दूध वाले को दुद्दू दिखा कर चुदवाया

(Doodh Wale Ko Duddu Dikha Kar Chudwaya)

दोस्तो, मैं आपकी पुरनी सहेली सीमा सिंह… मैं चंडीगढ़ में रहती हूँ. आज मैं बहुत दिनों बाद आपको कोई कहानी सुनाने जा रही हूँ।
बात दरअसल यह है कि इतने दिनों में कोई कारनामा हुआ ही नहीं था। पति से सेक्स कोई कहानी नहीं बनती। कहनी बनती ही तब है जब आप कोई अलग बात करें।

तो दोस्तो बात यूं हुई कि हमारे घर हर रोज़ राम रत्न दूध देने आता है। करीब 14-15 साल से हम उसी से दूध ले रहे हैं। उसकी आदत है कि वो सुबह 5 बजे आकर दूध दे जाता है। उसके आने पर ही मैं उठती हूँ, और दूध लेने के बाद ही मैं तैयार होकर जॉगिंग के लिए निकल पड़ती हूँ।

अब रात को सोते हुये मैं अक्सर कम ही कपड़े पहनती हूँ, पतली सी नाइटी, या कोई टी शर्ट। नीचे से तो मैं कुछ नहीं पहनती, न निकर, न चड्डी, कुछ भी नहीं।
तो जब सुबह राम रत्न दूध देने आता है तो मैं वैसे ही उस से दूध ले आती हूँ। अब फ्लैट के अंदर किसी को क्या पता चलता है। और राम रत्न भी बहुत ही सीधा और शरीफ है, उसने भी मुझे कभी नहीं घूरा, अगर मेरी नाइटी का गला गहरा है, या मैं सिर्फ टी शर्ट में हूँ तो वो कभी भी मेरे बदन को नहीं झाँकता, बस दूध बर्तन में डाला और वापिस। अब टी शर्ट मेरी लंबी होती है, तो जांघें तो दिखती हैं मगर ऊपर का बाकी समान ढका रहता है।
तो ये तो रूटीन है रोज़ की, न मुझे न राम रत्न को इस से कोई परेशानी नहीं थी।

मगर पिछले हफ्ते, सुबह जब दरवाजे की घंटी बजी और मैं अपनी नाइटी में ही उठी और बर्तन ले कर दरवाजे पर गई, तो देखा वहाँ पर एक 20-21 साल का नौजवान खड़ा था, हाथ में दूध का केन लिए।
मैंने पूछा- तुम कौन हो?
वो बोला- पिताजी को कल बुखार आ आया, तो उन्होने मुझे दूध देने को भेजा है।

मगर इतनी बात करते हुये भी उसने मुझे ऊपर से नीचे तक ताड़ लिया। नाइटी के गहरे गले से दिखते मेरे खुले झूल रहे मम्मे… घुटनों तक की नाइटी के नीचे वेक्स की हुई मेरी चिकनी टाँगें। सुबह सुबह का आलस जो मेरे चेहरे पे साफ झलक रहा था।

मुझे उसका इस तरह घूरना कुछ कुछ बुरा तो लगा, पर मुझे कुछ कुछ रोमांचित भी कर गया। बेशक मैं शादीशुदा हूँ, मगर फिर भी कोई बड़ी चाहत से मेरे बदन को देखे तो मन में सुगबुगाहट तो होती ही है। और थोड़ा सा क्लीवेज अगर उसने देख भी लिया तो क्या फर्क पड़ गया।

दूध लेकर मैंने दरवाजा बंद किया और अंदर आ गई। हाल से गुजरते हुये मेरे निगाह बड़े सारे शीशे पर पड़ी, तो मैं शीशे की तरफ घूम गई, मेरी नाइटी का गला नीचे मेरे पेट तक आ रखा था। दो पर्वत जैसे मम्मो के बीच के गहरी घाटी बड़ी साफ दिख रही थी और मेरे दोनों मम्मे भी बीच में से आधे आधे तो नाइटी के गले से बाहर दिख रहे थे।

वैसे ही मेरे दिल में कुछ अजीब अजीब से विचार आए कि अगर वो लड़का दूध डालते डालते एक हाथ से पकड़ कर मेरा मम्मा दबा देता तो? या फिर मेरी नाइटी नीचे से उठा देता तो? तो… तो क्या होता।
मुझे अपनी सोच पर हंसी भी आई और शर्म भी।

उसके बाद मैं बाथरूम में गई, तैयार होकर जॉगिंग के लिए निकल गई।

रात को एक पार्टी में जाना था, तो वहाँ से काफी लेट वापिस आना हुआ और पार्टी में दोस्तों के संग कुछ ज़्यादा ही चढ़ा ली थी।

पर जब वापिस घर आई और सोने से पहले बाथरूम में अपने कपड़े बदलने गई, तो फ्रेश होने के बाद अपना सारा मेकअप उतारा और फिर अपनी एक टीशर्ट पहनी और शीशे में खुद को देखा, तो वैसे ही सुबह का ख्याल आया कि अगली सुबह भी वही लड़का दूध देने आया तो मुझे इस टीशर्ट देखेगा, तो क्या हाल होगा उसका!

क्योंकि टी शर्ट बड़ी मुश्किल से मेरी कमर से थोड़ी ही नीची थी, ज़रा सा अगर मैं नीचे झुक जाऊँ तो पीछे वाले को सारा नज़ारा दिखे और अगर सिर्फ अपने सर को खुजाने के लिए भी हाथ थोड़ा सा ऊपर उठाऊँ तो सामने वाले को भी पूरा नज़ारा दिखे, बस यही सोचते मैं सोने को चली गई।

सुबह बेल बजी तो मैं उठ कर दूध लेने गई, मगर इस बार मैंने दरवाजा खोलने से पहले खुद को एक बार हाल में लगे बड़े शीशे में देखा। बस सेंटीमीटर के फर्क से ही मेरे गुप्त अंग उस बेचारी टी शर्ट ने छुपा रखे थे। और मम्मों के निप्पल तो टी शर्ट में से साफ उभर कर बाहर को आ रहे थे।

मैंने दरवाजा खोला तो देखा तो वो तो साला बड़ा हरामी निकला। साला पहले ही दूध का केन रख कर नीचे फर्श पर बैठा था। अब जब मैं उसके सामने जा कर खड़ी हुई, तो मेरी टीशर्ट के नीचे से उसने पहले ही मेरी नंगी चूत के दर्शन कर लिए।
अब मैं क्या करूँ, अगर खड़ी रहती हूँ, तो भी मेरी चूत उसे दिखेगी, और अगर बैठ जाती हूँ, फिर मेरा सब कुछ उसे दिख जाएगा।

मैंने अपनी टी शर्ट के आगे वाले हिस्से को खींच कर नीचे को किया, पर इससे तो उसका ध्यान और भी मेरी हुआ। कल तो मेरी नाइटी घुटनों तक थी, मगर आज तो टीशर्ट जांघों से भी ऊपर थी, मेरी मांसल चिकनी जाघें पूरी तरह से उसके सामने नुमाया थी।

उसे घूरता देख मैंने उसे यूं ही हल्का सा डांट कर पूछा- क्यों बे बैठा क्यों है?
वो बोला- मैडम जी क्या बताऊँ, सुबह सुबह इतना काम करना पड़ता है, मैं थक गया, इस लिए बैठ गया।
मगर उसका ध्यान पूरा मेरी चूत की तरफ ही था। मुझे पता था कि वो देख रहा था और मैं भी बेशर्मों की तरह खड़ी उसे दिखा रही थी।

मैंने उसे पूछा- पढ़ता है? स्कूल कॉलेज जाता है?
वो बोला- जी प्लस टू की है, अब तो पिताजी के साथ ही काम करूंगा।

उसके बाद उसने बड़ी हसरत से एक और नज़र मेरी टी शर्ट के नीचे मेरी चूत पर मारी और अपना केन उठा कर चल पड़ा। मैं दरवाजे में खड़ी उसे जाते देखती रही, फिर वापिस अंदर को मुड़ी। बड़े शीशे के सामने पहुँच कर मैंने पाँव के बल बैठ कर देखा।
‘हे भगवान!’ मैं चौंक पड़ी, अगर मैं ऐसे बैठ जाती तो वो मेरी पूरी चूत के खुले दर्शन, दीदार कर लेता। फिर मन में विचार आया, क्या हो अगर मैं उसे अपने खुले दीदार करवा दूँ!
फिर सोचा ‘नहीं यार, अभी छोटा है, नई नई जवानी आई है, पता नहीं हुस्न की यह बाढ़ वो संभाल भी पाएगा या नहीं!’

मगर इतना ज़रूर था कि मेरा मन उस लड़के पर पूरी तरह से बेईमान हो चुका था। कुछ कुछ था, जो मेरे मन की हांडी में पक रहा था। मैं अभी तक यह फैसला नहीं कर पाई थी कि मैं उस लड़के से आगे बात बढ़ाऊँ, या नहीं। अगर बात आगे बढ़ी तो पक्का है मुझे उससे सेक्स तो करना ही पड़ेगा, अब जब उसे अपने जवान और गदराए हुये जिस्म के जलवे दिखा रही हूँ, तो चाहेगा तो वो भी के मैं उसके नीचे लेटूँ। और वैसे भी वो कोई बहुत सुंदर या आकर्षक नहीं था, फिर भी न जाने क्यों उसे गंवार पर मेरा मन मेहरबान हुआ जा रहा था।

अगली रात हम दोनों मियां बीवी ने सेक्स किया, तो रात को तो हम दोनों बिल्कुल नंगे ही सो गए।

सुबह बेल बजी तो मैं उठी, पहले एक बार सोचा कि ऐसे ही चली जाऊँ, मगर अगर वो भी आगे बढ़ा और मुझे सेक्स के लिए मजबूर किया, तो?
अभी तो मेरे पति भी घर पर हैं, अभी तो कुछ भी करना खतरे से खाली नहीं है तो मैंने वार्डरोब से अपना एक सटिन का पीले रंग का गाउन निकाला जो मेरे घुटनों से थोड़ा ऊपर तक था और सामने से खुलता था, उसे सटिन की ही एक बेल्ट से गांठ बांध कर बंद करना पड़ता था।

मैंने बेल्ट की गांठ तो बांधी मगर बहुत ही ढीली सी… जिससे मेरा गला तो पूरा खुला हुआ दिख रहा था, बेल्ट के लगे होने की वजह से मेरी चूत ज़रूर ढकी हुई थी। मैं बर्तन लेकर आई, तो उसने पहले मेरे पूरे जिस्म को घूरा फिर बोला- नमस्ते मैडम जी।
मैंने भी उसे नमस्ते का जवाब दिया।

फिर वो बोला- मैडम जी, आज रात को हमारे पड़ोस में जगराता है, तो कल दूध थोड़ा लेट देने आऊँ तो चलेगा?
मैंने पूछा- कितना लेट?
वो बोला- जी सुबह 9 बजे तक।
मैंने कहा- ठीक है, 9 बजे दे जाना।

कह कर मैं दूध लेकर अंदर आ गई। फिर किचन में जा कर मुझे खयाल आया- अरे नौ बजे तो ये भी काम पे चले जाते हैं, क्या कल को मैं कुछ करने वाली हूँ। पहले तो यह सोचने लगी कि अगर मैंने उसे लिफ्ट दी, तो वो क्या करेगा। फिर सोचा, देखते हैं, अगर कोई बात बनी तो ठीक, नहीं तो रहने दूँगी। मतलब पक्का मैंने कुछ भी नहीं किया, बस सब कल पर ही छोड़ दिया।

अगले दिन सुबह उसने आना नहीं था तो मैं देर तक सोती रही। उस दिन जॉगिंग भी मिस कर दी। सुबह सात बजे उठी और उठ कर अपने पति को नाश्ता और लंच देकर काम पे भेजा।

उनके जाने के बाद सोचा के चलो मैं भी नहा लूँ। मैंने अपने लिए वार्डरोब से काले रंग की प्रिंटेड माइक्रो पेंटी और ब्रा निकाली। पेंटी क्या थी, सिर्फ आगे थोड़ा सा कपड़ा था, बाकी तो एक उंगली जितनी बारीक बेल्ट सी थी, जो पूरी कमर पर घूमती थी और वही बारीक से बेल्ट नीचे चूतड़ों में घुस जाती थी और ब्रा जो वो जालीदार थी, उसमें से तो मेरे मम्मे बिल्कुल साफ दिख रहे थे।

मैं अभी नहा ही रही थी कि डोर बेल बजी। मुझे लगा ‘अरे लो, अभी तो मैं नहाई भी नहीं और ये आ भी गया।’
मैंने जल्दी से बदन पर पड़ा पानी पौंछा और अंदर से ही पूछा- कौन?
वो बाहर से बोला- मैडम जी मैं हूँ, दूध लाया हूँ।

रिमोट से मैंने अपना इलैक्ट्रिकल लॉक वाला दरवाजा खोला तो वो दूध का केन लेकर अंदर आ गया। मैंने बाथरूम से ही उसे कह दिया कि दूध किचन में फ्रिज में रख दे। मैं अभी अपनी ब्रा पेंटी पहन रही थी कि मुझे पहले फ्रिज का दरवाजा बंद होने और फिर बाहर का मेन गेट बंद होने की आवाज़ सुनाई दी।

मैंने सोचा- लो, वो तो गया, और मैं खामख्वाह सेक्सी लौंजरी पहन रही थी।

बाथरूम से बाहर आकर मैंने अपने बाल सँवारे और फिर ब्रा पेंटी में ही किचन में गई। मैंने फ्रिज खोल कर देखा, दूध का बर्तन फ्रिज में पड़ा था। मैंने अपने लिए नाश्ता बनाने के लिए फ्रिज से जूस निकाला और ब्रैड के स्लाइस पॉप अप टोस्टर में डाले।
अभी मैं ये काम कर ही रही थी कि पीछे से आवाज़ आई- मैडम जी?
मैं तो एकदम से चौंक पड़ी।

पीछे मुड़ कर देखा, वो तो मेरे सामने खड़ा था।
“तुम” मेरे मुँह से निकला- तुम गए नहीं?
उसको ऐसे अपने सामने देख कर मैं तो घबरा गई, मुझे खुद को ढाँपने के लिए कुछ मिल नहीं रहा था, क्या करती, किस चीज़ से खुद का नंगापन छुपाती।

वो तो मुझे घूरे जा रहा था और मुझे खुद को छुपने की कोई जगह नज़र नहीं आ रही थी। मगर मेरी निगाहें किसी कपड़े को ढूंढ रही थी जिससे मैं अपना बदन ढाँप सकती। और कुछ नहीं मिला तो मैंने एक छोटे किचन टॉवल से अपने बूब्स ढकने की कोशिश की।
वो बोला- मैडम जी, दूध का बिल लेना था तो मैं तो बाहर हाल में रुक गया था।

मतलब उसने मुझे मेरे बेडरूम से निकल कर किचन तक ऐसे ही ब्रा पेंटी में जाते हुये देखा था। मैं बहुत हैरान थी, परेशान थी कि अब इस से मैं क्या छुपाऊँ। अब अगर किचन टॉवल से मैंने अपने बूब्स को छुपा लिया था वो मेरी चड्डी और जांघों को घूर रहा था।
कुछ सोच कर मैंने अपने सीने से भी वो किचन टॉवल हटा दिया कि अब सब कुछ तो इसने देख लिया है।

जब मैंने वो टॉवल साइड पे रख दिया तो वो थोड़ा हकला कर बोला- म… मैडम जी… क्या घर में आप ऐसे ही रहती हैं?
मैंने कहा- क्यों?
वो बोला- आप को डर नहीं लगता, आप इतनी सुंदर हो, कोई आपसे कुछ गलत कर दे तो?
मैंने कहा- बाहर से दरवाजा हर वक्त लॉक रहता है, कोई अंदर आ नहीं सकता, तो डर किस बात का?
वो बोला- पर मैं तो आ गया।

मैंने उसकी ओर देखा, उसके लोअर में उसका लंड तन चुका था। मैंने टोस्टर को स्विच ऑफ किया और उसके बिल्कुल सामने जा कर खड़ी हो गई- तुमसे मुझे क्या डर, तुम क्या कर सकते हो?

मेरे इतना कहते ही वो मुझसे चिपक गया- मैडम जी… ओह… मैडम जी!
कहते हुये उसने मुझे अपनी बांहों में कस लिया और अपना चेहरा मेरे दोनों मम्मों में घुसा दिया। उसका तना हुआ लंड मैं अपनी जांघ पर रगड़ता हुआ महसूस कर रही थी।

वैसे तो मैं भी शुरू से ही उस पर बेईमान थी, मगर फिर भी मैंने थोड़ा सा नखरा किया- नहीं, छोड़ो मुझे… छोड़ कमीने…
मैंने नकली सा विरोध किया मगर उसकी पकड़ मजबूत थी। उसने मेरे क्लीवेज को चूमा और अपनी जीभ मेरे दोनों बूब्स के बीच की घाटी में घुमाई- ओह मैडम जी, आप कितनी सेक्सी हो, मैडम जी आपकी तो मैं कब से लेने की सोच रहा था!
वो मेरे मम्मों पर अपना चेहरा रगड़ते हुये बुदबुदाया।

अब ज़्यादा नखरे करने की कोई ज़रूरत नहीं थी, जो मैं चाहती थी, वो मुझे मिल रहा था तो मैंने उसे कहा- सुनो, यहाँ किचन में नहीं, उधर बेडरूम में चलते हैं।
उसने झट से मुझे छोड़ दिया, मैं उसका हाथ पकड़ कर उसे बेडरूम में ले गई।

यह कहानी आप autofichi.ru में पढ़ रहें हैं।

बेडरूम में जाते ही उसने मुझे फिर से पकड़ा और धकेल कर बेड पे गिरा दिया। मैं बेड पे लेटी उसे देखने लगी, उसने अपनी कमीज़, बानियान, लोअर और चड्डी सब एक साथ ही उतार कर फेंक दिया।

21 साल का नौजवान, कसा हुआ बदन, सीने पर हल्के हल्के बाल, मगर झांट पूरी भरी हुई और झांटों के बीच में किसी खंबे की तरह खड़ा उसका लंड एकदम सीधा, ऊपर को उठा हुआ। उसने अपने लंड को हाथ में पकड़ा और उसकी चमड़ी पीछे हटा कर अपना गुलाबी रंग का टोपा बाहर निकाला।
जैसे उसका बदन मजबूत था, वैसे ही उसका लंड भी पूरा मजबूत था।

वो मेरे पास आया, मैंने अपनी टाँगें फैला दी। उसने पहले मुझे उल्टा करके लेटा दिया, फिर अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों चूतड़ दबा कर देखा, मेरे दोनों चूतड़ों को चूमा, उन्हें खोल कर देखा। मेरी पीठ पर हाथ फेर कर देखा, मेरे ब्रा पर अपने हाथ फिरा कर देखे।
“मैडम जी!” वो बोला।
मैंने सिर्फ “हूँ” कहा।

वो बोला- जब भी औरतों के ब्रा उनके पतले कपड़ों में से झाँकते देखता था न, अक्सर सोचता था, ब्रा भी कितना खुशकिस्मत है, सारा दिन कितने खूबसूरत मम्मों से चिपकी रहती है। और चड्डी भी कितने सुंदर चूतड़ों और चूतों से चिपकी रहती है।
मैंने कहा- तो तू ये सब देखता है?
वो बोला- जवान हो गया हूँ, मैडम जी, क्यों न देखूँ? और न भी देखूँ तो भी ये चीज़ें मुझे अपनी तरफ खींचती हैं। जिस दिन पहली बार आपको दूध देने आया था, न उस दिन आपकी नाइटी में आपके झूलते मम्मे देखे मेरा तभी दिल किया उन्हें पकड़ के दबा के देखने का। फिर उस दिन आपकी चूत देखी टी शर्ट के नीचे से, मेरा दिल किया, आगे बढ़ कर इसे चूम लूँ!
कहते हुये उसने मेरे ब्रा की हुक खोल दी।

मैं भी पलट कर सीधी हो गई, और जैसे ही मैंने अपनी ब्रा उतारी उसने साथ की साथ मेरी पेंटी भी खींच कर उतार दी।
मैंने कहा- ले अब सब कुछ तेरे सामने खुला पड़ा है, जो करना है कर, इन्हें दबा कर देख, इसे चूम ले चूस ले चाट, जो चाहता है कर ले।

वो बहुत खुश हुआ और मेरे ऊपर आ कर लेट गया। पसीने की एक तेज़ गंध मेरी साँसों में समा गई, मगर इस वक़्त मैं खुद इतनी गर्म हो चुकी थी कि मुझे उसके पसीने में से भी जैसे खुशबू आ रही हो।
ऊपर लेटते ही उसने मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसना शुरू कर दिया, मुझे ये बिल्कुल भी पसंद नहीं आया, क्योंकि मुझे उसका मुँह उतना साफ सुथरा नहीं लगा, जितना मैं खुद को रखती थी।

तो मैंने अपना मुँह घुमा लिया, तो उसने मेरे गाल और बाकी सारे चेहरे को चाट डाला, मेरे दोनों मम्मे अपने हाथों में पकड़ पकड़ कर चूसे।
इस मामले वो बिल्कुल वहशी थी, उसे बिल्कुल भी नहीं पता था कि एक हाई क्लास औरत से सेक्स कैसे करते हैं, वो तो बस मुझे नोचने में लगा था। यहाँ मुँह मार… वहाँ मुँह मार! जैसे इतना खूबसूरत बदन देख कर वो पागल सा ही हो गया था।

मैंने उसे मना नहीं किया, जहां उसका दिल किया उसने चूमा, जहां दिल किया काट खाया। मैंने भी बीच बीच कभी उसकी पीठ सहला दी, कभी उसका लंड सहला दिया, कभी उसके आँड या गांड को अपने कोमल हाथों से सहला दिया।
मेरा तो हल्का सा स्पर्श भी उसे रोमांचित कर जाता था।

फिर वो बोला- मैडम जी, अपनी टाँगें खोलो।
मुझे लगा शायद ये मेरी चूत चाटना चाहता है, मैंने अपनी दोनों टाँगें पूरी तरह से फैला दी।

मगर मेरी सोच के उलट वो मेरी टाँगों के बीच में आया और उसने अपना लंड मेरी चूत पर रख दिया। मुझे वैसे भी कोई ऐतराज नहीं था। उसने हल्का सा ज़ोर लगाया और उसके लंड का चमकदार गुलाबी टोपा मेरी नर्म गुलाबी चूत में घुस गया।
“मैडम जी, आज पहली बार मैंने किसी औरत की भोंसड़ी में लंड डाला है।”
“हाउ चीप!” मैंने सोचा- कितनी घटिया भाषा का इस्तेमाल करता है।

मगर वो था ही ऐसा, शायद उसके घर में आस पड़ोस में ऐसी ही भाषा का इस्तेमाल होता हो।

मैं चुपचाप लेटी रही, उसने बिना मेरी किसी भावना का खयाल रखे बस अपना सारा लंड मेरी चूत के अंदर पेल दिया। जब पूरा घुस गया तो वो लगा आगे पीछे हिलने।
मैंने पूछा- पहले कहाँ देखा था कि ऐसे सेक्स करते हैं।
वो बोला- मैडम जी, देखा तो बस ब्लू फिल्मों में और आस पड़ोस के घरों में ही है। एक बार अपने भैया और भाभी को देखा था।

“अच्छा?” मैंने पूछा- तो अपनी भाभी को नंगी देख कर उसके साथ करने को दिल नहीं किया।
वो बोला- ना जी, उसको तो नंगी देखा ही नहीं, वो तो बेड पे लेटी थी, बस भैया उसके ऊपर नंगे लेटे हिल रहे थे।

उसने मेरी टाँगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली, अब उसका लंड और मेरी चूत दोनों एक दूसरे के सामने आ गए, तो वो पूरी जान लगा के मुझे चोदने लगा। मुझे दर्द होने लगा और मैं तड़प उठी, मेरे मुँह से आनंद से नहीं बल्कि तकलीफ के कारण “आह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… उफ़्फ़” निकल रहे थे और वो सोच रहा था कि मुझे मज़ा आ रहा था।

मुझे उसके साथ सेक्स में कोई ज़्यादा मज़ा नहीं आ रहा था क्योंकि वो पीछे से लाकर लंड सीधा मेरी चूत के अंदर मारता जिससे मुझे चोट लगती और मैं तड़प उठती, पर वो और खुश होता।
मेरे मम्मों को भैंस के थन समझ कर ही ज़ोर ज़ोर से निचोड़ रहा था और मेरे मम्मों को दबा दबा कर उसने गुलाबी कर दिया था।

“मैडम जी, सच में आप बड़ी हॉट हो, आपकी भोंसड़ी मार के मज़ा आ गया, दिल करता है ऐसे चोदता रहूँ।”
मैंने उसे कहा- अच्छा, तो मज़े से चोदो, प्यार से!

मगर उसने मेरी बात सुनी ही नहीं और वैसे ही वहशियों की तरह चोदने में लगा रहा। लड़के में दम था, करीब 20 मिनट तक वो लगातार पूरी जान से मुझे चोदता रहा। मैं बेशक इस सेक्स को शुरू में इतना एंजॉय नहीं कर रही थी, मगर थोड़ी देर बाद मुझे उसका ये बर्बरता पूर्ण किया हुआ संभोग भी आनंदित करने लगा। मैं दो बार झड़ चुकी थी, मगर मैंने उसे नहीं बताया कि मेरा हो गया है।

20 मिनट बाद जब वो झड़ा, जैसे वो मुझे कच्चा चबा जाना चाहता था, गरम माल से मेरी चूत को भर के वो मेरे ऊपर ही गिर पड़ा। पसीने से लथपथ, कितनी देर मैं उसके चिपचिपे बदन से चिपकी पड़ी रही।
फिर मैंने उसे उठाया और अपने साथ बाथरूम में ले गई, खुद दोबारा नहाई, उसे भी नहलाया।

नहा कर उसने अपने कपड़े पहने, मैंने सिर्फ ब्रा पेंटी पहनी।

जो भी था, पर उसका देसी चुदाई का तरीका मुझे अच्छा लगा।
तैयार होकर वो बोला- अच्छा मैडम जी, चलता हूँ, कल कब आऊँ?
मैंने कहा- इसी वक़्त आ जाना।
वो बोला- ठीक है मैडम जी, पर वो बिल के पैसे तो दे देती?
मैंने कहा- क्यों इतनी सुंदर औरत को चोद कर भी तुझे पैसे चाहिए?
वो बोला- वो जो पैसे तो पिता जी को देने ही पड़ेंगे।

मैंने अलमारी से पैसे निकाले और अपने ब्रा में फंसा लिए। उसकी तरफ घूम कर बोली- ले ले, पर पैसे को हाथ मत लगाना।
पहले तो वो समझा नहीं, फिर आगे बढ़ा और अपने मुँह से उसने नोट पकड़ कर मेरी ब्रा से खींच लिए।
“अरे वाह!” मैंने कहा- तू तो बड़ा चालाक है।

वो मुस्कुरा दिया और मुझे एक टाईट झप्पी देकर चला गया। मैं वैसे ही ब्रा पेंटी में ही किचन में गई, और अपने लिए नाश्ता नाश्ता बनाने लगी।

वो करीब 10-12 दिन हमारे घर दूध डालने आता रहा, हर रोज़ नौ साढ़े नौ बजे आता, हर रोज़ मुझे चोदता। मैंने उसे चुदाई के सारे तरीके बताए कि कैसे औरत को पहले गर्म करते हैं, फिर कैसे कैसे चोदते हैं। मगर चूत चाटने को कभी नहीं माना। हाँ अपना लंड खूब चुसवाता था मुझसे।

अब भी कभी कभी राम रत्न से मैं पूछ लेती हूँ- और राम रत्न, बेटा क्या कर रहा है?
वो सर झुकाये बोलता- जी बस शादी कर दी उसकी, अब तो बस लुगाई के चक्कर लगावे है।
मैं समझ जाती कि मेरा शागिर्द अपना काम बढ़िया से कर रहा है।



"sex photo kahani""kammukta story""sex kahani photo ke sath""hot sex story""online sex stories""best sex story""sexy aunty kahani""मौसी की चुदाई""hindi sex story in hindi""hot hindi sex stories""mastram sex story""chudai kahani maa"www.kamukta.com"hot teacher sex""sexy gay story in hindi""hot hindi sex stories""chudai ki khani""xxx story"chudaikikahani"mom chudai story""hindi xossip""hot sex stories in hindi""hindi sexy story bhai behan""antarvasna bhabhi""girlfriend ki chudai ki kahani""baap beti chudai ki kahani""hondi sexy story""chudai kahani maa""gay sex story""hindi aex story""xossip hot""www.sex stories""sex story very hot""kajol sex story""sex storues""mom ki sex story""hot sexy kahani""erotic stories hindi""hinde sex sotry""mother son sex story""sexy chut kahani""hindi sex kahani""kamukta khaniya""hot sexy kahani""sexy hindi katha""photo ke sath chudai story""hindi sec stories"kaamuktachodancom"uncle sex story""latest hindi sex stories""gay chudai""hinde sexstory""sexy story hindi photo""sexy gand""hinde sexy story com""hot store in hindi""www sexy khani com""didi ki chudai""hot sexs""sex story inhindi""chudai mami ki""chudai kahaniya hindi mai""hot sexy bhabhi""sexy khani""antarvasna bhabhi""hindi sexy storys""indian sex stories""erotic hindi stories""hindi sexy story hindi sexy story""www hindi sexi story com""hindi sexy storiea""hindi sexi storise""sexi hot kahani""sex stories hot""chodan ki kahani""gandi kahaniya"kamuktra"sex story hindi""indian mom sex story"kamukatakamukat"hinde sexy storey"chudaikikahani"chachi ki chudae"