गांव की गौरी की कुंवारी चूत

(Gaon ki Gori Ki Kunvari Chut)

दोस्तो, मेरा नाम रजत है. मैं दिल्ली का रहने वाला हूं पर काम की वजह से अधिकतर बाहर रहता हूँ। मैं autofichi.ru का नियमित पाठक हूं. मैंने इस साइट पर प्रकाशित की गयी सभी स्टोरीज़ को पढ़ा है। मैं बहुत दिन से अपनी एक रीयल स्टोरी अपको बताना चाह रहा था पर टाईम न होने की वजह से लिख नहीं पाया. अब मैं ज्यादा समय न लेते हुए जल्दी से स्टोरी पर आता हूं।
पहले मैं अपने बारे में आप सभी को बता दूं कि मेरा रंग गेहुंआ है और मेरी हाइट 5 फीट 11 इंच है. मैं दिखने में थोड़ा भारी हूं और मेरी छाती बहुत मजबूत है. अपनी छाती को जिम कर करके मैंने बहुत मजबूत बनाया हुआ है.

जो कहानी मैं आपको बताने जा रहा हूं यह बात तब की है जब मैं अपने गांव में गया था. तब हमारे खेत में गेहूँ की कटाई चल रही थी. मेरे दादा जी एक वैद्य हैं जिनके पास सब दवा लेने आते हैं। हमारे खेत में हमने गेहूँ काटने के लिये काम वालियों को लगाया हुआ था जिसमें से 2 औरत थी और 4 लड़कियां. उसमें से एक लड़की बहुत खूबसूरत थी.

एक दिन की बात है कि उस लड़की को गर्मी की वजह से सर में दर्द शुरु हो गया. वो वहीं पर खेत में बेहोश हो गयी. यह देख कर मैं उसको गोद में उठा कर घर ले आया और मैंने दादा जी से उसके लिये दवा देने के लिये कहा. अब तक वो लड़की बेहोशी की हालत में थी, तो उसे सबसे पहले पानी डाल कर जगाया. फिर उससे पूछा कि उसको क्या परेशानी हुई थी तो उसने बताया कि उसको माइग्रेन की बिमारी है पर रुपए न होने की वजह से वो इलाज नहीं करवा पा रही है.

तो दादा जी ने उसे एक जड़ी-बूटी दी जो गंगा जल में पीस कर माथे पर लगानी थी. दादाजी ने कहा कि उससे उसका दर्द एक मिनट के अंदर ही बंद हो जायेगा. वह काम करने की हालत में नहीं थी तो हमने उसे अगले दिन सुबह आने के लिए कह दिया.

फिर वो अगली सुबह अपनी मां के साथ मेरे घर पर आयी. उसने सलवार सूट पहन रखा था जिसमें वो हुस्न की मलिका लग रही थी।
मैं आप सभी पाठकों को बताना चाहूंगा कि गांव में लड़कियों को अन्दर कुछ न पहनने की आदत होती है.

जब मैंने उसे देखा तो मैं देखता ही रह गया. उसकी चूचियों की निप्पल उसके शर्ट में से साफ दिखायी दे रही थी और शर्ट में से बाहर आने को बेचैन थे। उसकी चूचियों के तने हुए निप्पल देख कर मेरा लंड तो मेरे पजामे में ही खड़ा होना शुरू हो गया. मैंने पजामे में अन्दर से ही अपने लंड को सेट किया और उसका उभार न दिखे इसके लिये मैंने लंड के ऊपर हाथ रख लिया.

मगर लड़की ने मेरी हालत को भांप लिया और मुझे ऐसी हालत में देख कर मुस्कुराने लगी। उसको मुस्कराती देख मैंने भी उसकी तरफ देख कर मुस्करा दिया और उसे आंखों ही आंखों में लण्ड की तरफ इशारा कर दिया। मगर उसने मुंह फेर लिया. घबरा कर मेरी गांड फट गयी कि ये कहीं किसी से कुछ कह न दे! मगर शुक्र रहा कि उसने किसी से कुछ नहीं कहा और कुछ दवाइयां लेकर वह वापस अपने घर चली गई.
उसको दोबारा चेक कराने के लिए सात दिन बाद का टाइम दिया गया. उसको कुछ परहेज़ भी बताया गया था.

अब मैं उसी मौके की राह देखने लगा. मुझे पता था कि वो सात दिन के बाद फिर से चेक कराने के लिए आयेगी. मैं इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहता था. मैं अपने लंड का प्यार उसको देना चाहता था.

जब वो सात दिन के बाद शाम को हमारे घर आयी तो मैंने उस दिन उसके फीगर को ध्यान से देखा जो 34-30-36 के लगभग था. उसकी गांड ऐसी थी कि मुंह में पानी आ जाये. उसकी माँ भी साथ में आयी थी. मैं वहीं छिप कर उसकी माँ की बात सुनने लगा.

उसकी माँ मेरे दादाजी से कह रही थी कि मेरी बेटी का माइग्रेन अब आपकी दी हुई दवा की वजह से खत्म होने के कगार पर है मगर अब इसकी योनि से पानी निकलने लगा है. मुझे लग रहा है कि मेरी बेटी अब जवान हो गई है.

दादा जी ने उसकी माँ को बताया कि माइग्रेन की वजह से इसकी योनि से पानी आ रहा है. मैं उन दोनों की बातें सुन रहा था. मैंने मन ही मन सोच लिया था कि इस कमसिन जवानी का पहला भोग मैं ही लगाऊंगा. इसकी चूत को खोल कर जवान मैं ही करूंगा. मगर सोच रहा था कि यह सब होगा कैसे.

तभी दादाजी ने बताया कि इसकी कोई हड्डी शायद गल कर इसकी योनि से बाहर निकल रही है. इसके लिए मैं एक आयुर्वेदिक तेल लिख देता हूँ जिसकी मालिश इसके पूरे शरीर पर करनी पड़ेगी. उससे इसकी हड्डियां मजबूत हो जायेंगी. दादा जी ने दो और पुड़िया बना कर उसकी माँ को दे दी.

जब वो दोनों माँ-बेटी घर से बाहर निकल रही थीं तो मैं गाड़ी बाहर निकाल रहा था. उसकी माँ ने पूछ लिया- बेटा कहाँ जा रहे हो?
मैंने उनको बताया कि मुझे दस-ग्यारह किलोमीटर दूर मार्केट में जाना है. किस्मत से उनका घर भी रास्ते में पड़ता था तो उसकी माँ ने मुझसे उनको कुछ दूर तक छोड़ने के लिए रिक्वेस्ट की. दिन ढल रहा था.

जब हम उनके घर पहुंचे तो देखा कि उनका घर काफी छोटा था. उसकी माँ ने मुझे मार्केट से वह तेल लाने के लिए भी कह दिया.

मुझे अभी तक उस लड़की का नाम भी नहीं पता था. जब मैं तेल लेने गया तो मेरे दिमाग में उसकी चूत चोदने के ख्याल आ रहे थे इसलिए मैंने पहले ही कंडोम के पैकेट भी ले लिये. जब मैं वापस आया तो उस समय रात के नौ बज चुके थे और गांव में लगभग सभी लोग इस समय तक सो जाते हैं.

तेल देने के लिए मैंने उसके घर का दरवाजा खटखटाया, उसकी माँ ने नींद में दरवाजा खोला. मुझे अन्दर बुला कर उन्होंने मुझे बैठने के लिए एक कुर्सी दे दी.
उसकी माँ वहीं फर्श पर नीचे बैठ गई. उसकी माँ ने नाइटी पहन रखी थी. उसकी माँ ने पैर खोले हुए थे जिसके कारण मुझे उसकी माँ की चूत दिख गई. उसकी माँ की चूत को देख कर मेरे लंड में तनाव आ गया और वो खड़ा हो गया. तभी उसने अपनी बेटी को अंजलि कहकर पुकारा. तो उसका नाम अंजलि (बदला हुआ) था. जैसा उसका नाम था वैसा ही उसका हुस्न था.

उन्होंने मेरी खातिरदारी की. जब मैं जाने लगा तो उन्होंने मुझे घर पर रुकने के लिए कह दिया. रात काफी हो चुकी थी. मैं तो उनकी बात झट से मान गया. मैंने वहीं पर रात गुजारने के बारे में सोच लिया.
उनके घर में अंजलि का शराबी पिता भी था. उसकी माँ ने मुझे अंजलि वाले कमरे में सोने के लिये कह दिया. इतने में ही उसका बाप आ पहुंचा. वह अंजलि की माँ को पकड़ कर अंदर ले गया. दोनों आपस में लड़ाई झगड़ा करने लगे.

अंजलि मेरी बगल में बैठ कर आंसू बहाने लगी. कहने लगी कि उसके पिता रोज इसी तरह से घर में शराब पीकर आते हैं और फिर लड़ाई करते हैं.
मैंने उसके आंसू पोंछे और उसने मेरे लिये खाना लगा दिया. जब तक मैंने खाना खत्म किया तो उसने मेरे लिये बिस्तर लगा दिया था. जब तक मैंने हाथ-मुंह धोया तो अचानक अंदर से उसकी माँ की चीखने की आवाज आने लगी. हम दोनों ने जाकर झांका तो उसका बाप उसकी माँ को घोड़ी बना कर चोद रहा था.

यह सीन देख कर मेरा लंड भी तुरंत खड़ा हो गया और मेरा हाथ कब मेरे लंड पर पहुंच गया मुझे पता नहीं चला. अंजलि यह सब देख रही थी. वह जब हँसने लगी तो मैंने उसकी तरफ देखा. फिर अपनी तरफ देखा कि मैं अपने लंड पर हाथ रख कर उसको सहला रहा हूँ. मैंने अपना हाथ अपने लंड से हटा लिया. उसके बाद मैं वापस अपने बिस्तर पर बैठ गया.

तभी अंजलि भी मेरे पास आ गई. आकर कहने लगी- जो तेल तुम लेकर आये उससे मेरी मालिश कर दोगे क्या? आपके दादा जी ने इसी तेल से मालिश करने के लिए कहा था.
अंजलि के मुंह यह बात सुनते ही मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई. मैंने फट से हाँ कर दी.

उसके बाद अंजलि अपने बाथरूम में जाकर हाथ-मुंह धो कर आ गई.
मैंने पूछा- तुम मुझसे मालिश करवाने के लिये तैयार हो?
वो बोली- हाँ, बिल्कुल तैयार हूँ.

मैंने उसकी सलवार का नाड़ा एक बार में ही खींच दिया. उसको गोद में उठा कर बेड पर लेटा दिया. बेड पर ले जाकर मैंने उसकी कुर्ती भी उतार दी. उसकी चूचियां नंगी हो गईं. मैंने जी भर कर उसके नंगे बदन को देखा.
मैंने उसके बाद धीरे से उसकी एक चूची पर चुम्बन दे दिया जिससे वो सिहर उठी. मैंने देर न करते हुए उसकी चूत पर हाथ रख दिया. कुछ पल तक उसकी चूत को मसला. वह उत्तेजित हो उठी. मैंने उसको शांत रहने के लिए कहा तो वह थोड़ी शांत हो गई.

फिर मैंने तेल की शीशी ली और उसके सारे बदन पर तेल गिरा दिया. मैंने तेल लगा कर उसकी मालिश शुरू की. मेरे हाथ उसकी चूत पर मसाज दे रहे थे. उसको आनंद आने लगा और उसकी आंखें बंद होने लगीं. मेरे लंड ने अपना नाग रूप धारण कर लिया. उसकी चूत की गुफा में घुसने के लिए वो बिल्कुल तैयार था.

मैं उसके पैरों पर अच्छे से मालिश करते हुए उसकी जांघों को चूमने लगा. वो तड़पने लगी और उसकी चूत भट्टी की तरह गर्म होने लगी. मैं अभी निचले हिस्से में ही मालिश कर रहा था मगर उसने गर्म होकर खुद ही कहा कि थोड़ी मालिश ऊपर भी कर दो.
मैंने उसके चूचों पर तेल की बूंदें डाल दीं और उसके चूचों को मसाज देने लगा. उसके गोल-गोल जवान चूचे मेरे सख्त हाथों को मखमली अहसास दे रहे थे और टाइट होने लगे थे.

चूचों को मसाज देने के बाद वो बेकाबू हो गई और उसने खुद को मेरे हवाले कर दिया. मैंने अंजलि के नंगे चिकने बदन के हर अंग को अच्छी तरह से मसला और उनको तेल पिलाया.

अब मुझसे भी कंट्रोल नहीं हो रहा था. मैंने उसकी गुलाबी कुंवारी चूत पर हमला बोल दिया. मैंने तेल लगाकर उसकी चूत में उंगली डाल दी. उसकी चूत से लेकर गांड तक तेल की धार बहा दी. वो बुरी तरह से गर्म होकर कसमसाने लगी. वो तड़पने लगी. मुंह से आह्ह ऊंहह की आवाजें निकालने लगी जो मेरे जोश को और ज्यादा बढ़ा रही थी.

उसकी आवाजें बहुत तेज होती जा रही थीं इसलिए कमरे से बाहर जाने लगी. मैंने उसके मुंह में उसी की चुन्नी फंसा दी. उसके बाद मैं उसके पैरों पर इस तरह से बैठ गया कि वो हिल भी न पाये. मैं उसकी चूत को पकड़ कर मसलने लगा. उसकी चूत गुलाबी से लाल रंग में आने लगी थी. वह बहुत ही ज्यादा गर्म हो गई थी. मैंने उसकी चूत में एक उंगली अंदर कर दी. वो मचलने लगी. उसकी सीत्कार भी अब बाहर नहीं आ पा रही थी.

यह कहानी आप autofichi.ru में पढ़ रहें हैं।

मैंने उसके मुंह से चुन्नी निकाली और पूछा- कैसा लग रहा है?
वो बोली- बस अब मुझे चोद दो, मुझे तड़पा कर तुम्हें क्या मिलेगा.
यह कहकर उसने मेरे होंठों को चूस लिया और फिर अलग होकर बोली- जब तुम्हारा मन करे तुम मेरे पास आ जाना. मगर अभी मैं तड़प रही हूँ और नहीं रुका जाता. मुझे चोद दो जल्दी!
उसने मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही अपनी मुट्ठी में भींच लिया और आगे-पीछे करके सहलाते हुए हिलाने लगी.

मैंने उससे दूर होते हुए अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिये. जब तक मैंने शर्ट उतारी तब तक अंजलि ने मेरी पैंट का हुक खोल दिया और मेरा कच्छा भी नीचे कर दिया. कच्छा नीचे होते ही लंड किसी रबर के पाइप की तरह ऊपर-नीचे होने लगा. मेरा लौड़ा फनफना रहा था उसकी चूत को चोदने के लिए.

मैंने अंजलि को गोद में उठा कर अपने कंधे पर बिठा लिया जिससे उसकी चूत का मुंह मेरे होंठों से टकरा गया. मैं जिम करता था इसलिए मुझे वजन उठाने में कोई परेशानी नहीं हो रही थी. मैंने उसकी चूत में जीभ अंदर डाल दी और उसकी चूत को चाटने लगा जैसे कुत्ते दूध पीते हुए करते हैं.

तीन-चार मिनट में ही अंजलि ने मेरे बालों को पकड़ कर अपना पानी मेरे मुंह में छोड़ दिया. उसकी चूत का रस संतरे के खट्टे जूस जैसा लग रहा था. मैंने उसकी चूत से रस बहने दिया. कुछ रस मैंने चाटा भी.

उसके बाद अंजलि को नीचे उतार दिया. उसके बाद मैंने जोश में आकर उसके चूचों को दबाना शुरू कर दिया और इतनी जोर से मसला कि उसकी चीख निकलने लगी. मैंने अपने होंठों को उसके होंठों पर रखा और उसके हाथ में अपना छह इंच का औजार थमा दिया. अंजलि मेरे लंड को हाथ में लेकर उसकी मुट्ठ मारने लगी.

उसके बाद अंजलि ने मेरे लंड को अपने मुंह में भर लिया और उसको चूसने लगी. जैसे किसी लॉलीपोप को चूस रही हो. पांच मिनट की चुसाई में ही मैंने भी अपना माल उसके मुंह में निकाल दिया और कुछ देर तक लंड को उसके मुंह में ही फंसा कर रखा. उसके बाद मैं और अंजलि दोबारा से बेड पर आ गये. यह दौर लम्बा होने वाला था.

पहले मैं बेड पर बैठा और अंजलि मेरी टांगों के बीच में आकर बैठ गयी. कुछ ही देर में उसके चूचे चूसने के बाद मेरे लंड में फिर से तनाव आना शुरू हो गया. अब हम चुदाई के लिए तैयार हो चुके थे.

मैंने अंजलि को दीवार के साथ में खड़ी होने के लिए कहा. वह सवालिया नजरों से मुझे देखते हुए दीवार के साथ खड़ी हो गई. मैंने उसके एक पैर को उठा कर अपनी पीठ पर सेट करवा लिया.

उसका मुंह मेरी तरफ था. मैंने धीरे से अपने लंड का टोपा उसकी चूत के मुंह पर रखा और फिर अपने होंठों में उसके होंठों को भर कर ऐसा झटका मारा कि आधा लंड उसकी चूत में उतर गया. उसकी आवाज मेरे मुंह में ही घुटने लगी. वो तड़पने लगी. मैं वहीं पर रुक गया और कुछ पल बाद उसकी सांसें सामान्य हो गईं.

फिर मैंने अपना लंड दोबारा से बाहर निकाल लिया. उसके बाद फिर से एक जोरदार झटके के साथ उसकी चूत में धकेलते हुए धक्का दिया और पूरा का पूरा लंड उसकी चूत में समा गया.
उसकी चूत से खून की कुछ बूंदें बाहर आने लगीं. उसकी आंखों से आंसू बहने लगे. वह कहने लगी- बस करो, बाकी की चुदाई कल कर लेना. मुझे अभी के लिये छोड़ दो.
मगर मैं जानता था कि अगर मैंने आज इसको यहीं पर छोड़ दिया तो कल ये मुझे अपनी सलवार का नाड़ा भी नहीं खोलने देगी.

मैंने उसके होंठों को फिर से चूसना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे उसकी चूत में लंड को अंदर बाहर करने लगा. कुछ देर तो वो दर्द से बिलखती रही मगर फिर उसको भी धीरे-धीरे मजा आने लगा. मेरी स्पीड तेज हुई तो दोनों के मुंह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… इस्स्स … ओह्ह जैसी कामुक आवाजें पूरे माहौल को गर्म करने लगीं.
वो बोली- आह्ह … आराम से करो.

कुछ देर में ही वह एक पैर पर खड़ी-खड़ी थक गई तो उसने दूसरा पैर भी मेरी पीठ पर रख लिया और मेरी गोदी में आ गई. मैंने उसको बेड पर पटक दिया.
उसकी टांगें अपने कंधे पर रख कर जोर-जोर से उसकी चुदाई करने लगा. कुछ देर की चुदाई के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा. वो झड़ने लगी और उसका लावा फटता देख कर मेरा लावा भी मेरे लंड से फटने को हो गया. मैंने दो-तीन जोर के धक्के दिये और मैं उसकी चूत में ही झड़ गया.

हम दोनों एक दूसरे के साथ चिपक गये. जैसे किसी जन्म के बिछड़े हुए साथी हों. उस रात हमने तीन बार चुदाई की. दूसरी बार मैंने उसको डॉगी स्टाइल में चोदा. जब चुदाई खत्म हुई तो रात के तीन बज गये थे.

चुदाई के बाद थक कर हम दोनों सो गये. जब सुबह मेरी आंख खुली तो मैं बेड पर अकेला ही सो रहा था. अंजलि किसी के खेत में गेहूँ काटने जा चुकी थी. उसकी माँ ने मुझे चाय पिलायी और मैं घर आ गया. उसके बाद मैं उससे फिर नहीं मिल पाया क्योंकि मैं पढ़ाई के लिए इंदौर आ गया था. एक बार जब मौका मिला तो उसके घर जाकर पता किया तो मालूम हुआ कि उसकी तबियत ठीक होने के बाद वह एकदम सही हो गई थी.

एक महीने बाद ही उसकी शादी कर दी गई. इस तरह अंजलि के साथ मेरी वह रात बस एक याद बन कर रह गई. आज भी मैं उसे याद करता हूँ. पहले उसकी कुंवारी चूत की चुदाई के बारे में सोच कर मुट्ठ मारता हूँ और उसको याद करते हुए सो जाता हूँ. उसके बाद मैंने कई चूतों की चुदाई की मगर अंजलि की देसी कुंवारी चूत को चोदने का वो अहसास आज भी भुलाये नहीं भूलता मैं.

आपको मेरी यह कहानी कैसी लगी आप मुझे मेल करके जरूर बतायें. मेरी लाइफ की यह पहली स्टोरी थी जिसमें मैंने एक कुंवारी गांव की चूत को पहली बार चोदा था. दोस्तो, पहली बार कुंवारी चूत को चोदने का मजा ही कुछ और होता है.

जिन्होंने भी गांव की गौरी की कुंवारी चूत को चोद कर मजा लिया है उनको मेरी बात समझ आ रही होगी. इसलिए आप कहानी पर अपनी राय जरूर दें.
अगर आपको यह रियल सेक्स कहानी पसंद आई हो तो मैं आगे भी आपके लिए ऐसी कहानियाँ लेकर आता रहूंगा. मेरा ई-मेल आई-डी नीचे दिया हुआ है.



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