यास्मीन की वासना की आग

(Yasmin Ki Vasna Ki Aag)

प्रेषक : देव

नमस्कार, दिल्ली के देव का जवान लौडों को सलाम और सभी चूतों को मेरे लंड का नमस्कार !

मैं autofichi.ru का पुराना पाठक हूँ। आज अपना अनुभव लिख रहा हूँ। आशा करता हूँ, आपको पसंद आयेगा।

मैं पंजाब का रहने वाला हूँ। दिल्ली में काम के सिलसिले में आया बहुत ढूँढने के बाद लड़कियों के छात्रावास के पास घर किराये पर ले लिया।

उसी दिन शाम को जब खाने के लिए बाहर निकला तो कुछ दूर कुछ कलियों को गप्पें मारते देखा तो हम भी वहाँ जा पहुँचे और रास्ता पूछने के बहाने वार्ता शुरू कर दी। बात को धीरे-धीरे इस प्रकार मोड़ दिया कि मैंने उन्हीं के बारे में जानकारी हासिल कर ली।

वो सब हॉस्टल की रहने वाली थीं। उनमें से एक यास्मीन नाम की लड़की मुझे जरा गौर से ही देखे जा रही थी। मेरी नजर उसी पर टिक गई।

‘आय-हाय क्या फिगर था उसका !’

26 की कमर, 5’8″ का कद और 34 की चूचियाँ, मेरा ध्यान उसी पर आ गया और मैं उसी से ज्यादा बात करने लगा।

करीब 2 घंटे चली, उन बातों में मेरी यास्मीन से अच्छी ताल बैठ गई। मैंने जाते-जाते उसे चुपके से अपना नंबर दे दिया कि किसी को पता न चले।

उसके बाद रात में नींद किसे आनी थी। करीब 10 बजे उसका कॉल आया। बातों-बातों में पता चला कि वो भी चालू किस्म की थी। काफी लड़कों को अपने आस-पास घुमाती रहती थी पर किसी के साथ कामवासना के मजे न ले सकी थी।

जब ऐसी कली पास हो तो फिर तो चोदने का मजा ही अलग हो जाता है।

मैं भी अब उससे जब भी मिलता उसे कमरे में ले जाता और गर्म करके छोड़ देता, रोज उसकी चूत में उंगली कर के छोड़ देता।

दोस्तो, यह गुरु का महा-मंत्र है। एक बार किसी पर आजमाओ, तो लड़की हजार बार चूत देगी, और अपनी सहेलियों को भी चुदवायेगी।

करीब 3-4 दिन तक यूँ ही मैं उससे मजे लेता रहा। रोज उसको गर्न कर के छोड़ देना, लण्ड महाराज को समझाना पड़ता था कि बस कुछ दिन रुक जा। उसके बाद तो जन्नत है।

ऐसा ही हुआ 3 दिन बाद जब वो शाम को घर गई तो उसके इरादे कुछ और ही लग रहे थे। रात में करीब 11 बजे मेरे घर पर दस्तक हुई।

वो घर से तप के मेरे यहाँ आई और आते ही ऐसे गले लग गई, जैसे कब की भूखी हो। मैंने भी उसे हाथों में उठा लिया और पागलों की तरह चूमने लगा।

आज यास्मीन कुछ अलग ही लग रही थी उसका पूरा बदन पानी-पानी होने लगा। तभी मैंने उसे अपने से अलग किया।

उसे देख कर लग नहीं रहा था कि उसका बीच में रुकने का मन था। वो सीधे मेरे पजामे में हाथ डाल कर लण्ड को पकड़ कर हिलाने लगी।

अब मेरे आँखों के सामने, एक फुट की दूरी पर वो संतरे थे जिन्हें दबाकर, निचोड़कर जिनका रस पीने के सपने कई दिनों से देख रहा था। पल्लू गिरते ही समझ आया कि साड़ी भी उसने नाभिदर्शना पहनी है। पतली कमर पर गहरी नाभि देखकर मेरे लण्ड ने सलामी देना शुरु कर दिया। हर पल ऐसे उठ रहा था जैसे ट्रक को जैक लगते समय ट्रक उठता जाता है।

अब मेरा मन बदलने लगा इच्छा होने लगी कि इस ट्रक को सामने वाली की गैराज में रखना ही ठीक होगा। किराया तो दे ही चुका हूँ।

मैं तो वैसे ही सेक्स का शौक़ीन हूँ ! प्यासा तो था ही, जब कुंआ खुद मेरे पास आ गया है तो पीने में क्या हर्ज है।

मेरे शरीर में भी वासना की आग भड़कने लगी।

मैंने अपने दोनों हाथ उसके कंधे पर रख दिए और अपनी ओर खींचा तो वह अमरबेल की तरह मुझसे लिपट गई।

उसके दोनों हाथ मेरी पीठ पर लिपट गए और मुझे भींचकर अपने स्तनों को मेरे सीने से दबाने लगी। उसका सर मेरे कंधे पर था, होंठ और नाक मेरी गर्दन पर गर्म साँस छोड़ रहे थे, जो मुझे रोमांचित कर रहे थे।

फिर दोनों हाथों से मैं उसका सर थाम कर गालों पर माथे पर फिर होंठों पर चुंबन करने लगा। अपने होंठों में उसके होंठ दबाकर मसलने लगा।

अब उसके सिसकारने की आवाज कमरे में मादकता घोल रही थी। उसका शरीर ऐसे ढीला पड़ गया था कि यदि मैं उसे छोड़ देता तो वह रस्सी की तरह नीचे गिर जाती।

मैंने एक हाथ से उसकी साड़ी खोल दी और गोद में उठा लिया, उसने दोनों बाहें मेरे गले में डाल दी, उसे ले जाकर अन्दर के कमरे में पलंग पर लिटा दिया।

मैंने फिर बाहर आकर उसके कमरे पर बाहर से ताला डाला और अपने कमरे को अन्दर से बंद कर लिया।

हमारे यहाँ किसी के आने का कोई सवाल ही नहीं था, अब मैं निश्चिंत होकर कमरे में गया और पलंग पर पड़ी यास्मीन जो पलंग में सर को छुपाकर उलटी पड़ी थी, यानि पीठ और चूतड़ ऊपर थे।

मैं अपने कपड़े उतारकर सिर्फ जांघिए में पलंग पर आकर उसके पास आकर लेट गया और उसकी पीठ को चूमने लगा, एक हाथ से उसके साये को ऊपर खींचकर उसके उन्नत और मांसल नितम्ब सहलाने लगा जो उसनी पैंटी में समा नहीं रहे थे।

अगर मैं गाण्ड मारने का शौकीन होता तो, तो सबसे पहले गाण्ड ही मारता, लेकिन मैं दोनों नितंबों को सहलाने और मसलने के साथ उनको पप्पी करने लगा।

अब फिर उसकी आह निकलने लगी। उसको चित्त लेटाकर उसका ब्लाऊज़ निकाल दिया।

काली ब्रा में उसके मस्त बड़े-बड़े स्तन हीरोइन नीतू सिंह और आयशा टाकिया के चूचों को भी मात दे रहे थे।

मैं उनको सहलाने लगा, उसने अपना हाथ आँखों पर रख लिया, शायद पहली बार उस बेशर्म को शरमाते देखा था।

फिर उसके होंठों को चूमते हुए कान और गले के आसपास गर्म होंठों से जो चुम्मे लिए तो वो मछली की तरह तड़पने लगी।

फिर मैंने उसकी ब्रा को अलग करके एक हाथ से एक संतरे को दबाकर निचोड़ना शुरु किया, दूसरे हाथ से साये के ऊपर से ही चूत का नाप लेने लगा।

काफी फूली हुई थी उसकी चूत, एकदम डबलरोटी की तरह !

दूसरे संतरे को मुँह में लेकर चूसने लगा तो वो मेरे गर्दन और पीठ पर जोरों से हाथ रगड़ने लगी।

फिर मैंने साये का नाड़ा खोलकर जैसे ही शरीर से उसे अलग किया तो उसकी चिकनी, बेदाग, दूधिया, गठी हुई जांघों को देखकर तो मैं अपने होश ही खो बैठा, लगा कि इसकी चूत मारने से पहले ही लण्ड, वीर्य की पिचकारी मार देगा।

मैंने संतरों को छोड़ जांघों पर चुम्बन करना शुरु किया तो पैर के अंगूठे तक पूरा ही चूम डाला।

फिर पैंटी के बगल से ही चूत पर उंगली फिराने लगा। किशमिश जैसे दाने को उंगली से रगड़ने लगा तो यास्मीन ने हाथ बढ़ाकर मेरी चड्डी अलग करके मेरा सात इंच का लण्ड हाथ में पकड़ लिया और उसे जोर से भींचने लगी।

मैंने कहा- जानू, जरा धीरे से पकड़ो, नहीं तो यह घायल हो जायेगा।

फिर वह धीरे-धीरे सहलाते हाथ को ऊपर-नीचे करने लगी, बोली- यह तो मोटा है, मुझे दर्द होगा !

मैंने कहा- तुम चिंता मत करो ! तुम्हें दर्द का अहसास भी न होगा!

अब मैंने उसकी पैंटी को निकाल दिया और 69 की अवस्था में आकर उसकी चूत को देखने लगा।

चूत एकदम गोरी थी उस पर चावल के दाने जितने लम्बे बाल थे, शायद 6-7 दिन पहले ही बनाये होंगे, ज्यादा घने नहीं थे। सो गोरी खाल पर बड़े ही सुन्दर दिख रहे थे।

चूत पर दाना बाहर को निकलता हुआ दिख रहा था, नीचे की फांकें ऐसे लग रही थी जैसे रस में सराबोर मुरब्बा हो !

मैंने उंगली से किशमिश जैसे दाने को छेड़ना चालू किया तो उस ने मेरे लिंग को जीभ से चाटना शुरु कर दिया।

मैंने धीरे से दूसरे हाथ की उंगली को फांकों पर फिराते हुए उंगली को चूत के गुलाबी छेद में डाल दिया।

उस की सीत्कार निकल गई।

अब एक हाथ से मणिमर्दन करते हुए दूसरे हाथ की उंगली छेद में अन्दर-बाहर करने लगा,

उधर यास्मीन ने कब मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर लॉलीपोप की तरह चूसना चालू कर दिया मुझे पता ही नहीं चला।

अब मेरे लण्ड ने ठुमके मारना चालू कर दिया था। वो बहुत गर्म और उत्तेजित हो गई थी।

यह कहानी आप autofichi.ru में पढ़ रहें हैं।

वो कहने लगी- देव, अब मुझसे रहा नहीं जाता, प्लीज़ डाल दो अन्दर और फाड़ दो मेरी बुर को !

मैं घूम कर अपने चेहरे को यास्मीन के चेहरे के करीब ले आया और उसके रस भरे होंठों पर अपने होंठ सटा दिए, जीभ उसके मुँह में डाल दी।

एक हाथ से लण्ड को पकड़कर सुपारा यास्मीन की चूत की गीली रसयुक्त फांकों पर फिराकर चिकना किया, फिर दाने पर रगड़ने लगा।

अब उसने नीचे से गाण्ड उठाकर लण्ड को अपनी चूत में डालने की कोशिश करने लगी।

फिर मैंने लण्ड को चूत के छेद पर टिका करके धीरे से झटका लगाया तो उसकी हल्की चीख निकल गई, “जरा धीरे से डालो ! दर्द होता है !”

मैं दूध दबाते हुए चूसने लगा, दो मिनट बाद मैंने एक जोर का झटका लगाया तो लण्ड जड़ तक चला गया।

मैंने कहा- जानेमन, तुम्हारी चूत इतनी भी नाजुक नहीं है, यह तो इससे दोगुना मोटा लण्ड भी निगल सकती है।

अब उसका दर्द ख़त्म हो गया और गाण्ड को उचकाने लगी। मैंने भी अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया, साथ ही चुचूक को, जो पहले ज्यादा तनकर कड़क हो गए थे, मुँह में लेकर चूस रहा था।

उसकी सीत्कार तेज, और तेज होती जा रही थी।

2-3 मिनट में ही वो अपनी टांगें मेरी कमर से लपेटकर बदन को अकड़ाने लगी, बोली- बहुत ही अच्छा लग रहा है! मैं जाने वाली हूँ!

और बल खाती हुई मुझसे लिपट गई।

“आह… आह.. उह्ह्ह… उह्हह… मजा आ गया..” जैसे शब्द निकल रहे थे।

मैं एक हाथ से उसकी कमर पकड़ कर कभी उसके स्तनों को काट रहा था और कभी उसके होंठों को चूम रहा था।

मैं रुक कर उसके ऊपर पसर गया, दो मिनट बाद मैंने उसको घोड़ी बनाया और चूतड़ों को इस तरह से चौड़ा किया कि चूत उभर कर दिखने लगी, जिसमें से रस बहकर जांघों तक आ रहा था।

अपने लण्ड को उस रस से चुपड़कर, चूत के छेद पर रखा, फिर दोनों हाथ से मोटी चिकनी पिछाड़ी को पकड़कर जोर का धक्का लगा दिया।

उसकी हल्की सिसकारी के साथ पूरा का पूरा लण्ड अन्दर चला गया। मैं उसके चूतड़ों पर अपनी जांघों की ठोकर लगाते हुए चोदन करने लगा।

मैं एक हाथ से उसके स्तन को मसलने लगा, दूसरे हाथ से उसकी चूत के दाने को सहलाने लगा।

लण्ड का अपना काम जारी था, 4-5 मिनट में वह दूसरी बार झड़ गई और वैसी की वैसी पलंग पर गिर गई। मैं भी वैसे ही उसके ऊपर पसरा रहा।

लण्ड अभी भी उसकी भोसड़ी में तन्नाया हुआ घुसा था।

मैंने उसको लेकर पलटी लगाई, अब मैं नीचे और वो ऊपर !

मैंने कहा- आगे अब तुम करो !

तो वह मेरे दोनों और पैर डालकर घुटने मोड़कर बैठ गई और अपने चूतड़ों को उठा-उठा कर चुदाई करने लगी।

अबकी बारी मेरी थी, मैंने कहा- मैं जाने वाला हूँ।

तो बोली- रुको !

फिर वह चित्त लेट गई और अपने पैरों को ऊपर उठा लिया, बोली- तुम ऊपर आ जाओ और अन्दर ही डालकर झड़ना!

मैंने उसकी टांगों को अपने कंधे पर रखकर जो तीव्रगति से चुदाई की तो दोनों एक साथ स्खलित हो गए और एक-दूसरे से ऐसे लिपट गए जैसे दो बदन और एक जान हो।

पूरी चुदाई का कार्यक्रम 30 मिनट चला होगा, लग रहा था जन्मों की प्यास बुझ गई !

थोड़ी देर बाद दोनों अलग हुए, अपने आप को साफ करने के बाद पलंग पर लेट गए, बातें करते हुए एक-दूसरे के अंगों का स्पर्शानन्द ले रहे थे, वो मेरा लण्ड सहला रही थी।

दस मिनट बाद मेरा लण्ड फिर खड़ा हो गया, दोनों ने एक बार फिर से चुदाई का कार्यक्रम चालू कर दिया। अबकी बार चुदाई 40 मिनट तक लगातार चली।

बोली- तुम्हारे साथ मुझे बहुत आनन्द आया और संतुष्टि मिली ! तुम्हारा चुदाई करने का तरीका बहुत अच्छा लगा। मैं अपने कमरे जा रही हूँ।

यह कह कर वह कपड़े पहन कर चली गई।

मैं भी फिर से नहा कर घूमने निकल गया।

उसके बाद तो यह रोज का किस्सा बन गया धीरे-धीरे वो अपनी सहेलियों को भी मुझसे चुदवाने के लिए लाने लगी, लेकिन वो किस्सा आपके मेल आने के बाद लिखूँगा।

तब तक आप अपनी राय मुझे भेजिए और अगली दास्तान का इन्तजार कीजिए।



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