्रेंड नहीं था. जिससे हम दोनों एक दूसरे से गंदी चैट भी करते और फोटो और ब्लू फिल्मों के क्लिप भी देखते.

एक दिन मैंने मालती से कहा- मालती, मुझे मेरा पति दे दो.
मालती बहुत हैरान हो गई और बोली- मेरे पास कहां से आया तुम्हारा पति?
तब मैंने कहा- मेरी चूत से किसने खून निकाल कर मुझे लड़की से औरत बनाया था?
मालती ने कहा- मेरे डिल्डो ने?
मैंने कहा- तब मेरा पति हुआ ना वो?
मालती हंस पड़ी और बोली- क्या बात है डार्लिंग. तुम कहो तो मैं तुम्हें असली पति भी ढूँढ कर दिलवा दूंगी, किसी को कुछ पता नहीं लगेगा. अगर कहोगी तो एक ही पति को दोनों शेयर भी करेंगे.
मगर मैंने कहा- वो सब बाद में देखना मगर मुझे मेरे पहले पति ही चाहिए … मैं पूरी पतिव्रता ही बनी रहना चाहती हूँ.
मालती ने कहा- ठीक है कल तुम्हारा पति तुम्हारे पर्स में होगा.

इस तरह से मैं डिल्डो को अपने साथ ले कर आ गई और रात को उसी से अपनी चुदाई करती.

आख़िर कॉलेज के दिन भी खत्म हो गए मालती एक साल पहले ही कॉलेज से बाहर आ चुकी थी और अगले साल मैं भी पास आउट हो गई. मगर हम दोनों की दोस्ती अब भी पूरी तरह से चल रही थी. हम दोनों ही अब पूरी तरह से चुदक्कड़ बनी हुई थीं. मालती असली लंड से और मैं नकली लंड से चूत का कीमा बनवा लेती थी. हम दोनों में एक भी रात बिना लंड के कोई नहीं रहता था.

कई बार मालती भी मुझको अपने घर पर बुला कर पहले दिन जैसे चुदाई करती और करवाती थी.

अब मैं किसी नौकरी की तलाश में थी मगर नौकरी थी कि मिलती ही नहीं थी. मालती को मिल चुकी थी और वो मुझसे कहा करती थी कि नौकरी का रास्ता लड़की के मम्मों से होता हुआ चूत से ही जाता है. अगर कहो तो मैं तुम्हारे लिए नौकरी का प्रबंध कर देती हूँ.

मगर मैं नहीं मानी. आख़िर मुझको सरकारी नौकरी मिल गई और वो भी स्टाफ सर्विस कमिशन की परीक्षा पास करके मिली थी. मेरी नौकरी इंस्पेक्टर की थी, जिसका काम था कि हर एक प्रपोजल की पूरी तरह से छानबीन करके अपनी रिपोर्ट देना, जिसके लिए मुझे बाहर भी जाना पड़ता था. इस काम के लिए कई और लड़के और लड़कियां भी थे.

जब मैं ऑफिस में पहले रोज आई, तो सबसे मुलाकात हुई. जिनमें से बहुत सी लड़कियां शादी शुदा थीं, कुछ बिन शादी हुए भी थीं. दोपहर को खाने के समय लड़कियां आपस में बातें करने लगीं जो जरूरत से ज़्यादा अश्लील हुआ करती थीं.

एक दिन एक ने कहा- क्या बोलूं यार … पूरी रात सोने ही नहीं दिया.
दूसरी बोली- अरे वाह … तुम्हारे तो मज़े हैं फिर सारी रात अन्दर डलवा कर पड़ी रहती हो.
तीसरी बोली- नहीं रे, सारी रात नंगी करके अपना मुँह मारता रहता है.

इस तरह की बातें वे करने लगीं, जो शादीशुदा थीं. जिनकी शादी नहीं हुई थी … उनमें से एक ने कहा- साला कल मुझे होटल में ले गया और पूरा 7 इंच का अन्दर डाल दिया.
दूसरी बोली- जब होटल में ले गया था तो डालेगा ही ना. मेरा तो अपने घर पर ही ले जा कर चोदता है.
तीसरी बोली- साले से कल कहा था कि अपने पेरेंट्स से बात करो तो बोला नहीं अभी बड़े भाई की शादी होनी है, फिर बहन की होगी … तब मेरा नंबर आएगा. अगर तुम्हें जल्दी है तो कोई और ढूँढ लो.
इस पर एक ने कहा- तब तू उसको छोड़ दे, वो तुम्हें पूरी तरह से बजा बजा कर किसी और के साथ जाएगा पक्का.

इस तरह से बातें करते हुए उनमें से एक ने मुझसे पूछा- तुम्हारे किले पर कितनी बार चढ़ाई हो चुकी है?
मैंने अनजान बनते हुए कहा- क्या पूछ रही हो … मुझे नहीं समझ में आया क्या पूछा है.
इस पर एक शादीशुदा ने सीधे सीधे कहा कि वो पूछ रही है कि तुम्हारी चूत को कितने बार लंड ने चोदा है.
मैं उनके मुँह से लंड और चूत सुन कर कुछ हैरान हुई … मगर जताया नहीं. मैंने कहा- एक बार भी नहीं.
तब उसने पूछा कि रात में तुम्हें किसी चीज की जरूरत नहीं होती?
मैंने पूछा- नहीं … मेरे पास कोई खास चीज है.
उसने कहा- मैं लंड की पूछ रही हूँ.
मैंने कहा- हां होती है … मगर में किसी से कोई ऐसे संबंध नहीं बनाया करती.

वो सब मुझे कुछ ऐसे निगाहों से देखने लगे … जैसे कि मैं किसी चिड़ियाघर से आई हूँ.
मेरी बात उनकी समझ में जब आती जब मैं उनको बताती.

मेरी सेक्स स्टोरी का मजा लेने के लिए कहानी के आगे के भाग भी पढ़ें और मुझे अपने विचार ईमेल करें.
कहानी जारी है.



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