भाभी की भतीजी से वासना भरा प्यार और चुदाई

(Bhabhi ki bhatiji se vasna bhara pyar aur chudai)

दोस्तो, कैसे हो आप सब… मेरा नाम भूपेन्द्र है और मैं राजस्थान के भीम का रहने वाला हूँ. मेरी उम्र 21 साल है. मैं autofichi.ru का बहुत ही पुराना और नियमित पाठक हूँ. मैं हमेशा सोचता रहा हूँ कि अपनी कहानी भेजूँ लेकिन किसी न किसी कारणवश भेज नहीं पाता हूँ.

ये मेरी पहली कहानी है, जो मेरी दूर की रिश्तेदार के साथ चुदाई की कहानी है. उसका नाम टुटू था. हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं.

यह बात आज से 2 साल पहले की है. मेरे भाई की शादी के समय की है. मेरा पूरा परिवार शादी से पहले मेरी भाभी जी से और उनके घर वालों से मिल चुका था. सिर्फ़ मैं ही नहीं मिल पाया था. क्योंकि मैं उस वक्त अहमदाबाद में रह कर पढ़ाई कर रहा था.

मैं भैया की शादी से 2 महीने पहले ही अहमदाबाद आया था क्योंकि एग्जाम होने वाले थे.

फिर वो दिन आया, जिस दिन भैया की बारात गयी. हम सब बहुत खुश थे. सभी बारात में गए थे. वहाँ पर मैंने पहली बार भाभी के परिवार वालों को देखा था. भाभी जी को भी उसी दिन देखा था.

वहां 2-3 लड़कियां मुझे बहुत मस्त लग रही थीं. शादी के बाद हम सभी शाम को घर आ गए. घर में सब शादी के कारण व्यस्त थे, मुझे वापस जाना था. मेरा दूसरे दिन एग्जाम था, इसलिए मैं तैयारी में लग गया.

इसी महीने मेरी बुआ जी की लड़की की भी शादी थी. मैं वहां चार पाँच दिन पहले चला गया था. जब मैं शादी से वापस लौटा तो मैंने देखा कि एक लड़की मेरे घर पे आई है.

उसको मैं नहीं जानता था, लेकिन मैंने एक बार देखा हुआ था. यह वही लड़की थी, जो शादी के दिन मेरे को पानी पिला रही थी. ये भाभी के भाई की लड़की थी. इस लड़की से शादी की शाम को ही हमारी थोड़ी बहुत बात हुई थी. उसका नाम सुमन था.

उसकी एक छोटी बहन भी है, जिसका नाम टुटू है. ये नाम मैंने प्यार से रखा है, वैसे उसका नाम कुछ दूसरा है… जो मैं लिखना नहीं चाहता.

कुछ दिन तक मैं सुमन से यूं ही छोटी मोटी बातें करता रहा. फिर एक दिन मेरी मुलाकात उसकी छोटी बहन से हुई. उस दिन सुमन और वो दोनों आई थीं. उस समय मैं टुटू को नहीं जानता था, वो भी मेरे को बस नाम से ही जानती थी. लेकिन पहचानती नहीं थी. मैं तो उसको देखता रह गया, वो तो बला की खूबसूरत थी… किसी परी से कम नहीं थी. वो 18 साल की कमसिन सी लड़की थी.

उसके 2-3 दिन बाद ही टुटू हमारे घर आई. वो और सुमन दोनों ही आई थीं.

मैं और सुमन दोनों बैठ कर बातें कर रहे थे, तभी टुटू आई और बोली- क्या बातें हो रही हैं.
तब हम दोनों ने साथ में जवाब दिया- कुछ खास नहीं.
तो वो बोली- मुझे पता है, तुम लोग आपकी गर्लफ्रेंड के बारे में बात कर रहे हो… मुझे उसके बारे में सब कुछ पता है.
मैं सुमन की तरफ देखने लगा, उसको यह सब कैसे पता चला, मैं यह सोच रहा था.

इस तरह से धीरे धीरे हमारी दोस्ती गहरी होने लगी. फिर एक दिन हम सब घूमने गए, जहां से हमारी दोस्ती आगे परवान चढ़ने लगी. हम सभी शाम को वापस आए. ऐसे करते करते हमारे दिन निकलने लगे.

थोड़े दिन बाद टुटू अपने घर चली गयी. मेरे पास उसका नंबर नहीं था… न ही उसके पास मेरा नम्बर था.

फिर एक दिन भाभी जी मोबाइल पर एक मिस्ड कॉल आया जो कि एक अज्ञात नंबर था.

मैंने अपने नंबर से कॉल किया तो आगे से एक बहुत ही मीठी आवाज़ में हैलो सुनाई दिया. मेरी तो आवाज़ ही नहीं निकली.

वो बोल रही थी- कौन बोल रहे हो?
मैंने कहा- भूपेन्द्र बोल रहा हूँ.
वो बोली- आप?
मैंने कहा- हां मैं.

वो टुटू ही थी. उसके बाद हमने काफी देर तक बातें की. उस समय मैं छुट्टियों में आया था. अब हमारी रोज फोन पर बात होने लगी. एक दिन मैंने उसको भी बुला लिया. जिस दिन वो मेरे घर पे आई, मैं उसको देख के दंग रह गया. वो क्या माल लग रही थी. फिर मौका देख कर मैंने उसको कमरे में बुलाया. वहाँ पर हम दोनों अकेले ही थे. मैं उसको पकड़ा और गले से लगा लिया.

वो भी मेरे गले लग गयी थी और बोल रही थी- जानू आई मिस यू… मैंने तुमको कितना मिस किया.
मैंने उसका चेहरा ऊपर उठाया तो उसने अपनी नज़रें झुका लीं. मैं उसको होंठों पर किस करने लगा, वो भी मेरा साथ दे रही थी.
फिर मैंने अपने आपको उससे छुड़ाते हुए कहा- अगर किसी ने देख लिया तो गड़बड़ हो जाएगी.
वो बोली- प्यार किया तो डरना क्या?

उस दिन पूरे दिन हम दोनों साथ रहे. रात को सोते वक़्त मेरे पास आकर बोली- मुझे तो यही सोना है.
मम्मी ने मेरा, खुद का और उसका बिस्तर लगा दिया. मम्मी उसको बोल रही थीं कि मेरे पास सो जा.

तो वो बोली कि मुझे मूवी देखनी है इसलिए मैं भूपेन्द्र भैया के पास सोऊंगी. फिर इयरफोन लगा कर हम दोनों मूवी देखने लगे. मूवी का तो एक बहाना था हमें तो साथ सोना था. हमारी आँखों में नींद कहाँ थी, हम तो इंतज़ार कर रहे थे कि सब सो जाएं.

जब सब सो गए, तब हम एक दूसरे को किस करने लगे. वो मेरे ऊपर आ गयी थी और मेरे को किस कर रही थी. धीरे धीरे हम दोनों अपने आप में इतना खो गए और भूल गए कि वहाँ पर मम्मी भी हैं.

मैं अपना हाथ धीरे धीरे उसके सर पर घुमाने लगा, उसके चेहरे पर हाथ घुमाने लगा. मैंने एक हाथ उसके सलवार में डाल दिया और उसकी चूत में उंगली करने लगा. उसने पेंटी नहीं पहनी थी. वो धीरे धीरे सिसकारियां लेने लगी. वो ‘उन्ह एयेए एयेए उम्म्ह… अहह… हय… याह… हुहह आई आ न्न्ह उन्ह…’ कर रही थी. मैंने उसकी चुत से उंगली बाहर निकाली और उसकी तरफ मुँह करके उसको चूमने लगा. उसके नरम नरम गालों पर किस करने लगा. वो एकदम गरम हो चुकी थी… पर मम्मी के वहीं होने के कारण हम दोनों ने इससे आगे कुछ नहीं किया.

हम दूसरे दिन का इंतज़ार करने लगे. दोनों सुबह तक नहीं सोए, बस एक दूसरे से मस्ती करते रहे थे.

यह कहानी आप autofichi.ru में पढ़ रहें हैं।

मैंने उसको नीचे से नंगी कर दिया था और शर्ट को भी ऊपर सरका दिया था. क्या मक्खन चुचियां थीं उसकी… आह… दबाने में बहुत मजा आ रहा था.
एक चुची को मैं मुँह में लेकर चूसने लगा.
आह… हम दोनों चुदास की लज्जत से भर चुके थे. मैं कभी एक चुची चूसता तो कभी दूसरी चूसता.
मैं शब्दों में ब्यान नहीं कर सकता कि उस समय में कैसा महसूस कर रहा था. वो कामुक सिसकारियां ले रही थी, आह… प्लीज़… ऊं… आह ऊंउनह… कर रही थी.

फिर सुबह वो जल्दी उठ गई थी. सब उठ गए थे, सिर्फ़ मैं ही सोता रहा था. उस रूम में मैं अकेला ही सो रहा था. तभी वो मुझे उठाने आई और होंठों पर किस करते हुए बोली- गुड मॉर्निंग.
मैं भी उसको किस करके बोला- वेरी गुड मॉर्निंग.
वो एक प्यारी सी स्माइल दे कर जाने लगी, तो मैंने पकड़ कर बेड पर खींच लिया. वो धम से बेड पर आ गिरी. मैं उसके ऊपर चढ़ गया और किस करने लगा.

वो बोली- छोड़िए ना… क्या कर रहे सुबह सुबह…
मैंने कहा- प्यार कर रहा हूँ.
तो वो बोली- नहीं… अभी नहीं बाद में… पहले आप उठ जाओ.

इस प्रकार हम दोनों सुबह में ही चालू हो गए. मैं उसके मम्मों को कपड़ों के ऊपर से ही दबाने में लग गया और साथ ही मैं उसके होंठों को चूम रहा था. वो मेरा साथ दे रही थी.
तभी मम्मी ने पुकारा तो हम दोनों फट से दूर हो गए. वो स्माइल करके बाहर भाग गई.

दिन में सभी लोग किसी न किसी काम बिज़ी थे. मैं और वो दोनों, दूसरे कमरे में बैठे बातचीत कर रहे थे. हमारी प्यार भरी बातें चल रही थीं.

फिर मैंने उसको उठाकर अपनी गोद में बैठा लिया और उसके मम्मों को दबाने लगा. वो भी मजा लेने लगी. बाद में मैंने उसको बेड पर लिटाया और हमारा किस करना चालू हुआ.

वो गर्म होने लगी थी, धीरे धीरे सिसकारियां लेने लगी. मैंने उसके पजामा का नाड़ा पकड़ा और खींच लिया. अगले ही पल उसके पजामे को निकाल दिया. उसने अन्दर काले रंग की पेंटी पहन रखी थी, उसके गोरे दूधिया जिस्म पर काले रंग की पेंटी बहुत ही जंच रही थी.

फिर मैंने उसकी जाँघों को चूमना चालू किया, तो वो गांड उछालने लगी.
मैंने कहा- क्या हुआ?
तो बोली- गुदगुदी होती है.

फिर कपड़े निकालना चालू किए तो वो बोली- इसको मत निकालो, कोई आ गया तो जल्दी नहीं पहन पाऊंगी.

इसके बाद ऐसे ही ऊपर उठाकर उसके मम्मों को दबाने में लग गया. कुछ देर बाद मैंने अपनी पैन्ट उतारी और अंडरवियर भी उतार लिया. मैं अपना लंड उसकी चुत पर सैट करने लगा. वो एक सील पैक माल थी, इसलिए मैं बहुत ही आराम से चुदाई करना चाहता था. मैंने अपने लंड को थूक से गीला किया और उसकी चुत पर थूक मला, जिससे कि मेरा लंड उसकी चुत में आराम से चला जाए.

फिर मैं उसको चूमने लगा, उसके ऊपर से ही उसके मम्मों को मसल रहा था. मैंने उसको एकदम से गरम कर दिया था. वो भी लंड लेने को मचल रही थी. मैंने लंड का सुपारा उसकी चुत की फांकों में सैट करने के लिए रगड़ा तो उसने अपने दोनों हाथों से अपनी चूत की फांकों को चौड़ा कर दिया. मैंने लंड उसकी चुत में सैट करते हुए धक्का लगाया तो वो एकदम से उछल पड़ी.
मैंने कहा- क्या हुआ?
वो बोली- दर्द हो रहा है… आराम से.

फिर मैंने उसको चूमना चालू किया, जिससे वो दर्द को भूल गई. मैंने उसका मुँह अपने मुँह में लेकर उसकी जीभ को चूसना शुरू किया और अचानक ही ज़ोर का झटका दे मारा, जिससे उसकी चीख निकल गई. लेकिन उसका मुँह अपने मुँह में होने के कारण आवाज़ अन्दर ही दब गई. वो छटपटाने लगी. उसकी आँखों में आँसू आने लगे.

मैंने कहा- बेबी ठीक हो?
उसने कराहते हुए कहा- हूँ… मैं ठीक हूँ… धीरे धीरे करो…

उसके बाद मैं धीरे धीरे लंड अन्दर पेलने लगा. कुछ देर बाद वो नॉर्मल हो चुकी थी. मुझे भी मज़ा आने लगा था. वो धीरे धीरे सिसकारियां करने लगी- आह जानू उन्ह… ईयीई… आआहज… ओहो इह एयेए… ईया…
इस तरह से वो सेक्स को बहुत ही एंजाय कर रही थी, उसकी चुत की सील टूट चुकी थी.
अब वो भी नीचे से धक्के लगा रही थी.

अचानक उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और ज़ोर से दबाने लगी. मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है.
तभी वो एकदम से अकड़ते हुए झड़ गई. उसकी गर्मी पाकर साथ में मैं भी झड़ने वाला था, तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और झड़ गया.
लंड का पानी निकाल कर मैं उसके ऊपर ही गिर गया. उसने मुझे बांहों में भर लिया और चूमा.
बोली- आज मुझे मेरी सारी ख़ुशियां मिल गईं… आई लव यू.



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